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Panipat News: ड्रेन नंबर-1 से कब्जे हटाने में नगर निगम की कार्रवाई पर कोर्ट की रोक
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ड्रेन किनारे कब्जे हटाती जेसीबी। आर्काइव
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। ड्रेन नंबर-1 के सुंदरीकरण और चौड़ीकरण के लिए नगर निगम की ओर से की जा रही तोड़फोड़ कार्रवाई पर अदालत ने ब्रेक लगा दिया है। अतिक्रमण और अवैध निर्माण के नाम पर जारी ध्वस्तीकरण नोटिसों के खिलाफ अलग-अलग दीवानी अदालतों ने अंतरिम रोक लगाई है। उधर, एग्रो मॉल में जनसुनवाई के दौरान 17 आपत्तियां आईं हैं।
नगर निगम ड्रेन नंबर-1 के साथ करीब पांच किलोमीटर का मिनी बाईपास बनाने की योजना पर काम कर रहा है। निगम ने इसके आसपास 237 कब्जे चिह्नित किए हैं और रक्षाबंधन से पहले 85 कब्जे हटाए जा चुके हैं। इसके बाद कार्रवाई के दायरे में आए सेक्टर-12 के करीब 20 लोगों, स्कूल, अस्पताल और धार्मिक संस्थाओं ने अदालत का रुख किया।
अदालतों ने प्रभावित पक्षों की मौजूदगी के बिना निशानदेही कराने और उचित सुनवाई का अवसर दिए बिना नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
स्कूल, अस्पताल और फ्लैट्स को मिली राहत : नीलकंठ एजुकेशनल सोसाइटी की 814 वर्ग गज जमीन पर अतिक्रमण का दावा करते हुए स्कूल भवन गिराने का नोटिस दिया गया था। सिविल जज अखिल गर्ग की अदालत ने पाया कि निशानदेही के दौरान संस्था को नोटिस नहीं दिया गया था। कोर्ट ने फिलहाल तोड़फोड़ पर रोक लगा दी।
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पवनांजलि अस्पताल को खसरा नंबर 80 में करीब 225 वर्ग गज अतिक्रमण का नोटिस मिला था। सिविल जज आदित्य जैन की अदालत ने पाया कि अस्पताल वर्ष 2003 के स्वीकृत नक्शे के आधार पर संचालित है। अस्पताल की सेवाओं को देखते हुए निगम के नोटिस पर रोक लगा दी गई। वर्ल्ड रिन्यूअल स्पिरिचुअल ट्रस्ट के धार्मिक स्थल को भी नोटिस दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय से स्थापित निर्माण को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई के नहीं हटाया जा सकता।
हुडा सेक्टर 11-12 के फ्लैट नंबर 2533-सी (सेकंड फ्लोर) को भी ड्रेन के अतिक्रमण में बताते हुए कार्रवाई की तैयारी थी। जज अखिल गर्ग ने अंतरिम रोक लगाकर कार्रवाई रोक दी। इसी तरह दिव्या व अन्य मामलों में भी अदालतों ने पुराने स्वीकृत नक्शों के आधार पर मकान गिराने पर रोक लगाते हुए निगम से विस्तृत निशानदेही रिपोर्ट मांगी है।
उधर, एग्रो मॉल स्थित निगम कार्यालय में वीरवार और शुक्रवार को दावे और आपत्तियां सुनने के लिए दरबार लगाया गया। संयुक्त आयुक्त मनी त्यागी की देखरेख में गठित कमेटी ने लोगों की समस्याएं सुनीं। दो दिनों में 17 दावे और आपत्तियां दर्ज की गईं। कार्रवाई के विरोध में सैनी कॉलोनी और राजीव कॉलोनी के लोग धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि वे दशकों से यहां रह रहे हैं और उनके पास वैध दस्तावेज हैं।
पैमाइश और प्रक्रिया पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान अदालतों ने पाया कि निगम यह स्पष्ट नहीं कर सका कि राजस्व विभाग की निशानदेही संबंधित संपत्ति मालिकों की मौजूदगी में हुई थी। कई मामलों में प्रभावित लोगों के पास निगम या एचएसवीपी के स्वीकृत नक्शे भी हैं। अदालतों ने निगम और अन्य प्रतिवादियों से जवाब मांगा है।
एक तरफ अफगान व मॉडल टाउन के रिहायशी मकान प्लॉट नंबर 879 (तरफ अफगान) में 64 वर्ग गज निर्माण हटाने के नोटिस पर सिविल जज विकास वर्मा ने यथास्थिति (स्टेटस को) बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं जतिंदर नाथ, मनोज गिरि और शशि रावल के मामलों में भी अदालतों ने पुराने स्वीकृत नक्शों के आधार पर मकान ढहाने पर रोक लगाते हुए निगम से विस्तृत निशानदेही रिपोर्ट तलब की है।
नगर निगम कोर्ट के सभी आदेशों का पालन करेगा। अन्य क्षेत्रों में प्राप्त दावों और आपत्तियों पर निष्पक्ष सुनवाई की जा रही है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद चिह्नित कब्जों को हटाने के लिए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. पंकज, आयुक्त, नगर निगम
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पानीपत। ड्रेन नंबर-1 के सुंदरीकरण और चौड़ीकरण के लिए नगर निगम की ओर से की जा रही तोड़फोड़ कार्रवाई पर अदालत ने ब्रेक लगा दिया है। अतिक्रमण और अवैध निर्माण के नाम पर जारी ध्वस्तीकरण नोटिसों के खिलाफ अलग-अलग दीवानी अदालतों ने अंतरिम रोक लगाई है। उधर, एग्रो मॉल में जनसुनवाई के दौरान 17 आपत्तियां आईं हैं।
नगर निगम ड्रेन नंबर-1 के साथ करीब पांच किलोमीटर का मिनी बाईपास बनाने की योजना पर काम कर रहा है। निगम ने इसके आसपास 237 कब्जे चिह्नित किए हैं और रक्षाबंधन से पहले 85 कब्जे हटाए जा चुके हैं। इसके बाद कार्रवाई के दायरे में आए सेक्टर-12 के करीब 20 लोगों, स्कूल, अस्पताल और धार्मिक संस्थाओं ने अदालत का रुख किया।
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अदालतों ने प्रभावित पक्षों की मौजूदगी के बिना निशानदेही कराने और उचित सुनवाई का अवसर दिए बिना नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
स्कूल, अस्पताल और फ्लैट्स को मिली राहत : नीलकंठ एजुकेशनल सोसाइटी की 814 वर्ग गज जमीन पर अतिक्रमण का दावा करते हुए स्कूल भवन गिराने का नोटिस दिया गया था। सिविल जज अखिल गर्ग की अदालत ने पाया कि निशानदेही के दौरान संस्था को नोटिस नहीं दिया गया था। कोर्ट ने फिलहाल तोड़फोड़ पर रोक लगा दी।
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पवनांजलि अस्पताल को खसरा नंबर 80 में करीब 225 वर्ग गज अतिक्रमण का नोटिस मिला था। सिविल जज आदित्य जैन की अदालत ने पाया कि अस्पताल वर्ष 2003 के स्वीकृत नक्शे के आधार पर संचालित है। अस्पताल की सेवाओं को देखते हुए निगम के नोटिस पर रोक लगा दी गई। वर्ल्ड रिन्यूअल स्पिरिचुअल ट्रस्ट के धार्मिक स्थल को भी नोटिस दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय से स्थापित निर्माण को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई के नहीं हटाया जा सकता।
हुडा सेक्टर 11-12 के फ्लैट नंबर 2533-सी (सेकंड फ्लोर) को भी ड्रेन के अतिक्रमण में बताते हुए कार्रवाई की तैयारी थी। जज अखिल गर्ग ने अंतरिम रोक लगाकर कार्रवाई रोक दी। इसी तरह दिव्या व अन्य मामलों में भी अदालतों ने पुराने स्वीकृत नक्शों के आधार पर मकान गिराने पर रोक लगाते हुए निगम से विस्तृत निशानदेही रिपोर्ट मांगी है।
उधर, एग्रो मॉल स्थित निगम कार्यालय में वीरवार और शुक्रवार को दावे और आपत्तियां सुनने के लिए दरबार लगाया गया। संयुक्त आयुक्त मनी त्यागी की देखरेख में गठित कमेटी ने लोगों की समस्याएं सुनीं। दो दिनों में 17 दावे और आपत्तियां दर्ज की गईं। कार्रवाई के विरोध में सैनी कॉलोनी और राजीव कॉलोनी के लोग धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि वे दशकों से यहां रह रहे हैं और उनके पास वैध दस्तावेज हैं।
पैमाइश और प्रक्रिया पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान अदालतों ने पाया कि निगम यह स्पष्ट नहीं कर सका कि राजस्व विभाग की निशानदेही संबंधित संपत्ति मालिकों की मौजूदगी में हुई थी। कई मामलों में प्रभावित लोगों के पास निगम या एचएसवीपी के स्वीकृत नक्शे भी हैं। अदालतों ने निगम और अन्य प्रतिवादियों से जवाब मांगा है।
एक तरफ अफगान व मॉडल टाउन के रिहायशी मकान प्लॉट नंबर 879 (तरफ अफगान) में 64 वर्ग गज निर्माण हटाने के नोटिस पर सिविल जज विकास वर्मा ने यथास्थिति (स्टेटस को) बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं जतिंदर नाथ, मनोज गिरि और शशि रावल के मामलों में भी अदालतों ने पुराने स्वीकृत नक्शों के आधार पर मकान ढहाने पर रोक लगाते हुए निगम से विस्तृत निशानदेही रिपोर्ट तलब की है।
नगर निगम कोर्ट के सभी आदेशों का पालन करेगा। अन्य क्षेत्रों में प्राप्त दावों और आपत्तियों पर निष्पक्ष सुनवाई की जा रही है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद चिह्नित कब्जों को हटाने के लिए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. पंकज, आयुक्त, नगर निगम