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Palwal News: 1.16 करोड़ से होगी साइबर क्राइम इंफ्रास्ट्रक्चर की किलाबंदी
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626 मोबाइल और 1348 फर्जी सिम कार्ड जब्त, 18,648 सिम व 6102 आईएमईआई कराए ब्लॉक
17 माह में 493 एफआईआर, 711 से अधिक आरोपी गिरफ्तार
दिनेश देशवाल
नूंह। साइबर ठगी के मामलों को लेकर देशभर में चर्चा में रहने वाले नूंह जिले में अब साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस अपने ढांचे को और मजबूत करेगी। जिला पुलिस ने साइबर अपराध की रोकथाम, पहचान और जांच के लिए 1.16 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसके तहत आधुनिक तकनीक की मशीनें, डिजिटल फोरेंसिक और निगरानी क्षमता को बढ़ाने समेत अन्य चीजों पर काम किया जाएगा।
जिला पुलिस के अनुसार, नूंह में साइबर अपराध से जुड़े नेटवर्क तेजी से चुनौती बन रहे हैं। जिले के कुछ ग्रामीण क्षेत्र साइबर सक्षम वित्तीय धोखाधड़ी के केंद्र के रूप में भी चिह्नित किए गए हैं। ऐसे में पुलिस के सामने अपराधियों तक पहुंचने, उनके डिजिटल नेटवर्क को समझने और ठगी में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल नंबरों, उपकरणों तथा अन्य संसाधनों पर कार्रवाई करने की चुनौती है।
गृह मंत्रालय के आई4सी प्लेटफॉर्म का लिया सहारा
विभागीय जानकारी के अनुसार, 1 जनवरी 2025 से 31 मई 2026 तक 17 माह के दौरान नूंह जिला पुलिस ने साइबर अपराध के 493 मामले दर्ज किए। इन मामलों में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 711 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसके अलावा पुलिस ने 626 मोबाइल हैंडसेट और 1348 फर्जी सिम कार्ड जब्त किए हैं। यह आंकड़े जिले में साइबर अपराध के बड़े नेटवर्क और उसके खिलाफ पुलिस की कार्रवाई दोनों को सामने रखते हैं।
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पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को केवल गिरफ्तारी और बरामदगी तक सीमित नहीं रखा। गृह मंत्रालय के आई4सी प्लेटफॉर्म के माध्यम से नूंह से जुड़े 18,648 फर्जी सिम कार्ड और 6,102 संदिग्ध आईएमईआई नंबरों को ब्लॉक कराने में भी सफलता मिली है। इससे साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल संसाधनों पर रोक लगाने का प्रयास किया गया है।
एन्क्रिप्टेड नेटवर्क ने बढ़ाई चुनौती
पुलिस ने माना है कि साइबर अपराध की जांच पहले की तुलना में अधिक जटिल होती जा रही है। अपराधी एन्क्रिप्टेड नेटवर्क, पहचान छिपाने वाले उपकरणों और विकेंद्रीकृत वित्तीय लेनदेन जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा नूंह का भौगोलिक क्षेत्र भी पुलिस के लिए कई बार मैदानी स्तर पर पहुंच और कार्रवाई को चुनौतीपूर्ण बनाता है। इसी को देखते हुए पुलिस ने साइबर अपराध से निपटने के लिए डिजिटल फोरेंसिक, हवाई निगरानी और सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) अभियानों को एक साथ जोड़ने की रणनीति तैयार की है। पुलिस का मानना है कि संस्थागत स्तर पर साइबर अपराध से निपटने की क्षमता विकसित होने से जांच और रोकथाम दोनों को मजबूती मिलेगी।
साइबर थाने की इमारत जर्जर
जिला जहां साइबर अपराध के लिए पूरे देश में चर्चित है, वहीं इससे जुड़े केसों के अनुसंधान, आपराधिक रिकार्ड मेंटेन करने व अन्य जरुरी तकनीकी सुविधाएं भी जिला पुलिस के पास उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में जिले का साइबर थाना नूंह की अनाजमंड़ी परिसर में बनी एक पुरानी सी इमारत में अनेक सुविधाओं के अभाव में चल रहा है।
कोट
तैयार किए गए प्रस्ताव में साइबर अपराध की रोकथाम, डिटेक्शन और इन्वेस्टिगेशन के लिए 1.16 करोड़ रुपये की परियोजना का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा साइबर थाने के पुनर्निर्माण व अन्य सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। - डॉ. अर्पित जैन, एसपी, नूंह
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17 माह में 493 एफआईआर, 711 से अधिक आरोपी गिरफ्तार
दिनेश देशवाल
नूंह। साइबर ठगी के मामलों को लेकर देशभर में चर्चा में रहने वाले नूंह जिले में अब साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस अपने ढांचे को और मजबूत करेगी। जिला पुलिस ने साइबर अपराध की रोकथाम, पहचान और जांच के लिए 1.16 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसके तहत आधुनिक तकनीक की मशीनें, डिजिटल फोरेंसिक और निगरानी क्षमता को बढ़ाने समेत अन्य चीजों पर काम किया जाएगा।
जिला पुलिस के अनुसार, नूंह में साइबर अपराध से जुड़े नेटवर्क तेजी से चुनौती बन रहे हैं। जिले के कुछ ग्रामीण क्षेत्र साइबर सक्षम वित्तीय धोखाधड़ी के केंद्र के रूप में भी चिह्नित किए गए हैं। ऐसे में पुलिस के सामने अपराधियों तक पहुंचने, उनके डिजिटल नेटवर्क को समझने और ठगी में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल नंबरों, उपकरणों तथा अन्य संसाधनों पर कार्रवाई करने की चुनौती है।
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गृह मंत्रालय के आई4सी प्लेटफॉर्म का लिया सहारा
विभागीय जानकारी के अनुसार, 1 जनवरी 2025 से 31 मई 2026 तक 17 माह के दौरान नूंह जिला पुलिस ने साइबर अपराध के 493 मामले दर्ज किए। इन मामलों में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 711 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसके अलावा पुलिस ने 626 मोबाइल हैंडसेट और 1348 फर्जी सिम कार्ड जब्त किए हैं। यह आंकड़े जिले में साइबर अपराध के बड़े नेटवर्क और उसके खिलाफ पुलिस की कार्रवाई दोनों को सामने रखते हैं।
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पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को केवल गिरफ्तारी और बरामदगी तक सीमित नहीं रखा। गृह मंत्रालय के आई4सी प्लेटफॉर्म के माध्यम से नूंह से जुड़े 18,648 फर्जी सिम कार्ड और 6,102 संदिग्ध आईएमईआई नंबरों को ब्लॉक कराने में भी सफलता मिली है। इससे साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल संसाधनों पर रोक लगाने का प्रयास किया गया है।
एन्क्रिप्टेड नेटवर्क ने बढ़ाई चुनौती
पुलिस ने माना है कि साइबर अपराध की जांच पहले की तुलना में अधिक जटिल होती जा रही है। अपराधी एन्क्रिप्टेड नेटवर्क, पहचान छिपाने वाले उपकरणों और विकेंद्रीकृत वित्तीय लेनदेन जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा नूंह का भौगोलिक क्षेत्र भी पुलिस के लिए कई बार मैदानी स्तर पर पहुंच और कार्रवाई को चुनौतीपूर्ण बनाता है। इसी को देखते हुए पुलिस ने साइबर अपराध से निपटने के लिए डिजिटल फोरेंसिक, हवाई निगरानी और सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) अभियानों को एक साथ जोड़ने की रणनीति तैयार की है। पुलिस का मानना है कि संस्थागत स्तर पर साइबर अपराध से निपटने की क्षमता विकसित होने से जांच और रोकथाम दोनों को मजबूती मिलेगी।
साइबर थाने की इमारत जर्जर
जिला जहां साइबर अपराध के लिए पूरे देश में चर्चित है, वहीं इससे जुड़े केसों के अनुसंधान, आपराधिक रिकार्ड मेंटेन करने व अन्य जरुरी तकनीकी सुविधाएं भी जिला पुलिस के पास उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में जिले का साइबर थाना नूंह की अनाजमंड़ी परिसर में बनी एक पुरानी सी इमारत में अनेक सुविधाओं के अभाव में चल रहा है।
कोट
तैयार किए गए प्रस्ताव में साइबर अपराध की रोकथाम, डिटेक्शन और इन्वेस्टिगेशन के लिए 1.16 करोड़ रुपये की परियोजना का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा साइबर थाने के पुनर्निर्माण व अन्य सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। - डॉ. अर्पित जैन, एसपी, नूंह