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पंजाब में पहली बार की गई कोरोना मरीज की प्लाज्मा थेरेपी, परिणामों पर डॉक्टरों की निगरानी
Sat, 13 Jun 2020 12:29 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 13 Jun 2020 12:29 PM IST
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प्लाज्मा थेरैपी
- फोटो : social media
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कोविड-19 की रोकथाम के लिए गुरु गोबिंद सिंह चिकित्सा कॉलेज और अस्पताल फरीदकोट द्वारा इलाज के नए तरीकों के तहत राज्य की पहली प्लाज्मा थेरेपी की गई है। पंजाब के चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री ओपी सोनी ने कहा कि फरीदकोट में डॉक्टरों की टीम ने कोविड के कारण गंभीर रूप से बीमार मरीज को यह थेरेपी दी है।
यह अस्पताल आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च) के तहत नेशनल क्लीनिकल ट्रायल के हिस्से के तौर पर इस थेरेपी की शुरुआत करने वाला देश का अग्रणी संस्थान बन गया है। सोनी ने बताया कि पंजाब में कोविड-19 के मरीज को दी गई यह पहली थेरेपी है।
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इस उद्देश्य के लिए कुछ दिन पहले जीजीएस चिकित्सा कॉलेज फरीदकोट में कोविड से स्वस्थ हुए मरीज का प्लाज्मा लेकर स्टोर किया गया था। यह प्लाज्मा इस वायरस से गंभीर रूप से पीड़ित व्यक्ति को दिया गया। प्लाज्मा थेरेपी के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है और वह निगरानी अधीन है।
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यह अस्पताल आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च) के तहत नेशनल क्लीनिकल ट्रायल के हिस्से के तौर पर इस थेरेपी की शुरुआत करने वाला देश का अग्रणी संस्थान बन गया है। सोनी ने बताया कि पंजाब में कोविड-19 के मरीज को दी गई यह पहली थेरेपी है।
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क्या है प्लाज्मा थेरेपी
क्या है प्लाज्मा
प्लाज्मा खून का तरल और पारदर्शी भाग होता है। यह हल्का पीला होता है। यह 92 फीसदी तक पानी से मिलकर बना होता है। रक्त का 55 फीसदी हिस्सा प्लाज्मा ही होता है।
क्या है प्लाज्मा थेरेपी
जब इंसान किसी रोगाणु के संपर्क में आता है तो शरीर उसे खत्म करने के लिए एंटीबॉडी बनाता है। ये एंटीबॉडी प्लाज्मा में भी मिलती हैं। जब मरीज संक्रमण से ठीक हो जाता है, तब ये एंटीबॉडी कुछ समय तक प्लाज्मा में मौजदू रहती हैं। कई दफा आपकी एंटीबॉडी दूसरे में फैले संक्रमण से भी लड़ सकती हैं।
प्लाज्मा खून का तरल और पारदर्शी भाग होता है। यह हल्का पीला होता है। यह 92 फीसदी तक पानी से मिलकर बना होता है। रक्त का 55 फीसदी हिस्सा प्लाज्मा ही होता है।
क्या है प्लाज्मा थेरेपी
जब इंसान किसी रोगाणु के संपर्क में आता है तो शरीर उसे खत्म करने के लिए एंटीबॉडी बनाता है। ये एंटीबॉडी प्लाज्मा में भी मिलती हैं। जब मरीज संक्रमण से ठीक हो जाता है, तब ये एंटीबॉडी कुछ समय तक प्लाज्मा में मौजदू रहती हैं। कई दफा आपकी एंटीबॉडी दूसरे में फैले संक्रमण से भी लड़ सकती हैं।