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अधिकतर हेलमेट न पहनने वालों और अंडर ऐज के काटे चालान
Updated Sat, 21 Oct 2017 01:14 AM IST
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जीआरपी ने चलाया चेकिंग अभियान, 15 के काटे चालान
पानीपत। जीआरपी एसआई ईश्वर सिंह के नेतृत्व में स्टेशन परिसर में वाहनों की चेकिंग का अभियान चलाया गया और अधिकतर हेलमेट न पहनने वालों और अंडर ऐज के चालान काटे गए। चेकिंग अभियान के दौरान 15 चालान काटे गए।
एसआई ईश्वर सिंह ने बताया कि दोपहिया वाहनों के कागज न हो तो चलाई जा सकती है। लेकिन बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन चलाना खतरे से खाली नहीं होता। चूंकि हादसा कहीं भी किसी भी वक्त और किसी के साथ ही घट सकता है। इसलिए दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट और चार पहिया वाहन चलाते समय सीट बेल्ट अवश्य लगानी चाहिए। जिससे हादसे होने की परिस्थिति में वाहन चालक के बचने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं दूसरी और अंडर ऐज अर्थात 18 वर्ष से कम के बच्चों के चालान काटे गए। अंडर ऐज के बच्चों के माता-पिता को मौके पर बुलाया गया और उनके चालान काटे गए। चूंकि 18 वर्ष से नीचे बच्चों को दोपहिया वाहन देना अपनी और सड़क पर चल रहे पैदल व अन्य वाहन चालकों की जान को खतरे में डालना जैसा ही है। इसलिए उनके चालान काटे गए। एसआई ईश्वर सिंह ने बताया कि शुक्रवार को कुल 15 चालान काटे गए। यह अभियान निरंतर चलता रहेगा।
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पानीपत। जीआरपी एसआई ईश्वर सिंह के नेतृत्व में स्टेशन परिसर में वाहनों की चेकिंग का अभियान चलाया गया और अधिकतर हेलमेट न पहनने वालों और अंडर ऐज के चालान काटे गए। चेकिंग अभियान के दौरान 15 चालान काटे गए।
एसआई ईश्वर सिंह ने बताया कि दोपहिया वाहनों के कागज न हो तो चलाई जा सकती है। लेकिन बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन चलाना खतरे से खाली नहीं होता। चूंकि हादसा कहीं भी किसी भी वक्त और किसी के साथ ही घट सकता है। इसलिए दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट और चार पहिया वाहन चलाते समय सीट बेल्ट अवश्य लगानी चाहिए। जिससे हादसे होने की परिस्थिति में वाहन चालक के बचने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं दूसरी और अंडर ऐज अर्थात 18 वर्ष से कम के बच्चों के चालान काटे गए। अंडर ऐज के बच्चों के माता-पिता को मौके पर बुलाया गया और उनके चालान काटे गए। चूंकि 18 वर्ष से नीचे बच्चों को दोपहिया वाहन देना अपनी और सड़क पर चल रहे पैदल व अन्य वाहन चालकों की जान को खतरे में डालना जैसा ही है। इसलिए उनके चालान काटे गए। एसआई ईश्वर सिंह ने बताया कि शुक्रवार को कुल 15 चालान काटे गए। यह अभियान निरंतर चलता रहेगा।
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