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अमेरिका और यूरोपियन देशों के चीन के बहिष्कार के बाद पानीपत के उद्यमियों की बढ़ी उम्मीदों पर किसान आंदोलन ने लगाए ब्रेक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 07 Jan 2021 01:05 AM IST
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संदीप भौरिया
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पानीपत। कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुआ किसान आंदोलन बढ़ता ही जा रहा है। आंदोलन से अब उद्योग जगत की कमर टूटने लगी है। करोड़ों का नुकसान झेल चुके उद्योगपति अब इस आंदोलन के जल्द खत्म होने की आस में हैं। किसान आंदोलन के चलते पानीपत के कारोबारियों को करीब 1500 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। कोरोना काल में यूरोपियन देशों और अमेरिका द्वारा चीन के उत्पादों का बहिष्कार करने पर पानीपत के उद्यमियों को बड़े स्तर पर ऑर्डर मिले। पानीपत का एक्सपोर्ट 10 हजार करोड़ से बढ़कर 13 हजार करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन इन उम्मीदों पर किसान आंदोलन ने पानी फेर दिया। उद्यमी समय पर ऑर्डर नहीं दे पा रहे हैं। आंदोलन का बड़ा असर, पैकेजिंग, हैंडलूम, डाइंग और एक्सपोर्ट पर पड़ रहा है। उद्यमियों का तैयार माल दिल्ली की घरेलू मार्केट में नहीं जा पा रहा है।
पैकेजिंग पर पड़ा सबसे ज्यादा असर
किसान आंदोलन का सबसे बुरा प्रभाव पानीपत के पैकेजिंग उद्योग पर पड़ रहा है। उत्पादों की पैकिंग का काम 90 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ है। उद्यमियों को माल काफी लेट मिल रहा है, जो माल मिल रहा है, वो दूसरे रास्तों से पानीपत पहुंच रहा है। इससे एक्सपोर्ट का खर्च डेढ़ गुना तक बढ़ गया है। उद्यमियों को दिल्ली, राजस्थान और गुजरात की ओर से मिलने वाला रॉ मैटेरियल नहीं मिल रहा है। कंपनियों नेे पैकेजिंग के दाम 35 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं। कंबल, गद्दे, बेडशीट, तकिए, मशीन पैकेजिंग उत्पाद समेत सभी प्रकार के माल का स्टाक पूरा हो चुका है। मजबूरन उद्यमियों को उत्पादन भी रोकना पड़ रहा है। इसलिए पैकेजिंग उद्यमियों को ऑर्डर भी मिलना बंद हो गया है।
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एक दिन में 25-30 करोड़ रुपये का नुकसान
लॉकडाउन के बाद किसान आंदोलन से टेक्सटाइल सिटी पर फिर से संकट मंडरा रहा है। अगर जल्द आंदोलन खत्म नहीं हुआ तो ये नुकसान कई गुना तक बढ़ सकता है। 27 नवंबर से हैंडलूम उद्योग को प्रतिदिन 25-30 करोड़ रुपये का झटका लग रहा है। कच्चा माल है नहीं और हैंडलूम उत्पाद बन नहीं पा रहे हैं। जबकि उद्योग संचालन का खर्च ज्यों का त्यों हैं। हालांकि हैंडलूम उद्योगपति जैसे तैसे विदेशों में ऑर्डर पहुंचाने में कामयाब हो रहे हैं।
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उद्यमी बोले
पानीपत का धागा वैसे तो 75 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में एक्सपोर्ट होता है। 25 प्रतिशत धागा राजस्थान और गुजरात में जाता है। वहां के बॉर्डर सील हैं। वहां समय पर माल भेजने में बहुत परेशानी हो रही है।
-प्रीतम सचदेवा, उद्यमी
कंपनियों के पास माल की कमी हो गई है। अगर आंदोलन लंबा हुआ तो पैकेजिंग उद्योग के हालत बदतर हो जाएंगे। स्थिति लॉकडाउन से भी खराब है, लेबर खाली बैठी है। उन्हें भी वेतन देना पड़े रहा है।

- श्रीभगवान अग्रवाल, प्रधान सेक्टर 29 इंडस्ट्रियल एस्टेट एसोसिएशन
डेढ़ माह से माल की डिलिवरी देने के लिए जूझ रहे हैं। उन्हें मुश्किल से केमिकल मिल पा रहा है। जिन उद्यमियों को दिल्ली की घरेलू मार्केट में उत्पाद देने हैं, उन्हें दिक्कत हो रही है। ट्रांसपोर्ट महंगा पड़ रहा है।
- भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
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