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कलयुग में भागवत कथा साक्षात श्रीहरि का स्वरूप
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पानीपत। कथा सुनाते हुए पंड़ित राधे-राधे महाराज।
- फोटो : Panipat
जगन्नाथ मंदिर के प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा वाचक पंडित राधे-राधे महाराज ने कहा कि कलयुग में भागवत कथा साक्षात श्रीहरि का स्वरूप है। इसे सुनने के लिए देवी देवता भी तरसते हैं परंतु मानव प्राणी को यह कथा सहज ही प्राप्त हो जाती है।
जगन्नाथ मंदिर अग्रवाल वैश्य पंचायत एवं महिला संकीर्तन मंडल के तत्वाधान में चल रही कथामें पंडित राधे-राधे महाराज ने कहा कि मानव जीवन तभी धन्य होता है जब वह कथा स्मरण का लाभ प्राप्त कर लेता है। सत्संग एवं कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है वरना वह इस संसार में आकर मोह माया के चक्कर में पड़कर अपना मानव जीवन जो अश्वमेध यज्ञ के समान होता है उसको व्यर्थ में ही निकाल देता है।
उन्होंने कहा कि भागवत कथा भगवान का सचित्र रूप है। यदि भगवान का आप साक्षात दर्शन करना चाहते हैं तो सबसे सरल सहज सुगम रास्ता केवल सत्संग एवं भागवत कथा है। दिव्य उपदेशों की चर्चा करने मात्र से ही पुण्य बढ़ता है। भक्ति के साधन से ही मुक्ति संभव है। सत्य सर्वत्र एवं व्यापक होता है। सत्य चाहे किसी भी प्रकार का हो, वह आचरण में दिखी जाता है।
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जगन्नाथ मंदिर अग्रवाल वैश्य पंचायत एवं महिला संकीर्तन मंडल के तत्वाधान में चल रही कथामें पंडित राधे-राधे महाराज ने कहा कि मानव जीवन तभी धन्य होता है जब वह कथा स्मरण का लाभ प्राप्त कर लेता है। सत्संग एवं कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है वरना वह इस संसार में आकर मोह माया के चक्कर में पड़कर अपना मानव जीवन जो अश्वमेध यज्ञ के समान होता है उसको व्यर्थ में ही निकाल देता है।
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उन्होंने कहा कि भागवत कथा भगवान का सचित्र रूप है। यदि भगवान का आप साक्षात दर्शन करना चाहते हैं तो सबसे सरल सहज सुगम रास्ता केवल सत्संग एवं भागवत कथा है। दिव्य उपदेशों की चर्चा करने मात्र से ही पुण्य बढ़ता है। भक्ति के साधन से ही मुक्ति संभव है। सत्य सर्वत्र एवं व्यापक होता है। सत्य चाहे किसी भी प्रकार का हो, वह आचरण में दिखी जाता है।

पानीपत। कथा सुनती हुई महिला श्रद्धालु।- फोटो : Panipat
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