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Panipat News: महामंडल विधान में मांगलिक क्रिया कराई
Sun, 28 Sep 2025 04:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sun, 28 Sep 2025 04:39 AM IST
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प्राचीन जिनालय में श्री 1008 भगवान नेमिनाथ महामंडल विधान में सौधर्म इंद्र और अन्य का स्वागत को
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। श्री दिगंबर जैन मंदिर बड़ा मंदिर जैन मोहल्ला में प्राचीन जिनालय में तीन दिवसीय महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को श्री 1008 भगवान नेमिनाथ महामंडल विधान का आयोजन किया। दमोह से प्रतिष्ठाचार्य अभिषेक जैन शास्त्री ने सर्वप्रथम विधान की मांगलिक क्रिया कराई।
महोत्सव का शुभारंभ श्रीजी का अभिषेक व शांति धारा के साथ किया। महोत्सव में सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य सुनील कुमार जैन व ममता जैन, धनपति कुबेर बनने का सौभाग्य जितेंद्र जैन व स्वीटी जैन और यज्ञ नायक बनने का सौभाग्य श्रीपाल जैन व बीना जैन को मिला। मंदिर में विराजमान 1000 वर्ष से भी प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपि का प्रथम बार अभिषेक किया। जिसमें प्रथम कलश करने का सौभाग्य सारिका बंसल व संजय बंसल को प्राप्त हुआ। सर्वप्रथम जिनेंद्र भगवान का महामस्तका अभिषेक व शांति धारा संपन्न कराई।
इसके उपरांत नेमिनाथ महामंडल विधान में जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान की पूजा अर्चना की और उनके वैराग्य के मार्मिक कथा को संगीत की स्वर लहरियों के साथ प्रस्तुत किया। नवनिर्मित कुएं का निर्माण सुरेश जैन, कुमार जैन व श्रीपाल जैन ने कराया है। उनका कार्यक्रम में विशेष रूप से अभिनंदन किया। जैन धर्म में प्रभु का अभिषेक कुएं के जल से ही उत्तम माना गया है, वहीं साधु की चर्या में कुएं के ही जल का इस्तेमाल होता है। रविवार को सहस्त्रफनी श्री 1008 पारसनाथ भगवान का 108 कलश से महामस्तकाभिषेक किया जाएगा। विशेष रूप से कल्याण मंदिर विधान का आयोजन होगा और हवन किया जाएगा।
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पानीपत। श्री दिगंबर जैन मंदिर बड़ा मंदिर जैन मोहल्ला में प्राचीन जिनालय में तीन दिवसीय महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को श्री 1008 भगवान नेमिनाथ महामंडल विधान का आयोजन किया। दमोह से प्रतिष्ठाचार्य अभिषेक जैन शास्त्री ने सर्वप्रथम विधान की मांगलिक क्रिया कराई।
महोत्सव का शुभारंभ श्रीजी का अभिषेक व शांति धारा के साथ किया। महोत्सव में सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य सुनील कुमार जैन व ममता जैन, धनपति कुबेर बनने का सौभाग्य जितेंद्र जैन व स्वीटी जैन और यज्ञ नायक बनने का सौभाग्य श्रीपाल जैन व बीना जैन को मिला। मंदिर में विराजमान 1000 वर्ष से भी प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपि का प्रथम बार अभिषेक किया। जिसमें प्रथम कलश करने का सौभाग्य सारिका बंसल व संजय बंसल को प्राप्त हुआ। सर्वप्रथम जिनेंद्र भगवान का महामस्तका अभिषेक व शांति धारा संपन्न कराई।
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इसके उपरांत नेमिनाथ महामंडल विधान में जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान की पूजा अर्चना की और उनके वैराग्य के मार्मिक कथा को संगीत की स्वर लहरियों के साथ प्रस्तुत किया। नवनिर्मित कुएं का निर्माण सुरेश जैन, कुमार जैन व श्रीपाल जैन ने कराया है। उनका कार्यक्रम में विशेष रूप से अभिनंदन किया। जैन धर्म में प्रभु का अभिषेक कुएं के जल से ही उत्तम माना गया है, वहीं साधु की चर्या में कुएं के ही जल का इस्तेमाल होता है। रविवार को सहस्त्रफनी श्री 1008 पारसनाथ भगवान का 108 कलश से महामस्तकाभिषेक किया जाएगा। विशेष रूप से कल्याण मंदिर विधान का आयोजन होगा और हवन किया जाएगा।
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