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Panipat News: सफाई का ठेका खत्म, 150 टन कूड़े से अटा शहर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 15 May 2024 05:56 AM IST
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Cleaning contract ended, city littered with 150 tons of garbage
पानीपत। नगर निगम की ओर से शहर को चार जोन में बांटकर दिया गया सफाई का ठेका खत्म होने से दोनों एजेंसिंयों के करीब एक हजार से ज्यादा कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। शहर 150 टन कूड़े से अटा पड़ा है। आगामी दिनों में यह समस्या और अधिक गंभीर होगी। क्योंकि एजेंसी का ठेका खत्म हो गया है। इसको रिन्यू नहीं किया गया है। अब एक हजार कर्मचारी सड़कों पर उतर आए हैं। मंगलवार को आक्रोशित कर्मचारियों ने जीटी रोड पर उल्टे झाड़ू लेकर मार्च निकाला और एलिवेटिड पुल के नीचे एकजुट होकर प्रदर्शन किया। इसकी सूचना मिलते ही भाजपा जिला अध्यक्ष दुष्यंत भट्ट कर्मचारियों को समझाने पहुंचे। उन्होंने मांग की है कि सरकार ठेका प्रथा को बंद कर उन्हें पे रोज पर करे। भाजपा जिला अध्यक्ष ने कहा कि आचार संहिता में नया टेंडर नहीं लगाया जा सकता और न ही ऐसी कोई पाॅलिसी बनाई जा सकती जिससे उन्हें पे रोल पर किया जा सके। वे आचार संहिता के अंतर्गत वे मौजूदा सफाई के टेंडरों को बढ़ाने की कोशिश करा सकते हैं। इसके बाद कर्मचारी शहरी विधायक प्रमोद विज से मिले। शहरी विधायक ने भी उन्हें इसी प्रकार का आश्वासन दिया।
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सफाई का ठेका समाप्त होने की वजह से मंगलवार से शहर की सड़कों, गलियों, नालों और कूड़े की ढेरियों का उठान बंद हो गया है। जिससे शहर में करीब 150 टन कूड़े का उठान नहीं हो पाया। हालांकि शहर में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का काम चलता रहा। नगर निगम क्षेत्र में ये दोनों एजेंसी रोजाना शहर से करीब 150 टन कूड़े का उठान करती है। दोनों एजेंसिंयों के चार जोन में करीब एक हजार से ज्यादा कर्मचारी बेरोजगार हो चुके हैं। जिससे इन कर्मचारियों में रोष है। अब निगम के कच्चे-पक्के कर्मचारियों पर अब सफाई का पूरा बोझ आ चुका है। ये कर्मचारी भी शहर की मुख्य सड़कों और बाजारों की ही सफाई तो कर रहे हैं लेकिन संसाधन और मैनपावर कम होने से कॉलोनियों की सफाई नहीं हो सकी और न ही कूड़े के ढेर उठे।
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इन एक हजार सफाई कर्मचारियों के साथ कूड़ा उठाने वाले 60 ट्रैक्टर ट्राली, बड़े नालों की सफाई और कूड़ा उठाने का काम करने वाली चार जेसीबी मशीन, 150 रिक्शा और चार रोड स्वीपिंग मशीन भी हट चुके हैं। इन पर लगे कर्मचारी भी अब घर बैठ गए हैं। जिससे शहर की मुख्य सड़कों की सफाई अब इन मशीनों से नहीं हो सकेगी। इसका अतिरिक्त बोझ भी निगम के 513 कर्मचारियों को झेलना पड़ेगा।
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सफाई बंद, डोर टू डोर चालू-
शहर को चार जोन में बांटकर पिछले दो साल से सफाई का काम निगम ने प्रतिमाह तीन से सवा तीन करोड़ में पूजा कॉन्सूलेशन और आईएनडी कंपनी को दिया है। इनका काम गलियों, नालों, सड़कों की सफाई और कूड़े की ढेेरियों को उठाने का है। इनके करीब एक हजार कर्मचारी शहर से रोजाना करीब 150 टन कूड़ा उठाती हैं। दूसरी ओर शहर से डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का काम जेबीएम का है। इसके लिए निगम जेबीएम को प्रतिमाह 20 से 25 लाख रुपये का भुगतान करता है। जेबीएम शहर से करीब 100 टन कूड़ा निकालती है।




वर्जन-
मौके पर जाकर कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया। उन्हें बताया गया कि आचार संहिता में न तो नया टेंडर हो सकता है और न ही कोई नई पॉलिसी बनाई जा सकती। आचार संहिता तक टेंडर को बढ़ाया जा सकता है ताकि ये कर्मचारी बेरोजगार न हों। इसी के लिए प्रयास किया जा रहा है।
दुष्यंत भट्ट, जिला अध्यक्ष भाजपा।

वर्जन-

इस मामला को मुख्यालय में उच्च अधिकारियों के संज्ञान में भी भेजा जा चुका है। उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।

साहिल गुप्ता, आयुक्त, नगर निगम।
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