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एमएसपी के नाम पर भ्रमित कर रही है सरकार
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पलवल में चल रहा किसानों का धरना
- फोटो : Palwal
पलवल। कृषि कानूनों के विरोध में केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर चल रहा किसानों का धरना मंगलवार को भी जारी रहा। इस दौरान आंदोलन को तेज करने के लिए तैयारियां की गई। साथ ही 23 मार्च को शहीदी दिवस और 26 मार्च को भारत में बंद के दौरान ज्यादा से ज्यादा संख्या में किसानों से पहुंचने की अपील की गई। इस दौरान यूपी के छाता से आई सरदारी ने धरने को समर्थन दिया। धरने की अध्यक्षता प्रेम सिंह छाता ने की, जबकि संचालन राजकुमार ओलिहान ने किया। धरने में किसान एकता जिंदाबाद के नारे लगते रहे।
किसान संघर्ष समिति के तत्वावधान में अटोहां चौक पर जारी धरने में किसानों ने चौपाई और तुक प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने अपने भाषण के जरिये किसानों में जोश भरने का काम किया। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार सभी सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों को बेचने में लगी है। रेल, तेल, बैंक, बीमा, बिजली, हवाई अड्डे, स्कूल, अस्पताल को पूंजीपतियों को बेचा जा रहा है। राष्ट्रवादी विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद ने कहा कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी रखने का दावा कर रही है, परंतु एमएमपी को समाप्त नहीं किया जाएगा, इस बात में कोई दम नहीं है। पूरी तरह से किसानों को भ्रमित किया जा रहा है। सरकार यदि वास्तव में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देना चाहती है तो वह किसान संगठनों की मांग को अनसुना न करें।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार के तीनों कृषि कानून किसानों के हित में हैं, तो बंगाल, पांडूचेरी असम, केरल और तमिलनाडु के चुनावों में कृषि कानूनों के मुद्दे पर चुनाव लड़ना चाहिए। हमेशा से सरकार बनाने में किसानों की विशेष भूमिका रही है। सरकार और जन प्रतिनिधि किसानों से टकराने की भूल न करे। धरने को रूपराम तेवतिया, डिंपी पहलवान सोनीपत, बुद्धि दूधिया औरंगाबाद, हरप्रसाद आर्य, चंदरमुनि, कुलभान कुमार छाता, राजेंद्र सिंह, अच्छेलाल जोधपुर, लखनपाल नेहरा, धन्नीराम अलावलपुर, बस्तीराम और भोंदा अलावलपुर ने संबोधित किया।
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किसान संघर्ष समिति के तत्वावधान में अटोहां चौक पर जारी धरने में किसानों ने चौपाई और तुक प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने अपने भाषण के जरिये किसानों में जोश भरने का काम किया। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार सभी सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों को बेचने में लगी है। रेल, तेल, बैंक, बीमा, बिजली, हवाई अड्डे, स्कूल, अस्पताल को पूंजीपतियों को बेचा जा रहा है। राष्ट्रवादी विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद ने कहा कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी रखने का दावा कर रही है, परंतु एमएमपी को समाप्त नहीं किया जाएगा, इस बात में कोई दम नहीं है। पूरी तरह से किसानों को भ्रमित किया जा रहा है। सरकार यदि वास्तव में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देना चाहती है तो वह किसान संगठनों की मांग को अनसुना न करें।
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उन्होंने कहा कि यदि सरकार के तीनों कृषि कानून किसानों के हित में हैं, तो बंगाल, पांडूचेरी असम, केरल और तमिलनाडु के चुनावों में कृषि कानूनों के मुद्दे पर चुनाव लड़ना चाहिए। हमेशा से सरकार बनाने में किसानों की विशेष भूमिका रही है। सरकार और जन प्रतिनिधि किसानों से टकराने की भूल न करे। धरने को रूपराम तेवतिया, डिंपी पहलवान सोनीपत, बुद्धि दूधिया औरंगाबाद, हरप्रसाद आर्य, चंदरमुनि, कुलभान कुमार छाता, राजेंद्र सिंह, अच्छेलाल जोधपुर, लखनपाल नेहरा, धन्नीराम अलावलपुर, बस्तीराम और भोंदा अलावलपुर ने संबोधित किया।
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