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Panchkula News: सड़क हादसे में बाइक सवार की मौत, परिजनों को 11.49 लाख मुआवजा
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पंचकूला। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने अंबाला जिले के गांव जतावर निवासी अमरीक सिंह की सड़क हादसे में हुई माैत के मामले में उनके परिजनों को कुल 11,49,544 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह राशि 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ दुर्घटना की तारीख से वसूली जाएगी।
परिजनों ने बताया कि 8 फरवरी 2024 की शाम गांव मौली, जिला पंचकूला में पेट्रोल पंप के पास पीछे से तेज रफ्तार कार ने अमरीक सिंह की मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल अमरीक को पहले अलकेमिस्ट अस्पताल और बाद में पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया जहां उनकी माैत हो गई। अमरीक सिंह 52 वर्ष के थे और खेती-बाड़ी व डेयरी का काम करते थे। वह परिवार के एकमात्र सहारा थे। हादसे के बाद थाना रायपुररानी में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
दूसरी ओर, वाहन चालक रवि सागर और वाहन मालिक नितिश शर्मा ने दावा याचिका का विरोध किया जबकि यूनिवर्सल सोम्पो इंश्योरेंस कंपनी ने भी जवाबदेही से इन्कार किया। ट्रिब्यूनल ने सभी पक्षों की दलीलों और साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद पाया कि चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था और वाहन नियमों का उल्लंघन नहीं कर रहा था।
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इस आधार पर ट्रिब्यूनल ने वाहन मालिक और बीमा कंपनी दोनों को संयुक्त रूप से मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार ठहराया। जबकि प्राथमिक जिम्मेदारी इंश्योरेंस कंपनी की होगी। ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि बीमा कंपनी दो माह के भीतर मुआवजा राशि पीड़ित पक्ष के बैंक खातों में जमा करे। मुआवजे का 50 प्रतिशत हिस्सा मृतक की पत्नी को, जबकि 25-25 प्रतिशत हिस्सा पुत्र और माता को दिया जाएगा।
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परिजनों ने बताया कि 8 फरवरी 2024 की शाम गांव मौली, जिला पंचकूला में पेट्रोल पंप के पास पीछे से तेज रफ्तार कार ने अमरीक सिंह की मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल अमरीक को पहले अलकेमिस्ट अस्पताल और बाद में पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया जहां उनकी माैत हो गई। अमरीक सिंह 52 वर्ष के थे और खेती-बाड़ी व डेयरी का काम करते थे। वह परिवार के एकमात्र सहारा थे। हादसे के बाद थाना रायपुररानी में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
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दूसरी ओर, वाहन चालक रवि सागर और वाहन मालिक नितिश शर्मा ने दावा याचिका का विरोध किया जबकि यूनिवर्सल सोम्पो इंश्योरेंस कंपनी ने भी जवाबदेही से इन्कार किया। ट्रिब्यूनल ने सभी पक्षों की दलीलों और साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद पाया कि चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था और वाहन नियमों का उल्लंघन नहीं कर रहा था।
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इस आधार पर ट्रिब्यूनल ने वाहन मालिक और बीमा कंपनी दोनों को संयुक्त रूप से मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार ठहराया। जबकि प्राथमिक जिम्मेदारी इंश्योरेंस कंपनी की होगी। ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि बीमा कंपनी दो माह के भीतर मुआवजा राशि पीड़ित पक्ष के बैंक खातों में जमा करे। मुआवजे का 50 प्रतिशत हिस्सा मृतक की पत्नी को, जबकि 25-25 प्रतिशत हिस्सा पुत्र और माता को दिया जाएगा।