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29 साल से पेंशन का इंतजार कर रही विधवा को हाईकोर्ट से मिला इंसाफ, महाप्रबंधक पर जुर्माना
Fri, 11 Sep 2020 02:53 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Fri, 11 Sep 2020 02:53 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
मृतक पति की पेंशन के लिए 29 साल से इंतजार कर रही विधवा की पेंशन की राह में रोड़ा अटकाने वाले हरियाणा रोडवेज चंडीगढ़ के महाप्रबंधक पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना के तहत कार्रवाई के लिए सुनवाई आरंभ करने के भी आदेश दिए हैं। विधवा रामरति ने बताया उसके पति की मौत सितंबर 1991 में हो गई थी। तब से लेकर अब तक उसे फैमिली पेंशन व अन्य लाभ नहीं दिए गए। जिसके चलते 2017 में उसने उच्च न्यायालय की शरण ली।
गत वर्ष महानिदेशक के आश्वासन पर उच्च न्यायालय ने याचिका का निपटारा करते हुए विभाग को तीन माह के भीतर ब्याज सहित राशि याचिकाकर्ता को उपलब्ध करवाने के आदेश दिए थे। तीन महीने बीत जाने के बाद रोडवेज महाप्रबंधक ने पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी। उच्च न्यायालय ने कहा कि कैसे एक कर्मचारी की विधवा को 29 वर्ष तक उसके हक से वंचित रखा गया।
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पीएम राहत कोष में जमा करना होगा जुर्माना राशि
उच्च न्यायालय ने महाप्रबंधक को जमकर फटकार लगाई। न्यायालय ने कहा यह पुनर्विचार याचिका और कुछ नहीं बल्कि विधवा को मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने और अदालत के आदेश के अनादर करने का प्रयास है। उच्च न्यायालय ने महाप्रबंधक पर 50000 रुपये जुर्माना लगाते हुए इसे प्रधानमंत्री राहत कोष में अपनी जेब से जमा करवाने के आदेश दिए हैं।
महाप्रबंधक को जुर्माना भरकर इसकी जानकारी उच्च न्यायालय को देनी होगी। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने महाप्रबंधक पर आदेश की अवहेलना को लेकर अवमानना का मामला चलाने के आदेश दिए हैं।
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इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना के तहत कार्रवाई के लिए सुनवाई आरंभ करने के भी आदेश दिए हैं। विधवा रामरति ने बताया उसके पति की मौत सितंबर 1991 में हो गई थी। तब से लेकर अब तक उसे फैमिली पेंशन व अन्य लाभ नहीं दिए गए। जिसके चलते 2017 में उसने उच्च न्यायालय की शरण ली।
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गत वर्ष महानिदेशक के आश्वासन पर उच्च न्यायालय ने याचिका का निपटारा करते हुए विभाग को तीन माह के भीतर ब्याज सहित राशि याचिकाकर्ता को उपलब्ध करवाने के आदेश दिए थे। तीन महीने बीत जाने के बाद रोडवेज महाप्रबंधक ने पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी। उच्च न्यायालय ने कहा कि कैसे एक कर्मचारी की विधवा को 29 वर्ष तक उसके हक से वंचित रखा गया।
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पीएम राहत कोष में जमा करना होगा जुर्माना राशि
उच्च न्यायालय ने महाप्रबंधक को जमकर फटकार लगाई। न्यायालय ने कहा यह पुनर्विचार याचिका और कुछ नहीं बल्कि विधवा को मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने और अदालत के आदेश के अनादर करने का प्रयास है। उच्च न्यायालय ने महाप्रबंधक पर 50000 रुपये जुर्माना लगाते हुए इसे प्रधानमंत्री राहत कोष में अपनी जेब से जमा करवाने के आदेश दिए हैं।
महाप्रबंधक को जुर्माना भरकर इसकी जानकारी उच्च न्यायालय को देनी होगी। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने महाप्रबंधक पर आदेश की अवहेलना को लेकर अवमानना का मामला चलाने के आदेश दिए हैं।