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सिविल अस्पताल में मरीजों को नहीं मिला स्ट्रेचर व व्हील चेयर, मरीज को रेहड़ी में डालकर एमरजेंसी वार्ड में ले गए
Updated Mon, 09 Jul 2018 11:24 PM IST
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नहीं मिला स्ट्रेचर व व्हीलचेयर, मरीज को रेहड़ी में ले गए इमरजेंसी वार्ड
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। सिविल अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर भी नहीं है। गंभीर मरीजों को भी पैदल ही डॉक्टरों की केबिन तक जाना पड़ता है। मरीजों को रेहड़ियों में डालकर ले जाना पड़ रहा है। अस्पताल में मात्र 8 स्ट्रेचर हैं। इनमें से 4 आपातकाल विभाग में और 4 अस्पताल के अलग-अलग वार्डों में हैं। मरीजों की ओपीडी के हिसाब से अस्पताल में 20 स्ट्रेचर की जरूरत है। व्हील चेयर भी 6 ही उपलब्ध है। इनमें से तीन प्रसूति वार्ड में और एक आपातकाल विभाग में हैं। अस्पताल में औसतन हर रोज 30 डिलीवरी होती हैं। इस हिसाब से प्रसूति वार्ड में 7 से 8 व्हीलचेयर होनी चाहिए।
सोमवार को देशराज कॉलोनी निवासी एक टीबी रोगी आया था। नई बिल्डिंग में पहुंचने के बाद पता चला कि पुरानी बिल्डिंग में टीबी विंग है। मरीज को वहां तक ले जाने के लिए न स्ट्रेचर मिला और न ही व्हील चेयर मिली। इसके बाद परिजन मरीज को रेहड़ी में डालकर टीबी विंग में ले गए। इसके अलावा देर रात को डिलीवरी के लिए आई महिला को भी स्ट्रेचर नहीं मिला। नौ माह की गर्भवती को 30 सीढ़ियां चढ़कर पैदल प्रसूति वार्ड में जाना पड़ा। दूसरी ओर रात को पेट दर्द के कारण आपातकाल विभाग में आई पिंकी निवासी सनौली को महिला डॉक्टर न होने के कारण इलाज नहीं मिला। पिंकी आपातकाल विभाग में ही दर्द से कराहती रही, लेकिन डॉक्टर नहीं मिली। इसके बाद स्टाफ नर्स ने महिला को दर्द का इंजेक्शन लगाया। नर्सों ने महिला को इलाज के लिए सोमवार को अस्पताल में बुलाया। इस अव्यवस्था पर सिविल सर्जन डॉ. संतलाल वर्मा का कहना है कि अस्पताल में स्ट्रेचर व व्हील चेयर की कितनी कमी है, इस बारे में एमएस से बात की जाएगी। अस्पताल के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को सख्त हिदायतें दी जाएंगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। सिविल अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर भी नहीं है। गंभीर मरीजों को भी पैदल ही डॉक्टरों की केबिन तक जाना पड़ता है। मरीजों को रेहड़ियों में डालकर ले जाना पड़ रहा है। अस्पताल में मात्र 8 स्ट्रेचर हैं। इनमें से 4 आपातकाल विभाग में और 4 अस्पताल के अलग-अलग वार्डों में हैं। मरीजों की ओपीडी के हिसाब से अस्पताल में 20 स्ट्रेचर की जरूरत है। व्हील चेयर भी 6 ही उपलब्ध है। इनमें से तीन प्रसूति वार्ड में और एक आपातकाल विभाग में हैं। अस्पताल में औसतन हर रोज 30 डिलीवरी होती हैं। इस हिसाब से प्रसूति वार्ड में 7 से 8 व्हीलचेयर होनी चाहिए।
सोमवार को देशराज कॉलोनी निवासी एक टीबी रोगी आया था। नई बिल्डिंग में पहुंचने के बाद पता चला कि पुरानी बिल्डिंग में टीबी विंग है। मरीज को वहां तक ले जाने के लिए न स्ट्रेचर मिला और न ही व्हील चेयर मिली। इसके बाद परिजन मरीज को रेहड़ी में डालकर टीबी विंग में ले गए। इसके अलावा देर रात को डिलीवरी के लिए आई महिला को भी स्ट्रेचर नहीं मिला। नौ माह की गर्भवती को 30 सीढ़ियां चढ़कर पैदल प्रसूति वार्ड में जाना पड़ा। दूसरी ओर रात को पेट दर्द के कारण आपातकाल विभाग में आई पिंकी निवासी सनौली को महिला डॉक्टर न होने के कारण इलाज नहीं मिला। पिंकी आपातकाल विभाग में ही दर्द से कराहती रही, लेकिन डॉक्टर नहीं मिली। इसके बाद स्टाफ नर्स ने महिला को दर्द का इंजेक्शन लगाया। नर्सों ने महिला को इलाज के लिए सोमवार को अस्पताल में बुलाया। इस अव्यवस्था पर सिविल सर्जन डॉ. संतलाल वर्मा का कहना है कि अस्पताल में स्ट्रेचर व व्हील चेयर की कितनी कमी है, इस बारे में एमएस से बात की जाएगी। अस्पताल के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को सख्त हिदायतें दी जाएंगी।
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