{"_id":"5eb809988ebc3e9062520f64","slug":"prisoners-detainees-in-haryana-extend-parole-by-six-weeks-bureau-news-pkl374754398","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरियाणा में कैदियों और बंदियों की पैरोल छह सप्ताह और बढ़ाई गई, वापसी पर होंगे क्वारंटीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाणा में कैदियों और बंदियों की पैरोल छह सप्ताह और बढ़ाई गई, वापसी पर होंगे क्वारंटीन
Mon, 11 May 2020 12:33 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Mon, 11 May 2020 12:33 PM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा सरकार ने कैदियों व बंदियों की पैरोल पहले आत्मसमर्पण की तिथि से छह सप्ताह और बढ़ा दी है। यह निर्णय उन सभी कैदियों व बंदियों पर लागू होगा, जिनकी पैरोल 20 अप्रैल 2020 को हुई बैठक में तीन सप्ताह के लिए बढ़ाई गई थी। जेल मंत्री रणजीत सिंह ने बताया कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति के निर्देशानुसार अंतरिम जमानत पर छोड़े गए विचाराधीन बंदियों की जमानत अवधि भी आत्मसमर्पण की तिथि से और छह सप्ताह के लिए बढ़ाई जाएगी।
मौजूदा हालात के मद्देनजर अंतरिम जमानत, पैरोल, फरलो आदि से वापस आने वाले कैदियों व बंदियों के लिए कोविड जांच व 14 दिन के लिए क्वारंटीन करना अनिवार्य किया गया है। आपात आधार पर छुट्टी के बाद जेलों में लौटने वाले विभाग के कर्मचारियों को भी अनिवार्य रूप से कोविड जांच करवानी होगी। ऐसे कर्मचारियों को कोविड जांच रिपोर्ट नेगेटिव आने व जेल के चिकित्सा अधिकारी से फिटनेस रिपोर्ट मिलने के बाद ही नियमित ड्यूटी ज्वाइन करने की अनुमति दी जाएगी।
रणजीत सिंह ने कहा कि देश भर में बढ़ रही कोविड संक्रमितों की संख्या के बीच पैरोल या अंतरिम जमानत पर छोड़े गए लगभग चार हजार कैदी व बंदी वापस जेलों में आते हैं तो यह बहुत बड़ा जोखिम होगा। इतनी बड़ी संख्या में कैदियों व बंदियों के वापस आने से कोविड संक्त्रस्मण का जोखिम बढ़ जाएगा। उन्हें पैरोल व जमानत पर छोड़ने का उद्देश्य भी पूरा नहीं होगा। इसलिए सरकार ने इन कैदियों व बंदियों की पैरोल को पहले आत्मसमर्पण की तिथि से छह सप्ताह और बढ़ाने का निर्णय लिया है।
विज्ञापन
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं हरियाणा राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण के कार्यकारी चेयरमैन न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में जेल विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय वर्धन और महानिदेशक कारागार के. सेल्वराज भी शामिल हुए।
बैठक में उच्चाधिकार-प्राप्त कमेटी के निर्देशों के मद्देनजर कैदियों व बंदियों को पैरोल या अंतरिम जमानत पर छोड़ेने के लिए जींद, अंबाला और कुरुक्षेत्र की जिला मॉनिटरिंग कमेटियों की सिफारिशों पर भी विचार किया गया। सभी मंडलायुक्तों और डीसी को पैरोल से संबंधित लंबित आवदेनों का निपटारा करने के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
मौजूदा हालात के मद्देनजर अंतरिम जमानत, पैरोल, फरलो आदि से वापस आने वाले कैदियों व बंदियों के लिए कोविड जांच व 14 दिन के लिए क्वारंटीन करना अनिवार्य किया गया है। आपात आधार पर छुट्टी के बाद जेलों में लौटने वाले विभाग के कर्मचारियों को भी अनिवार्य रूप से कोविड जांच करवानी होगी। ऐसे कर्मचारियों को कोविड जांच रिपोर्ट नेगेटिव आने व जेल के चिकित्सा अधिकारी से फिटनेस रिपोर्ट मिलने के बाद ही नियमित ड्यूटी ज्वाइन करने की अनुमति दी जाएगी।
विज्ञापन
रणजीत सिंह ने कहा कि देश भर में बढ़ रही कोविड संक्रमितों की संख्या के बीच पैरोल या अंतरिम जमानत पर छोड़े गए लगभग चार हजार कैदी व बंदी वापस जेलों में आते हैं तो यह बहुत बड़ा जोखिम होगा। इतनी बड़ी संख्या में कैदियों व बंदियों के वापस आने से कोविड संक्त्रस्मण का जोखिम बढ़ जाएगा। उन्हें पैरोल व जमानत पर छोड़ने का उद्देश्य भी पूरा नहीं होगा। इसलिए सरकार ने इन कैदियों व बंदियों की पैरोल को पहले आत्मसमर्पण की तिथि से छह सप्ताह और बढ़ाने का निर्णय लिया है।
विज्ञापन
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं हरियाणा राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण के कार्यकारी चेयरमैन न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में जेल विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय वर्धन और महानिदेशक कारागार के. सेल्वराज भी शामिल हुए।
बैठक में उच्चाधिकार-प्राप्त कमेटी के निर्देशों के मद्देनजर कैदियों व बंदियों को पैरोल या अंतरिम जमानत पर छोड़ेने के लिए जींद, अंबाला और कुरुक्षेत्र की जिला मॉनिटरिंग कमेटियों की सिफारिशों पर भी विचार किया गया। सभी मंडलायुक्तों और डीसी को पैरोल से संबंधित लंबित आवदेनों का निपटारा करने के निर्देश दिए गए हैं।