फर्जी अफसर पकड़े: दो महीने की रेकी के बाद 30 तोला सोने की लूट का खुलासा, मास्टरमाइंड समेत सात धराए
पलवल पुलिस ने ब्लाइंड लूट का खुलासा कर दिया है। अंतरराज्यीय संगठित गिरोह के मास्टरमाइंड सहित सात बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है। 300 सीसीटीवी फुटेज खंगालकर पकड़े गए आरोपियों ने दो महीने रेकी कर फर्जी आईडी-नंबर प्लेट से सर्राफा व्यापारी को लूटा था।
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जिला पुलिस ने 30 तोला सोना और 31 लाख रुपए की नगदी की ब्लाइंड लूट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने अंतरराज्यीय संगठित गैंग के मास्टरमाइंड सहित 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 17.50 लाख रुपये नकद, 138 ग्राम सोना बरामद किया है। इसके साथ ही वारदात में प्रयुक्त दो कारें, एक मोटरसाइकिल, चार नकली नंबर प्लेट और चार मोबाइल फोन बरामद किया गया है।
पुलिस ने 300 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर आरोपियों की पहचान
एसपी नीतीश अग्रवाल ने प्रेस वार्ता में बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम यूनिट, थाना शहर पलवल और साइबर टीम की संयुक्त चार टीमें गठित की गईं। पुलिस ने पलवल, गुरुग्राम, दिल्ली समेत कई स्थानों के करीब 250-300 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली।
तकनीकी विश्लेषण और इंटेलिजेंस के आधार पर दिल्ली और फरीदाबाद के अलग-अलग ठिकानों से मास्टरमाइंड सहित सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में मास्टरमाइंड धरमबीर उर्फ सरजी उर्फ फौजी (64) निवासी झज्जर, नरेंद्र उर्फ निटू, अमित उर्फ बबलू, बिजेंद्र उर्फ काला पंडित, लक्ष्मण उर्फ केहरी, दिनेश कुमार और दीपक सामंतो शामिल हैं। गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों से हैं और लंबे समय से संगठित अपराध में सक्रिय थे।
डीआरआई अधिकारी बनकर लूट को दिया था अंजाम
गौरतलब है कि 2 अप्रैल 2026 को बदमाशों ने खुद को राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) का अधिकारी बताकर राष्ट्रीय राजमार्ग-19 स्थित हुडा चौक के पास एक सर्राफा कारोबारी की कार रुकवाई। इसके बाद चालक और कर्मचारी से करीब 30 तोला सोना और 31 लाख रुपये नगद लूट लिए। वारदात के बाद एक कर्मचारी का अपहरण कर उसे गुरुग्राम में छोड़ दिया और आरोपी फरार हो गए।
दो महीने से कर रहे थे रेकी
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी पहले अपने शिकार की रेकी करते थे और फिर फर्जी आईडी व नंबर प्लेट का इस्तेमाल कर खुद को सरकारी अधिकारी बताकर लूट की वारदात को अंजाम देते थे। इस मामले में भी आरोपियों ने करीब दो महीने तक सर्राफा व्यापारी की गतिविधियों पर नजर रखा था।
इसके बाद सुनियोजित तरीके से वाहनों का नंबर प्लेट बदलकर और वॉकी-टॉकी की मदद से लूट को अंजाम दिया। आरोपियों ने पुलिस से बचने के लिए तीन अलग-अलग कार को अलग-अलग क्षेत्र में भेज दिया। इसके साथ ही सीसीटीवी से बचने के लिए मुख्य मार्ग को छोड़कर वैकल्पिक मार्ग का सहारा लिया। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि इस गैंग ने पहले भी ग्वालियर और दिल्ली में लाखों रुपये की लूट की घटनाओं को अंजाम दिया है।