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नेशनल खेलते हुए थे चौटिल, डॉक्टर ने इलाज के लिए भी कर दिया था मना, खुद किया इलाज, फेंका 79.50 मीटर भाला
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पानीपत। उग्राखेड़ी के विक्रांत मलिक ने मोदी नगर, उत्तर प्रदेश में आयोजित ओपन जेवलिन थ्रो चैंपियनशिप में 79.50 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीता है। उन्होंने खुद का नया रिकॉर्ड बनया है।
विक्रांत ने बताया कि वे मोदी नगर चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए नहीं गए थे। उनके पास एक भाला है, जिसकी कीमत एक लाख रुपये है। कुछ दिन पहले उसका पेंट उतर गया था तो वे जेवलिन पर पेंट कराने के लिए मोदी नगर गए थे। वहीं जेवलिन थ्रो चैंपियनशिप चल रही थी। उन्होंने भी भाग लिया और पहली थ्रो में ही भाला 79.50 मीटर दूर फेंका। विक्रांत का कहना है कि अब वह सीनियर फेडरेशन 2022 के लिए तैयारी कर रहे हैं। जिसमें उनका लक्ष्य 85 मीटर से दूर भाला फेंकना है। इससे पहले विक्रांत 03 नेशनल व सात स्टेट चैंपियनशिप में जीत चुके पदक हैं।
कोहनी का इलाज खुद किया
विक्रांत को 2014 में नेशनल चैंपियनशिप में चोट लग गई थी। डॉक्टरों ने इलाज करने से इनकार कर दिया था। तीन साल तक विक्रांत ने घर पर ही अपना इलाज किया और अब दोबारा भाला फेंकना शुरू किया।
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पिता राजेंद्र ही 9 साल से विक्रांत को दे रहे कोचिंग
विक्रांत के पिता राजेंद्र आर्मी में कोच थे। रिटायर होने के बाद उन्होंने बेटे विक्रांत को भाला फेंक खेल के बारे में बताया और 2013 से ही कोचिंग देनी शुरू कर दी। अब तक विक्रांत के पिता ही उनको गांव में रहकर कोचिंग दे रहे हैं। विक्रांत का कहना है कि उनके पिता ने ही उन्हें भाला फेंकने की तकनीक बताई है, जिसकी बदौलत वह आज अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
पांच किलोमीटर दूर जाकर करना पड़ता है अभ्यास
विक्रांत ने बताया कि वह सप्ताह में दो से तीन दिन भाला फेंकने का अभ्यास करते हैं। गांव में स्टेडियम न होने के कारण उसे चौटाला रोड के सिवाह स्टेडियम में जाकर अभ्यास करना पड़ता है। जो गांव उग्राखेड़ी से पांच किलोमीटर दूर है। चौटाला रोड पर यह स्टेडियम भी दो से तीन महीने पहले ही बनकर तैयार हुआ है। उससे पहले वह गांव में ही खेत में भाला फेंककर अभ्यास करते थे।
दूसरे जिले में अभ्यास नहीं करना चाहते विक्रांत
विक्रांत अपने गांव के अलावा कहीं और अभ्यास नहीं करना चाहते हैं। विक्रांत तीन बार अच्छी तैैैयारी के लिए पंचकुला, दिल्ली व भिवानी जा चुके हैं। विक्रांत दो-दो दिन पंचकूला और दिल्ली में रहकर आए हैं। वे एक महीने भिवानी में तैयारी करके आ चुके हैं। विक्रांत का कहना है कि वहां पर ज्यादा अच्छी तैयारी नहीं हो रही थी, जिस वजह से वह वापस अपने गांव आ जाते हैं।
नेशनल चैंपियनशिप में तीन सिल्वर
जूनियर नेशनल चैंपियनशिप 2013 में सिल्वर मेडल
सीनियर नेशनल चैंपियनशिप 2018 में सिल्वर मेडल
ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल
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विक्रांत ने बताया कि वे मोदी नगर चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए नहीं गए थे। उनके पास एक भाला है, जिसकी कीमत एक लाख रुपये है। कुछ दिन पहले उसका पेंट उतर गया था तो वे जेवलिन पर पेंट कराने के लिए मोदी नगर गए थे। वहीं जेवलिन थ्रो चैंपियनशिप चल रही थी। उन्होंने भी भाग लिया और पहली थ्रो में ही भाला 79.50 मीटर दूर फेंका। विक्रांत का कहना है कि अब वह सीनियर फेडरेशन 2022 के लिए तैयारी कर रहे हैं। जिसमें उनका लक्ष्य 85 मीटर से दूर भाला फेंकना है। इससे पहले विक्रांत 03 नेशनल व सात स्टेट चैंपियनशिप में जीत चुके पदक हैं।
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कोहनी का इलाज खुद किया
विक्रांत को 2014 में नेशनल चैंपियनशिप में चोट लग गई थी। डॉक्टरों ने इलाज करने से इनकार कर दिया था। तीन साल तक विक्रांत ने घर पर ही अपना इलाज किया और अब दोबारा भाला फेंकना शुरू किया।
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पिता राजेंद्र ही 9 साल से विक्रांत को दे रहे कोचिंग
विक्रांत के पिता राजेंद्र आर्मी में कोच थे। रिटायर होने के बाद उन्होंने बेटे विक्रांत को भाला फेंक खेल के बारे में बताया और 2013 से ही कोचिंग देनी शुरू कर दी। अब तक विक्रांत के पिता ही उनको गांव में रहकर कोचिंग दे रहे हैं। विक्रांत का कहना है कि उनके पिता ने ही उन्हें भाला फेंकने की तकनीक बताई है, जिसकी बदौलत वह आज अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
पांच किलोमीटर दूर जाकर करना पड़ता है अभ्यास
विक्रांत ने बताया कि वह सप्ताह में दो से तीन दिन भाला फेंकने का अभ्यास करते हैं। गांव में स्टेडियम न होने के कारण उसे चौटाला रोड के सिवाह स्टेडियम में जाकर अभ्यास करना पड़ता है। जो गांव उग्राखेड़ी से पांच किलोमीटर दूर है। चौटाला रोड पर यह स्टेडियम भी दो से तीन महीने पहले ही बनकर तैयार हुआ है। उससे पहले वह गांव में ही खेत में भाला फेंककर अभ्यास करते थे।
दूसरे जिले में अभ्यास नहीं करना चाहते विक्रांत
विक्रांत अपने गांव के अलावा कहीं और अभ्यास नहीं करना चाहते हैं। विक्रांत तीन बार अच्छी तैैैयारी के लिए पंचकुला, दिल्ली व भिवानी जा चुके हैं। विक्रांत दो-दो दिन पंचकूला और दिल्ली में रहकर आए हैं। वे एक महीने भिवानी में तैयारी करके आ चुके हैं। विक्रांत का कहना है कि वहां पर ज्यादा अच्छी तैयारी नहीं हो रही थी, जिस वजह से वह वापस अपने गांव आ जाते हैं।
नेशनल चैंपियनशिप में तीन सिल्वर
जूनियर नेशनल चैंपियनशिप 2013 में सिल्वर मेडल
सीनियर नेशनल चैंपियनशिप 2018 में सिल्वर मेडल
ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल