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कोरोना के कारण बंद हुई पैसेंजर ट्रेन ने छीना हजारों युवाओं का रोजगार
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जब से कोरोना महामारी आई है, हजारों युवा रोजगार से हाथ धो बैठे हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति जींद-पानीपत-रोहतक लाइन पर चलने वाली पैसेंजर ट्रेन के बंद होने से पैदा हुई है। पैसेंजर ट्रेन का संचालन बंद होने से इस रूट के हजारों युवा रोजगार से हाथ धो बैठे हैं। वहीं, कई दैनिक रेल यात्रियों को बसों व दूसरे प्राइवेट वाहनों में सफर कर अपनी ड्यूटी देनी पड़ रही है। इसकी एवज में उन्हें पैसेंजर ट्रेन के मुकाबले 3 से 6 गुना किराया वहन करना पड़ रहा है। औद्योगिक नगरी पानीपत में काम करने वाले इस रूट के हजारों कामगारों की अधिकतर बचत तो भारी-भरकम किराए में ही चली जाती है। ऐसे हजारों युवाओं ने पैसेंजर ट्रेन सेवा बहाल करने की मांग की है। यात्रियों का कहना है कि अब कोरोना महामारी नियंत्रण में है, अधिकतर ट्रेनों का संचालन शुरू हो चुका है तो जींद-पानीपत-रोहतक रूट की पैसेंजर ट्रेन क्यों नहीं चलाई जा रही।
रोजगार के लिए औद्योगिक नगरी पहुंचते थे हजारों युवा
औद्योगिक नगरी पानीपत में लाखों प्रवासी विभिन्न उद्योगों में कार्य कर रहे हैं। वहीं, पानीपत जिले सहित साथ लगते जिलों करनाल, जींद, सोनीपत, रोहतक आदि से हजारों युवा रोजगार के लिए पानीपत के उद्योगों पर निर्भर हैं। जींद-पानीपत-रोहतक रेलवे लाइन तीन जिलों को आपस में जोड़ती है। तीनों जिलों के बीच चलने वाली पैसेंजर ट्रेन में इस रूट के हजारों युवा पानीपत के उद्योगों में काम करते हैं।
क्या कहते हैं दैनिक रेल यात्री
मुझे दिल्ली की एक कंपनी में काम के लिए हर रोज ट्रेन से आना-जाना होता है। जींद-पानीपत-रोहतक के बीच चलने वाली ट्रेन बंद होने से पानीपत तक प्राइवेट वाहनों में सफर करना पड़ता है, जिसके लिए उसे तीन गुना ज्यादा किराया वहन करना पड़ रहा है।
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-तेजबीर सिंह, दैनिक यात्री, गांव भालसी।
गांव में रोजगार के साधन कम होने के कारण वह पानीपत फैक्ट्रियों में काम करने जाता था ताकि परिवार का गुजर-बसर किया जा सके। जब से पैसेंजर ट्रेन बंद हुई है, उसे पानीपत आने जाने के लिए प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ता है, जो तीन गुना महंगा पड़ता है।
जगबीर, दैनिक यात्री, गांव नौल्था।
मैं रोहतक स्थित एक कंपनी में काम करता हूं। कंपनी के काम के लिए मुझे हर रोज रोहतक आना जाना होता है, लेकिन जब से ट्रेन बंद है, उसे प्राइवेट वाहनों या बसों में रोहतक आना-जाना पड़ता है। इसके लिए मुझे करीब 5 गुना ज्यादा किराया चुकाना पड़ता है। पैसेंजर ट्रेन का संचालन शुरू किया जाना चाहिए।
विक्रम, दैनिक यात्री, गांव नौल्था।
जब से कोरोना महामारी ने पांव पसारे हैं, जींद-पानीपत-रोहतक रूट पर चलने वाली पैसेंजर ट्रेन का संचालन बंद हैं। दैनिक यात्रियों को प्राइवेट वाहनों में कई गुना किराया चुकाना पड़ रहा है। कोरोना पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा चुका है। अब इस ट्रेन सेवा को बहाल किया जाना चाहिए।
- जयभगवान, दैनिक यात्री।
गांव में रोजगार के साधन कम हैं। पानीपत में फैक्ट्रियों में काम मिल जाता था। ट्रेन से आवागमन सरल था, लेकिन बसों में किराया 3-4 गुना ज्यादा लगने के कारण उन्हें पानीपत आना-जाना छोड़ना पड़ा क्योंकि अधिकतर दिहाड़ी किराए में ही चली तजाती थी। अब गांवों में ही दिहाड़ी कर गुजारा कर रहा हूं।
-महावीर, मजदूर, गांव नौल्था।
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रोजगार के लिए औद्योगिक नगरी पहुंचते थे हजारों युवा
औद्योगिक नगरी पानीपत में लाखों प्रवासी विभिन्न उद्योगों में कार्य कर रहे हैं। वहीं, पानीपत जिले सहित साथ लगते जिलों करनाल, जींद, सोनीपत, रोहतक आदि से हजारों युवा रोजगार के लिए पानीपत के उद्योगों पर निर्भर हैं। जींद-पानीपत-रोहतक रेलवे लाइन तीन जिलों को आपस में जोड़ती है। तीनों जिलों के बीच चलने वाली पैसेंजर ट्रेन में इस रूट के हजारों युवा पानीपत के उद्योगों में काम करते हैं।
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क्या कहते हैं दैनिक रेल यात्री
मुझे दिल्ली की एक कंपनी में काम के लिए हर रोज ट्रेन से आना-जाना होता है। जींद-पानीपत-रोहतक के बीच चलने वाली ट्रेन बंद होने से पानीपत तक प्राइवेट वाहनों में सफर करना पड़ता है, जिसके लिए उसे तीन गुना ज्यादा किराया वहन करना पड़ रहा है।
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-तेजबीर सिंह, दैनिक यात्री, गांव भालसी।
गांव में रोजगार के साधन कम होने के कारण वह पानीपत फैक्ट्रियों में काम करने जाता था ताकि परिवार का गुजर-बसर किया जा सके। जब से पैसेंजर ट्रेन बंद हुई है, उसे पानीपत आने जाने के लिए प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ता है, जो तीन गुना महंगा पड़ता है।
जगबीर, दैनिक यात्री, गांव नौल्था।
मैं रोहतक स्थित एक कंपनी में काम करता हूं। कंपनी के काम के लिए मुझे हर रोज रोहतक आना जाना होता है, लेकिन जब से ट्रेन बंद है, उसे प्राइवेट वाहनों या बसों में रोहतक आना-जाना पड़ता है। इसके लिए मुझे करीब 5 गुना ज्यादा किराया चुकाना पड़ता है। पैसेंजर ट्रेन का संचालन शुरू किया जाना चाहिए।
विक्रम, दैनिक यात्री, गांव नौल्था।
जब से कोरोना महामारी ने पांव पसारे हैं, जींद-पानीपत-रोहतक रूट पर चलने वाली पैसेंजर ट्रेन का संचालन बंद हैं। दैनिक यात्रियों को प्राइवेट वाहनों में कई गुना किराया चुकाना पड़ रहा है। कोरोना पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा चुका है। अब इस ट्रेन सेवा को बहाल किया जाना चाहिए।
- जयभगवान, दैनिक यात्री।
गांव में रोजगार के साधन कम हैं। पानीपत में फैक्ट्रियों में काम मिल जाता था। ट्रेन से आवागमन सरल था, लेकिन बसों में किराया 3-4 गुना ज्यादा लगने के कारण उन्हें पानीपत आना-जाना छोड़ना पड़ा क्योंकि अधिकतर दिहाड़ी किराए में ही चली तजाती थी। अब गांवों में ही दिहाड़ी कर गुजारा कर रहा हूं।
-महावीर, मजदूर, गांव नौल्था।