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डीजीपी और एसपी पर हाईकोर्ट की अवमनाना का आरोप, सरकार से मांगा जवाब
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पंजाब व हरियाणा हाई ने गांव सनौली खुर्द निवासी आसाराम प्रकरण के मुख्य गवाह महेंद्र चावला की याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब मांगा है। इस प्रकरण में याची ने डीजीपी हरियाणा मनोज यादव और पानीपत एसपी सुमित कुमार के खिलाफ हाईकोर्ट में अदालत के आदेश की अवमानना की याचिका दायर की है। जिस पर अदालत ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर 2 नवंबर तक जवाब मांगा है।
याचिका में याची ने कहा है कि आसाराम से समझौता का दबाव बनाने के लिए गांव सनोली खुर्द के पूर्व सरपंच और आसाराम के अन्य अनुयाइयों ने 2018 में महेंद्र चावला के खिलाफ लघु सचिवालय में प्रदर्शन कर एसपी और डीसी को शिकायत दी थी। जो पानीपत पुलिस के उच्च अधिकारियों की जांच में झूठी पाई गई थी। इसके बाद महेंद्र चावला ने पानीपत पुलिस व हरियाणा पुलिस के बड़े अधिकारियों को उक्त सभी के खिलाफ धारा 182, 211, 120 बी धारा में केस दर्ज करने के लिए अनेकों पत्र दिए। सुनवाई न हुई तो महेंद्र चावला ने कोर्ट ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मई माह में आदेश जारी किए, लेकिन लगभग चार माह बाद भी हाईकोर्ट के आदेश की पालना नहीं हुई। इसके बाद महेंद्र चावला ने पुन: हाई कोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई, तो हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता से लिया है। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है, जिसमें वस्तु स्थिति से अवगत कराने के बारे में कहा है।
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याचिका में याची ने कहा है कि आसाराम से समझौता का दबाव बनाने के लिए गांव सनोली खुर्द के पूर्व सरपंच और आसाराम के अन्य अनुयाइयों ने 2018 में महेंद्र चावला के खिलाफ लघु सचिवालय में प्रदर्शन कर एसपी और डीसी को शिकायत दी थी। जो पानीपत पुलिस के उच्च अधिकारियों की जांच में झूठी पाई गई थी। इसके बाद महेंद्र चावला ने पानीपत पुलिस व हरियाणा पुलिस के बड़े अधिकारियों को उक्त सभी के खिलाफ धारा 182, 211, 120 बी धारा में केस दर्ज करने के लिए अनेकों पत्र दिए। सुनवाई न हुई तो महेंद्र चावला ने कोर्ट ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मई माह में आदेश जारी किए, लेकिन लगभग चार माह बाद भी हाईकोर्ट के आदेश की पालना नहीं हुई। इसके बाद महेंद्र चावला ने पुन: हाई कोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई, तो हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता से लिया है। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है, जिसमें वस्तु स्थिति से अवगत कराने के बारे में कहा है।
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