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Mahendragarh-Narnaul News: आंखें बंद कर सुई में धागा डालने के साथ रुबिक क्यूब सॉल्व करते हैं वंशिका और दक्ष
Tue, 23 Jun 2026 11:22 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 23 Jun 2026 11:22 PM IST
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फोटो 02 वंशिका शर्मा अपने भाई दक्ष भारद्वाज के साथ। संवाद
नारनौल। शहर से 12 किलोमीटर दूर ताजपुर गांव के रहने वाली वंशिका शर्मा और दक्ष भारद्वाज ने अपने ब्रेन को नियंत्रित करना सीख लिया है। दोनों बंद आंखों से सुई में धागा डालने से लेकर रुबिक क्यूब सॉल्व कर देते हैं।
छठी कक्षा की छात्रा वंशिका और उसका छोटा भाई तीसरी कक्षा का छात्र दक्ष निरंतर अभ्यास के बल पर वो ऐसा कर पाने में सफल हुए हैं। उनकी इसी कला से प्रभावित होकर उनके स्कूल प्रबंधन ने दोनों की फीस भी आधी कर दी है।
पिता मनोज शर्मा ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले बच्चों के स्कूल में ब्रेन मैपर झुंझुनूं निवासी अक्षय पारीक आए थे और उनकी कला को देखकर वे इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने दोनों बच्चों को उनके पास ये हुनर सीखने के लिए भेज दिया। दोनों ही बच्चों ने झुंझुनूं व सरदारशहर, चुरू में रहकर करीब 45 दिन प्रशिक्षण प्राप्त किया।
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इस प्रशिक्षण के दौरान बच्चों ने ब्रेन मैपिंग, दाएं व बाएं मस्तिष्क को कंट्रोल करना, ब्रेन योग, त्राटक विधि व आध्यात्मिक साधना आदि सीखा और घर आने के बाद निरंतर अभ्यास जारी रखा। उन्होंने वहां रहते हुए मानव शरीर के सातों चक्र मूलाधार चक्र, स्वाधिष्टान, सोलर प्लेक्स, हार्ट चक्र, विशुद्धि चक्र, अजना व क्राउन चक्र के जागरण की विधि भी सीखीं।
विश्व में अलग पहचान बनाना चाहते हैं दोनों भाई-बहन
वंशिका और दक्ष आंखों पर पट्टी बांधकर साइकिल चलाने, किताब पढ़ने, सड़क पर चलती गाड़ियों की पहचान करने, रुबिक क्यूब सॉल्व करने, पेंटिंग करने और सुई में धागा डालने में माहिर हो चुके हैं। दोनों बच्चों का कहना है कि वे इस विद्या को इस हद तक करना चाहते हैं कि एक दिन पूरे विश्व में भारत की एक अलग पहचान बनें। वंशिका और दक्ष राजस्थान में बांदीकुई के विधायक, कई गांवों, विधायक कंवर सिंह व सीताराम, ज्ञान बूस्टर स्कूल में व अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर नारनौल व अटेली में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर इनाम पा चुके हैं।
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छठी कक्षा की छात्रा वंशिका और उसका छोटा भाई तीसरी कक्षा का छात्र दक्ष निरंतर अभ्यास के बल पर वो ऐसा कर पाने में सफल हुए हैं। उनकी इसी कला से प्रभावित होकर उनके स्कूल प्रबंधन ने दोनों की फीस भी आधी कर दी है।
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पिता मनोज शर्मा ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले बच्चों के स्कूल में ब्रेन मैपर झुंझुनूं निवासी अक्षय पारीक आए थे और उनकी कला को देखकर वे इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने दोनों बच्चों को उनके पास ये हुनर सीखने के लिए भेज दिया। दोनों ही बच्चों ने झुंझुनूं व सरदारशहर, चुरू में रहकर करीब 45 दिन प्रशिक्षण प्राप्त किया।
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इस प्रशिक्षण के दौरान बच्चों ने ब्रेन मैपिंग, दाएं व बाएं मस्तिष्क को कंट्रोल करना, ब्रेन योग, त्राटक विधि व आध्यात्मिक साधना आदि सीखा और घर आने के बाद निरंतर अभ्यास जारी रखा। उन्होंने वहां रहते हुए मानव शरीर के सातों चक्र मूलाधार चक्र, स्वाधिष्टान, सोलर प्लेक्स, हार्ट चक्र, विशुद्धि चक्र, अजना व क्राउन चक्र के जागरण की विधि भी सीखीं।
विश्व में अलग पहचान बनाना चाहते हैं दोनों भाई-बहन
वंशिका और दक्ष आंखों पर पट्टी बांधकर साइकिल चलाने, किताब पढ़ने, सड़क पर चलती गाड़ियों की पहचान करने, रुबिक क्यूब सॉल्व करने, पेंटिंग करने और सुई में धागा डालने में माहिर हो चुके हैं। दोनों बच्चों का कहना है कि वे इस विद्या को इस हद तक करना चाहते हैं कि एक दिन पूरे विश्व में भारत की एक अलग पहचान बनें। वंशिका और दक्ष राजस्थान में बांदीकुई के विधायक, कई गांवों, विधायक कंवर सिंह व सीताराम, ज्ञान बूस्टर स्कूल में व अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर नारनौल व अटेली में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर इनाम पा चुके हैं।