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रेलवे ट्रैक जाम कर यात्रियों का फूलों से करेंगे स्वागत
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पलवल। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर रेलवे ट्रैक जाम करने के दौरान यात्रियों का स्वागत फूलों से किया जाएगा। वहीं पटरियों पर भी फूल बिछाए जाएंगे और यात्रियों के जलपान की भी पूरी व्यवस्था रहेगी। यह निर्णय बुधवार को केएमपी-केजीपी पर चल रहे धरने में लिया गया। किसानों ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने की तरह ही रेलवे ट्रैक जाम करने के दौरान अहिंसा का परिचय दिया जाएगा।
बुधवार को कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे धरने में रेलवे ट्रैक जाम करने को लेकर रणनीति तैयार की गई। ट्रैक किस स्थान पर जाम किया जाएगा, इसका निर्णय बृहस्पतिवार को सुबह लिया जाएगा। धरने की अध्यक्षता रूपराम मोहना व संचालन रूपराम तेवतिया ने किया। इस अवसर पर गीतों व कविताओं के जरिये सरकार पर कटाक्ष किए गए।
मास्टर महेंद्र चौहान ने कहा कि किसान आंदोलन सामूहिक नेतृत्व, अहिंसा व गैर राजनीतिक भावना के तहत चलाया जा रहा है। किसान केवल तीनों कानूनों की वापसी चाहते हैं। 36 बिरादरी के किसान संगठित होकर अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। भाजपा सरकार धरने को राजनीति से जोड़कर किसानों को बदनाम करने का काम कर रही है जबकि धरनास्थल पर किसी भी पार्टी या संगठन का झंडा तक लगाने नहीं दिया जा रहा है। इस मौके पर राजुकमार ओहलियान, सोहनपाल, राजेंद्र सिंह घर्रोट, डॉ. रघुवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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किसानों से मांगे सुझाव
रेलवे ट्रैक जाम करने को लेकर बुधवार को आयोजित बैठक में किसानों के सुझाव मांगे गए। इस दौरान 52 पाल के अध्यक्ष अरुण जेलदार, पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल, पूर्व विधायक उदयभान, डागर पाल के पंच धर्मबीर डागर, चौहान पाल के पंच जय नारायण चौहान, किसान संघर्ष समिति से मास्टर महेंद्र चौहान, धर्मचंद घुघेरा, सोहनपाल चौहान, रतन सिंह सौरोत आदिा ने अपने विचार रखे। निर्णय लिया गया कि दोपहर 12 बजे से चार बजे तक ट्रैक जाम किया जाएगा। वहीं यात्रियों का फूलों से स्वागत कर उन्हें जलपान करवाया जाएगा।
गांवोें में अभियान चलाकर की अपील
बुधवार को गांवों में जाकर लोगों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचने की अपील की गई। वहीं कृषि कानूनों के नुकसान गिनवाए गए। किसान सभा के नेता धर्मचंद ने बताया कि पाल पंचों को अपनी-अपनी पालों में विशेष जागरूकता अभियान चलाने की ड्यूटी लगाई गई है, जो कि गांव-गांव जाकर लोगों को कृषि कानूनों के खिलाफ जागरूक कर रहे हैं।
पंचायत से लेकर सांसद चुनाव तक करेंगे विरोध
किसान नेताओं ने बताया कि संघर्ष समिति द्वारा पारित किए गए निंदा प्रस्ताव को आगामी चुनावों में अमल में लाया जाएगा। पंचायत से लेकर सांसद तक जो भी नेता किसान आंदोलन में सहयोग नहीं कर रहे हैं, उनका बहिष्कार किया जाएगा। जो किसानों के साथ खड़ा है, उसी को किसानों का समर्थन मिलेगा।
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बुधवार को कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे धरने में रेलवे ट्रैक जाम करने को लेकर रणनीति तैयार की गई। ट्रैक किस स्थान पर जाम किया जाएगा, इसका निर्णय बृहस्पतिवार को सुबह लिया जाएगा। धरने की अध्यक्षता रूपराम मोहना व संचालन रूपराम तेवतिया ने किया। इस अवसर पर गीतों व कविताओं के जरिये सरकार पर कटाक्ष किए गए।
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मास्टर महेंद्र चौहान ने कहा कि किसान आंदोलन सामूहिक नेतृत्व, अहिंसा व गैर राजनीतिक भावना के तहत चलाया जा रहा है। किसान केवल तीनों कानूनों की वापसी चाहते हैं। 36 बिरादरी के किसान संगठित होकर अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। भाजपा सरकार धरने को राजनीति से जोड़कर किसानों को बदनाम करने का काम कर रही है जबकि धरनास्थल पर किसी भी पार्टी या संगठन का झंडा तक लगाने नहीं दिया जा रहा है। इस मौके पर राजुकमार ओहलियान, सोहनपाल, राजेंद्र सिंह घर्रोट, डॉ. रघुवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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किसानों से मांगे सुझाव
रेलवे ट्रैक जाम करने को लेकर बुधवार को आयोजित बैठक में किसानों के सुझाव मांगे गए। इस दौरान 52 पाल के अध्यक्ष अरुण जेलदार, पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल, पूर्व विधायक उदयभान, डागर पाल के पंच धर्मबीर डागर, चौहान पाल के पंच जय नारायण चौहान, किसान संघर्ष समिति से मास्टर महेंद्र चौहान, धर्मचंद घुघेरा, सोहनपाल चौहान, रतन सिंह सौरोत आदिा ने अपने विचार रखे। निर्णय लिया गया कि दोपहर 12 बजे से चार बजे तक ट्रैक जाम किया जाएगा। वहीं यात्रियों का फूलों से स्वागत कर उन्हें जलपान करवाया जाएगा।
गांवोें में अभियान चलाकर की अपील
बुधवार को गांवों में जाकर लोगों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचने की अपील की गई। वहीं कृषि कानूनों के नुकसान गिनवाए गए। किसान सभा के नेता धर्मचंद ने बताया कि पाल पंचों को अपनी-अपनी पालों में विशेष जागरूकता अभियान चलाने की ड्यूटी लगाई गई है, जो कि गांव-गांव जाकर लोगों को कृषि कानूनों के खिलाफ जागरूक कर रहे हैं।
पंचायत से लेकर सांसद चुनाव तक करेंगे विरोध
किसान नेताओं ने बताया कि संघर्ष समिति द्वारा पारित किए गए निंदा प्रस्ताव को आगामी चुनावों में अमल में लाया जाएगा। पंचायत से लेकर सांसद तक जो भी नेता किसान आंदोलन में सहयोग नहीं कर रहे हैं, उनका बहिष्कार किया जाएगा। जो किसानों के साथ खड़ा है, उसी को किसानों का समर्थन मिलेगा।