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Panipat News: एम्स की टीमें पानीपत पहुंची, गर्भवतियों की होगी जांच

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 21 Sep 2024 08:34 AM IST
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AIIMS teams reached Panipat, pregnant women will be examined
पानीपत/समालखा। पानीपत में शुक्रवार सुबह ही एम्स के डॉक्टरों की टीम पहुंच गई। टीम यहां गर्भवतियों की जांच के साथ ही बीमारियों का अध्ययन भी करेगी। टीम ने पहले जिला नागरिक अस्पताल में सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा व उप सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग के साथ बैठक की। इसके बाद वह समालखा अस्पताल में पहुंचे। यहां से एम्स की टीम ने सिविल सर्जन व आशा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की।
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बैठक में आशा कार्यकर्ताओं को गर्भवतियों की देखभाल का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद मात्रे कार्यक्रम का आगाज किया गया। एम्स की टीम अब पानीपत में स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर अपनी स्वास्थ्य सेवाएं देंगी। एम्स की टीमें पानीपत की गर्भवतियों में मिलने वाली बीमारी पर अध्ययन के साथ साथ उनका इलाज भी करेगी। पहले समालखा सामान्य अस्पताल में नियमित शिविर लगाए जाएंगे। इसके बाद टीमें फील्ड में शिविर लगाएंगी। स्वास्थ्य विभाग ने एम्स की मात्रे संस्था से इसके लिए एमओयू साइन किया है। जिले की हर गर्भवती को ट्रेस किया जाएगा। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के अंतर्गत आने वाली गर्भवतियों की जांच होगी। उनका तुरंत इलाज शुरू किया जाएगा। सभी गर्भवतियों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन किया जाएगा। जिले में जच्चा बच्चा मृत्यु दर कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अपना यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है।
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उन्होंने बताया कि पानीपत में 60 प्रतिशत गर्भवतियों में खून की कमी है। 10 प्रतिशत गर्भवतियां हाई रिस्क डिलीवरी के दायरे में रहती हैं। 10 में एक महिला की प्री मैच्योर डिलीवरी होती है। 20 प्रतिशत से अधिक गर्भवतियों में बीपी की दिक्कत है। गर्भवतियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्वास्थ्य विभाग पिछले साढ़े छह साल से हर माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत विशेष जांच शिविर लगाता है। शिविर में गर्भवतियों की जांच के साथ साथ बेहतर परामर्श दिए जाते हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग का यह प्रयास अब तक कारगर साबित नहीं हुआ है। पिछले दो साल में 20 से अधिक गर्भवतियों की डिलीवरी के दौरान मौत हो चुकी हैं। नवजातों का यह आंकड़ा प्रसूताओं से अधिक है। पिछले साढ़े आठ माह में 950 गर्भवतियां हाई रिस्क डिलीवरी के दायरे में मिली हैं। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है।
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वर्जन-

सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि शुक्रवार को पानीपत में मात्रे कार्यक्रम शुरू हो चुका है। हर गर्भवती को ट्रेस कर उसकी जांच होगी। अध्ययन भी किया जाएगा। उनका उद्देश्य जच्चा बच्चा मृत्युदर में कमी लाना है। इसके अनुसार काम चल रहा है।
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