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Panipat News: नगर निगम चुनाव में आरक्षण प्रणाली में लगाया भेदभाव का आरोप
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पानीपत। नगर निगम चुनाव को आरक्षण में छेड़छाड़ की चर्चा के बीच समाज के लाेगों ने सामने आकर विरोध शुरू कर दिया है। एससी समाज के लाेगों ने इसको उनके आरक्षण के अधिकार पर चोट बताया है। एससी वर्ग के आरक्षण में छेड़छाड़ का मामला सबसे पहले अमर उजाला ने 19 दिसंबर के अंक में ब्रेक किया था।
कांग्रेस एससी प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रवक्ता बलजीत सारसर ने सामने आकर नगर निगम के चुनाव को लेकर वार्डबंदी में आरक्षण प्रणाली में भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा एससी समाज को वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार नगर निगम चुनावों में आरक्षण निर्धारित किया गया है, जबकि बैकवर्ड समाज को वर्ष 2023 के परिवार पहचान पत्र के आधार पर आरक्षण दिया गया है। जो सरासर नाइंसाफी है। सरकार के इस दोहरे मापदंड के चलते एससी समाज को अधिकारों से विमुक्त किया जा रहा है। समाज इसकी कड़ी शब्दों में निंदा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा हमेशा आरक्षण के खिलाफ रही है। यह नगर निगम चुनाव के लिए ड्रा में साफ हो गया है। उन्होंने वार्डबंदी निर्धारण के पैरामीटर को एक समान रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार एससी कोटे के आरक्षण को वर्ष 2023 के परिवार पहचान पत्र के डेटा अनुसार बैकवर्ड समाज की तर्ज पर किया जाएं। ऐसा नहीं किया जाता है तो एससी समाज इसके विरोध में संघर्ष करेगा। वे जरूरत पड़ने पर वार्डबंदी में कोटा निर्धारण को हाई कोर्ट में चुनौती देगा।
नगर निगम की वार्डबंदी में एससी समाज का आरक्षण कम करने का मुद्दा अमर उजाला ने सबसे पहले 19 दिसंबर को ब्रेक किया था। जिसमें पानीपत समेत प्रदेश की नगर निगमों में कोटा घटाने की बात स्पष्ट की थी। पानीपत में इस बार एससी के वार्डों का कोर्ट पांच से घटाकर तीन किया जा रहा है। यानी यहां दो वार्ड एससी समाज के कम किए जा रहे हैं। जबकि बीसी समाज के वार्डों की संख्या बढ़ाई जा रही है।
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अनुसूचित समाज का कोटा कम करने की निंदा : पानीपत । डॉ. बीआर आंबेडकर सेवा समिति पानीपत ने नगर निगम की नई वार्डबंदी में अनुसूचित समाज का कोटा कम करने की कड़ी निंदा की है और सरकार से उनको अपना अधिकार देने की मांग की है। समिति ने इसको लेकर रविवार को असंध रोड स्थित कार्यालय में बैठक की। जिसकी अध्यक्षता प्रधान सूरजभान भौरिया ने की। उन्होंने कहा कि नगर निगम चुनाव को लेकर नई वार्डबंदी में आरक्षण प्रणाली में भेदभाव की नीति बनाई जा रही है।
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कांग्रेस एससी प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रवक्ता बलजीत सारसर ने सामने आकर नगर निगम के चुनाव को लेकर वार्डबंदी में आरक्षण प्रणाली में भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा एससी समाज को वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार नगर निगम चुनावों में आरक्षण निर्धारित किया गया है, जबकि बैकवर्ड समाज को वर्ष 2023 के परिवार पहचान पत्र के आधार पर आरक्षण दिया गया है। जो सरासर नाइंसाफी है। सरकार के इस दोहरे मापदंड के चलते एससी समाज को अधिकारों से विमुक्त किया जा रहा है। समाज इसकी कड़ी शब्दों में निंदा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा हमेशा आरक्षण के खिलाफ रही है। यह नगर निगम चुनाव के लिए ड्रा में साफ हो गया है। उन्होंने वार्डबंदी निर्धारण के पैरामीटर को एक समान रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार एससी कोटे के आरक्षण को वर्ष 2023 के परिवार पहचान पत्र के डेटा अनुसार बैकवर्ड समाज की तर्ज पर किया जाएं। ऐसा नहीं किया जाता है तो एससी समाज इसके विरोध में संघर्ष करेगा। वे जरूरत पड़ने पर वार्डबंदी में कोटा निर्धारण को हाई कोर्ट में चुनौती देगा।
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नगर निगम की वार्डबंदी में एससी समाज का आरक्षण कम करने का मुद्दा अमर उजाला ने सबसे पहले 19 दिसंबर को ब्रेक किया था। जिसमें पानीपत समेत प्रदेश की नगर निगमों में कोटा घटाने की बात स्पष्ट की थी। पानीपत में इस बार एससी के वार्डों का कोर्ट पांच से घटाकर तीन किया जा रहा है। यानी यहां दो वार्ड एससी समाज के कम किए जा रहे हैं। जबकि बीसी समाज के वार्डों की संख्या बढ़ाई जा रही है।
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अनुसूचित समाज का कोटा कम करने की निंदा : पानीपत । डॉ. बीआर आंबेडकर सेवा समिति पानीपत ने नगर निगम की नई वार्डबंदी में अनुसूचित समाज का कोटा कम करने की कड़ी निंदा की है और सरकार से उनको अपना अधिकार देने की मांग की है। समिति ने इसको लेकर रविवार को असंध रोड स्थित कार्यालय में बैठक की। जिसकी अध्यक्षता प्रधान सूरजभान भौरिया ने की। उन्होंने कहा कि नगर निगम चुनाव को लेकर नई वार्डबंदी में आरक्षण प्रणाली में भेदभाव की नीति बनाई जा रही है।