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Panipat News: महाभारत काल में दुर्योधन हारकर तालाब में छुपे थे, पांडवों के यहां आहार करने से नाम पड़ा आहार, बाद में नाम बदल रखा अहर

Thu, 28 May 2026 02:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत Updated Thu, 28 May 2026 02:10 AM IST
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During the Mahabharata period, Duryodhana was defeated and hid in a pond. The Pandavas had eaten there and hence it was named Aahar, later it was renamed Ahar.
वैद्य उमा दत्त शर्मा। संवाद - फोटो : Samvad
जगमहेंद्र सरोहा
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अहर (पानीपत)। इसराना खंड के अहर गांव का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के दौरान भीम और दुर्योधन के बीच हुए गदा युद्ध में थकने के बाद दुर्योधन गांव के तालाब, जिसे अब बोडंग वाला तालाब कहा जाता है, में आकर छिप गए थे। बताया जाता है कि तालाब के पास बरगद के पेड़ के नीचे दोनों के बीच युद्ध हुआ था।

ग्रामीणों के अनुसार, पांडवों ने इसी स्थान पर आहार (भोजन) किया था। इसी कारण गांव का नाम पहले ‘आहार’ पड़ा, जो समय के साथ बदलकर ‘अहर’ हो गया। गांव में स्थित बड़े तालाब की बुर्जी और कांच की पोड़ी आज भी इन मान्यताओं की गवाही देती हैं। हालांकि अतिक्रमण के चलते बुर्जी और कांच की पोड़ी अब मिट्टी में दब चुकी हैं।
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गांव को बसाने को लेकर एक अन्य मान्यता भी प्रचलित है। इसके अनुसार राजस्थान के राजा रोड़ के वंशजों ने यहां आकर गांव बसाया था।

अहर गांव जिला मुख्यालय से करीब 31 किलोमीटर दूर पानीपत-सींक मार्ग पर स्थित है। अमर उजाला की टीम ने ‘मेरा गांव मेरी शान’ अभियान के तहत ग्रामीणों के बीच करीब तीन घंटे बिताकर गांव के इतिहास और अन्य पहलुओं की जानकारी जुटाई।
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जिला परिषद के पूर्व सदस्य सुमेर सिंह खैंची ने बताया कि कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली का राजपाट छीनने के बाद उस समय के राजाओं से सोने की चिड़िया मांगी थी। राजस्थान के बहरोड़ किले के राजा रोड़ ने डोला (रिश्ता) देने से इन्कार कर दिया था। इसके बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने रक्षाबंधन तक राज्य समाप्त करने की धमकी दी।

उन्होंने बताया कि राजा रोड़ अपने कुछ सैनिकों के साथ बादली (दिल्ली) के आसपास जंगलों में आकर रहने लगे। उस समय दूर-दूर तक छोटी-छोटी बस्तियां हुआ करती थीं। बाद में शासकों ने लोगों से वसूली शुरू कर दी।

अकबर के शासनकाल में राजस्व मंत्री टोडरमल ने सीमांकन के लिए पत्थर गड़वाए थे। समय बीतने के साथ राजा रोड़ के वंशज बादली छोड़कर आसपास के क्षेत्रों में आकर बस गए।



सुमेर सिंह के अनुसार, पूर्वजों की मान्यता है कि एक बार एक भैंस तेजी से दौड़ती हुई जा रही थी और किसी के रोकने पर नहीं रुक रही थी। उसी दौरान किरपी थरड़क नाम की युवती वहां से गुजर रही थी। उसने भैंस की रस्सी पर पैर रख दिया, जिससे भैंस वहीं रुक गई। इसके बाद खैंची गोत्र के एक व्यक्ति ने किरपी से विवाह का प्रस्ताव रखा। विवाह के बाद किरपी के परिवार ने उन्हें खेड़ा दान में दे दिया और बाद में अहर गांव में खैंची गोत्र के लोग बस गए।



वैद्य उमा दत्त शर्मा ने बताया कि अहर और इसके साथ लगने वाला कुराना गांव महाभारत कालीन माने जाते हैं। मान्यता है कि कौरवों के आने से कुराना और पांडवों के यहां आहार करने से आहार गांव बसा था, जो बाद में अहर कहलाया।

उन्होंने बताया कि उनके पिता कृष्ण दत्त कहा करते थे कि मंदिर के पास स्थित बड़े तालाब में महाभारत काल में दुर्योधन जल में छिपकर बैठे थे। यहां कांच की पोड़ी और बुर्जी हुआ करती थी। मान्यता है कि दुर्योधन जहां बैठते थे, वहां से पानी पीछे हट जाता था।


उमा दत्त शर्मा ने बताया कि भीम और दुर्योधन के बीच बरगद के पेड़ के नीचे युद्ध हुआ था। उनके परदादा तोताराम ने काशी में पूजा-पाठ करने के बाद गांव लौटकर तालाब के पास पेड़ के नीचे तपस्या की थी। बाद में उन्होंने यहां शिव मंदिर का निर्माण करवाया। उनके बाद दादा रामेश्वर दत्त ने भी मंदिर में पूजा-अर्चना की परंपरा को आगे बढ़ाया।

वैद्य उमा दत्त शर्मा। संवाद

वैद्य उमा दत्त शर्मा। संवाद- फोटो : Samvad

वैद्य उमा दत्त शर्मा। संवाद

वैद्य उमा दत्त शर्मा। संवाद- फोटो : Samvad

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