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Panipat News: बांध गांव में शामलात भूमि पर फेंके जा रहे मरे हुए चूजे, बीमारी फैलने का डर
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बांध के जंगल में पड़े हुए मरे हुए चुजे। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
इसराना। बांध गांव के ठोला वाले जंगल में ग्राम पंचायत की शामलात भूमि पर पोल्ट्री फार्म व हैचरी संचालकों द्वारा खुलेआम मरे हुए चूजे और मुर्गियां फेंके जाने का गंभीर मामला सामने आया है। शरारती तत्वों और फार्म मालिकों की इस मनमानी के कारण क्षेत्र में बदबू फैल गई है। इससे पूरे गांव में गंभीर बीमारियां फैलने का डर बना हुआ है।
क्षेत्र के पोल्ट्री फार्मों और हैचरी में किन्हीं कारणों से रोजाना हजारों की संख्या में चूजे और मुर्गे मर जाते हैं। फार्म संचालक नियमों को ताक पर रखकर इन मृत जीवों को ठिकाने लगाने के बजाय, चुपके से गांव की शामलात व गोचर भूमि पर खुले में फेंक देते हैं। इस गंदगी के कारण आसपास का पूरा वातावरण बेहद दूषित हो चुका है। हालत यह है कि जो ग्रामीण रोजाना सुबह-शाम शुद्ध हवा के लिए जंगल की तरफ सैर करने जाते थे, वे अब बदबू के कारण घरों में ही कैद रहने को मजबूर हैं। वहीं, इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों को भी अपनी नाक और मुंह बंद करके निकलना पड़ रहा है।
ग्रामीण जगत सिंह, मोनू, आनंद, बलबीर और रमेश ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार ग्राम पंचायत को भी अवगत कराया जा चुका है लेकिन अभी तक धरातल पर कोई ठोस समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले और बीमारी को न्योता देने वाले इन फार्म संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और जल्द से जल्द इस गंदगी को यहां से हटवाया जाए।
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इसराना। बांध गांव के ठोला वाले जंगल में ग्राम पंचायत की शामलात भूमि पर पोल्ट्री फार्म व हैचरी संचालकों द्वारा खुलेआम मरे हुए चूजे और मुर्गियां फेंके जाने का गंभीर मामला सामने आया है। शरारती तत्वों और फार्म मालिकों की इस मनमानी के कारण क्षेत्र में बदबू फैल गई है। इससे पूरे गांव में गंभीर बीमारियां फैलने का डर बना हुआ है।
क्षेत्र के पोल्ट्री फार्मों और हैचरी में किन्हीं कारणों से रोजाना हजारों की संख्या में चूजे और मुर्गे मर जाते हैं। फार्म संचालक नियमों को ताक पर रखकर इन मृत जीवों को ठिकाने लगाने के बजाय, चुपके से गांव की शामलात व गोचर भूमि पर खुले में फेंक देते हैं। इस गंदगी के कारण आसपास का पूरा वातावरण बेहद दूषित हो चुका है। हालत यह है कि जो ग्रामीण रोजाना सुबह-शाम शुद्ध हवा के लिए जंगल की तरफ सैर करने जाते थे, वे अब बदबू के कारण घरों में ही कैद रहने को मजबूर हैं। वहीं, इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों को भी अपनी नाक और मुंह बंद करके निकलना पड़ रहा है।
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ग्रामीण जगत सिंह, मोनू, आनंद, बलबीर और रमेश ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार ग्राम पंचायत को भी अवगत कराया जा चुका है लेकिन अभी तक धरातल पर कोई ठोस समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले और बीमारी को न्योता देने वाले इन फार्म संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और जल्द से जल्द इस गंदगी को यहां से हटवाया जाए।
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