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महिला श्रमिक से रात को फैक्टरी में काम कराने के लिए लेनी होगी विभाग से परमिशन, फैक्टरी में महिलाओं की शिकायत के लिए होनी चाहिए अलग विंग
Updated Wed, 18 Apr 2018 12:37 AM IST
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महिला श्रमिक से रात को फैक्टरी में काम कराने के लिए लेनी होगी विभाग से परमिशन, फैक्टरी में महिलाओं की शिकायत के लिए होनी चाहिए अलग विंग
-श्रम विभाग ने महिला श्रमिकों की सुरक्षा के लिए बनाए नए नियम
-जिले में एक लाख 10 हजार महिला श्रमिकों को होगा फायदा
फोटो 3 व 4
संदीप भौरिया
पानीपत। महिला श्रमिकों के साथ फैक्ट्ररियों व उद्योगों में हो रही यौन शोषण की वारदात सामने आने के बाद श्रम विभाग ने महिला श्रमिक संबंधी नियमों में श्रम विभाग ने फेरबदल किए हैं। अब फैक्ट्री संचालकों को रात की शिफ्ट में काम करवाने के लिए विभाग से मंजूरी लेनी होगी। श्रम विभाग ने रात 7 बजे से सुबह 6 बजे के दौरान फैक्ट्रियों आदि में महिला श्रमिकों को नियोजित करने की अनुमति देने के तहत दिशा निर्देश जारी किए हैं। कारखाना अधिनियम, 1948 के तहत पंजीकृत कोई भी फैक्ट्री इस छूट के लिए आवेदन कर सकती है। रात की शिफ्ट में महिला श्रमिकों को नियुक्त करने के लिए उनकी रक्षा और सुरक्षा के संबंध में कुछ शर्तों को भी निर्धारित किया गया है, जिससे महिला श्रमिकों के हितों की रक्षा की जा सके। जिले की करीब 1.10 लाख महिला श्रमिकों को फायदा मिलेगा। ये नियम लागू होने के बाद महिला श्रमिकों को सुरक्षा मिलेगी। जिन फैक्ट्ररियों में इन नियमों की अनदेखी होगी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
जिले में यह है श्रमिकों की स्थिति :
श्रम विभाग के अनुसार जिले की फैक्ट्रियों में 2.5 लाख से ज्यादा मजदूर काम करते हैं। इनमें से 1.10 लाख मजदूर महिलाएं हैं। श्रम विभाग के पास 30 हजार इएसआई कार्ड है, इनमें से भी 12 हजार महिलाओं के हैं। ये सभी वो महिलाएं हैं जो गरीबी से संघर्ष करने के लिए कोई अपने पति का हाथ बंटाने के लिए सुबह से शाम तक फैक्ट्री में रुई की धूल और केमिकलों के अंदर काम करती हैं तो किसी का पति नहीं है इसलिए बच्चों को पालने के लिए फैक्ट्रियों में काम करने को मजबूर हैं।
फैक्ट्ररियों इन नियमों की करनी होगी पालना:
- फैक्ट्री संचालक या उत्तरदायी व्यक्तियों का यह कर्तव्य होगा कि वे कार्य स्थल या संस्थान में यौन उत्पीड़न घटना होने से रोकें। ऐसी घटना घटित होने पर उनका विवरण और अभियोजक कार्रवाई करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने की व्यवस्था करें।
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- फैक्ट्रियों में यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए कदम उठाने होंगे, जिनमें किसी भी प्रकार के यौन उत्पीड़न, जिसमें अवांछनीय यौन संबंधी व्यवहार चाहे प्रत्यक्ष या व्यवस्थित तौर पर सम्मिलित हो, जैसा कि शारीरिक संपर्क और निकटता, यौन स्वीकृति के लिए मांग या अनुरोध, कामासक्त फब्तियां, अश्लील साहित्य दिखाना और यौन प्रकृति का कोई अवांछनीय शारीरिक, मौखिक या अमौखिक आचरण को निषेध किया जाए।
- फैक्ट्री में उपयुक्त कार्य दशा जिसमें कार्य करने, अवकाश के समय, स्वास्थ्य और स्वच्छता का वातावरण उपलब्ध हो, जिससे यह सुनिश्चित हो सकें कि कार्य स्थल पर महिलाओं के लिए प्रदूषित वातावरण नहीं है और किसी महिला कर्मचारी के विश्वास के लिए यह पर्याप्त आधार हो कि उनके नियोजन से संबंधित कोई अलाभकारी स्थिति है।
- फैक्ट्री में शिकायत की सुनवाई के लिए व्यवस्था प्रणाली संधारित करेंगे, ऐसी प्रणाली में समयबद्ध तरीके से शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था करेंगे।
- महिला कर्मचारी को उसके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाया जाए। यह भी ध्यान रखें कि महिला श्रमिक 10 से कम संख्या के बैच में ना नियोजित की जाएं और रात की शिफ्ट में महिला श्रमिकों की संख्या, कुल संख्या के दो तिहाई से कम ना हों।
- रात की शिफ्ट के दौरान प्रवेश और निकलने के द्वार पर महिला सुरक्षा की व्यवस्था हो।
- महिला श्रमिकों के लिए अलग कैंटीन की सुविधा उपलब्ध हो। महिला श्रमिकों को रात की शिफ्ट के लिए उनके घर से आने जाने के लिए सुरक्षा गार्डस युक्त (महिला सुरक्षा गार्ड सहित) परिवहन सुविधा प्रदान करेगा और प्रत्येक परिवहन वाहन में सीसीटीवी कैमरा भी लगा हो।
- सुविधाओं के अतिरिक्त महिला श्रमिकों को माहवारी की अवधि में एक अतिरिक्त अवकाश की सुविधा भी दी जाए, जो कि रात शिफ्ट के लिए संवैधानिक अवकाश के बराबर हो। चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और जरूरत के समय आवश्यक दूरभाष सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
- जिस शिफ्ट में 100 से अधिक महिला श्रमिक कार्यरत हैं, उसमें अलग से एक वाहन रखा जाए जिससे चोट लगने या अन्य स्थिति में तत्काल उन्हें चिकित्सालय पहुंचाया जा सके।
- महिला श्रमिकों के लिए भोजन और आवास की व्यवस्था प्रदान हो, वह केवल महिला के लिए हो और यह व्यवस्था महिला वार्डन या सुपरवाइजर के नियंत्रण में हो।
- रात की शिफ्ट में सुपरवाइजर या शिफ्ट इंचार्ज या फोरमैन या अन्य सुपरवाइजरी स्टाफ में महिलाओं की संख्या एक तिहाई से कम नहीं होनी चाहिए। महिला श्रमिकों को दिन की शिफ्ट से रात की शिफ्ट में बदले जाने की अवस्था में अंतिम से अगली शिफ्ट के मध्य कम से कम 12 घंटे का निरंतर विश्राम या अंतर हो।
-कम से कम दो महिला वार्डन की नियुक्ति हो जो कि कार्य के दौरान भ्रमण करने और विशेष कल्याण सहायक के रूप में कार्य करेंगी।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए सभी उद्योगपतियों व कारखानों के मालिकों को निर्देश दे दिए गए हैं: डीसी
महिलाओं की सुरक्षा के लिए श्रम विभाग के कानूनों में कुछ बदलाव हुआ है। अब फैक्टरी मालिक अपनी मर्जी से महिला श्रमिकों से मनमर्जी से काम नहीं करा सकेंगे। पहले उन्हें महिला श्रमिकों की सुरक्षा की गारंटी लेनी होगी। फैक्टरी में महिलाओं की सुरक्षा के नियम बनाए गए हैं। अगर कोई फैक्टरी संचालक नियमों की अवहेलना करता पाया गया तो कड़ी कार्रवाई होगी।
सुमेधा कटारिया, डीसी पानीपत।
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-श्रम विभाग ने महिला श्रमिकों की सुरक्षा के लिए बनाए नए नियम
-जिले में एक लाख 10 हजार महिला श्रमिकों को होगा फायदा
फोटो 3 व 4
संदीप भौरिया
पानीपत। महिला श्रमिकों के साथ फैक्ट्ररियों व उद्योगों में हो रही यौन शोषण की वारदात सामने आने के बाद श्रम विभाग ने महिला श्रमिक संबंधी नियमों में श्रम विभाग ने फेरबदल किए हैं। अब फैक्ट्री संचालकों को रात की शिफ्ट में काम करवाने के लिए विभाग से मंजूरी लेनी होगी। श्रम विभाग ने रात 7 बजे से सुबह 6 बजे के दौरान फैक्ट्रियों आदि में महिला श्रमिकों को नियोजित करने की अनुमति देने के तहत दिशा निर्देश जारी किए हैं। कारखाना अधिनियम, 1948 के तहत पंजीकृत कोई भी फैक्ट्री इस छूट के लिए आवेदन कर सकती है। रात की शिफ्ट में महिला श्रमिकों को नियुक्त करने के लिए उनकी रक्षा और सुरक्षा के संबंध में कुछ शर्तों को भी निर्धारित किया गया है, जिससे महिला श्रमिकों के हितों की रक्षा की जा सके। जिले की करीब 1.10 लाख महिला श्रमिकों को फायदा मिलेगा। ये नियम लागू होने के बाद महिला श्रमिकों को सुरक्षा मिलेगी। जिन फैक्ट्ररियों में इन नियमों की अनदेखी होगी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
जिले में यह है श्रमिकों की स्थिति :
श्रम विभाग के अनुसार जिले की फैक्ट्रियों में 2.5 लाख से ज्यादा मजदूर काम करते हैं। इनमें से 1.10 लाख मजदूर महिलाएं हैं। श्रम विभाग के पास 30 हजार इएसआई कार्ड है, इनमें से भी 12 हजार महिलाओं के हैं। ये सभी वो महिलाएं हैं जो गरीबी से संघर्ष करने के लिए कोई अपने पति का हाथ बंटाने के लिए सुबह से शाम तक फैक्ट्री में रुई की धूल और केमिकलों के अंदर काम करती हैं तो किसी का पति नहीं है इसलिए बच्चों को पालने के लिए फैक्ट्रियों में काम करने को मजबूर हैं।
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फैक्ट्ररियों इन नियमों की करनी होगी पालना:
- फैक्ट्री संचालक या उत्तरदायी व्यक्तियों का यह कर्तव्य होगा कि वे कार्य स्थल या संस्थान में यौन उत्पीड़न घटना होने से रोकें। ऐसी घटना घटित होने पर उनका विवरण और अभियोजक कार्रवाई करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने की व्यवस्था करें।
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- फैक्ट्रियों में यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए कदम उठाने होंगे, जिनमें किसी भी प्रकार के यौन उत्पीड़न, जिसमें अवांछनीय यौन संबंधी व्यवहार चाहे प्रत्यक्ष या व्यवस्थित तौर पर सम्मिलित हो, जैसा कि शारीरिक संपर्क और निकटता, यौन स्वीकृति के लिए मांग या अनुरोध, कामासक्त फब्तियां, अश्लील साहित्य दिखाना और यौन प्रकृति का कोई अवांछनीय शारीरिक, मौखिक या अमौखिक आचरण को निषेध किया जाए।
- फैक्ट्री में उपयुक्त कार्य दशा जिसमें कार्य करने, अवकाश के समय, स्वास्थ्य और स्वच्छता का वातावरण उपलब्ध हो, जिससे यह सुनिश्चित हो सकें कि कार्य स्थल पर महिलाओं के लिए प्रदूषित वातावरण नहीं है और किसी महिला कर्मचारी के विश्वास के लिए यह पर्याप्त आधार हो कि उनके नियोजन से संबंधित कोई अलाभकारी स्थिति है।
- फैक्ट्री में शिकायत की सुनवाई के लिए व्यवस्था प्रणाली संधारित करेंगे, ऐसी प्रणाली में समयबद्ध तरीके से शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था करेंगे।
- महिला कर्मचारी को उसके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाया जाए। यह भी ध्यान रखें कि महिला श्रमिक 10 से कम संख्या के बैच में ना नियोजित की जाएं और रात की शिफ्ट में महिला श्रमिकों की संख्या, कुल संख्या के दो तिहाई से कम ना हों।
- रात की शिफ्ट के दौरान प्रवेश और निकलने के द्वार पर महिला सुरक्षा की व्यवस्था हो।
- महिला श्रमिकों के लिए अलग कैंटीन की सुविधा उपलब्ध हो। महिला श्रमिकों को रात की शिफ्ट के लिए उनके घर से आने जाने के लिए सुरक्षा गार्डस युक्त (महिला सुरक्षा गार्ड सहित) परिवहन सुविधा प्रदान करेगा और प्रत्येक परिवहन वाहन में सीसीटीवी कैमरा भी लगा हो।
- सुविधाओं के अतिरिक्त महिला श्रमिकों को माहवारी की अवधि में एक अतिरिक्त अवकाश की सुविधा भी दी जाए, जो कि रात शिफ्ट के लिए संवैधानिक अवकाश के बराबर हो। चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और जरूरत के समय आवश्यक दूरभाष सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
- जिस शिफ्ट में 100 से अधिक महिला श्रमिक कार्यरत हैं, उसमें अलग से एक वाहन रखा जाए जिससे चोट लगने या अन्य स्थिति में तत्काल उन्हें चिकित्सालय पहुंचाया जा सके।
- महिला श्रमिकों के लिए भोजन और आवास की व्यवस्था प्रदान हो, वह केवल महिला के लिए हो और यह व्यवस्था महिला वार्डन या सुपरवाइजर के नियंत्रण में हो।
- रात की शिफ्ट में सुपरवाइजर या शिफ्ट इंचार्ज या फोरमैन या अन्य सुपरवाइजरी स्टाफ में महिलाओं की संख्या एक तिहाई से कम नहीं होनी चाहिए। महिला श्रमिकों को दिन की शिफ्ट से रात की शिफ्ट में बदले जाने की अवस्था में अंतिम से अगली शिफ्ट के मध्य कम से कम 12 घंटे का निरंतर विश्राम या अंतर हो।
-कम से कम दो महिला वार्डन की नियुक्ति हो जो कि कार्य के दौरान भ्रमण करने और विशेष कल्याण सहायक के रूप में कार्य करेंगी।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए सभी उद्योगपतियों व कारखानों के मालिकों को निर्देश दे दिए गए हैं: डीसी
महिलाओं की सुरक्षा के लिए श्रम विभाग के कानूनों में कुछ बदलाव हुआ है। अब फैक्टरी मालिक अपनी मर्जी से महिला श्रमिकों से मनमर्जी से काम नहीं करा सकेंगे। पहले उन्हें महिला श्रमिकों की सुरक्षा की गारंटी लेनी होगी। फैक्टरी में महिलाओं की सुरक्षा के नियम बनाए गए हैं। अगर कोई फैक्टरी संचालक नियमों की अवहेलना करता पाया गया तो कड़ी कार्रवाई होगी।
सुमेधा कटारिया, डीसी पानीपत।