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Mahendragarh-Narnaul News: आज मां के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की होगी पूजा

Sat, 29 Mar 2025 11:13 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Sat, 29 Mar 2025 11:13 PM IST
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Today the first form of mother Shailputri will be worshipped
फोटो संख्या:54- मार्बल पत्थर की मूर्ति तैयार करता दुकानदार हरिसिंह​--संवाद
महेंद्रगढ़। चैत्र नवरात्र के लिए बाजार सजकर तैयार हो चुका है। बाजारों में मां नव दुर्गा की मूर्तियां भी दुकानों पर सज गई हैं। इस बार श्रद्धालुओं को मार्बल पत्थर व स्टोन पेंटिंग से बनी माता की मूर्तियां खूब पसंद आ रही है। नवरात्र के लिए श्रद्धालु दिनभर खरीदारी में जुटे रहे। इस बार रविवार से शुरू होने वाले चैत्र नवरात्र छह अप्रैल तक चलेंगे।
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दुकानदार हरिसिंह, दीपक, छाजूराम, ओमप्रकाश, अनिल ने बताया कि बाजारों में मार्बल पत्थर की मूर्ति 100 रुपये से पांच हजार रुपये तक तथा स्टोन पेंटिंग मूर्ति 20 रुपये से लेकर चार हजार रुपये तक आ रही है। मार्बल पत्थर से बनी आधा फीट से सवा दो फीट तक की मूर्तियां श्रद्धालुओं को खूब भा रही हैं। मार्बल पत्थर की मूर्ति जयपुर से तथा स्टोन पेंटिंग मूर्ति गुजरात से मंगवाई जाती हैं। नवरात्र में प्रतिदिन 5 से 10 मार्बल की मूर्ति बिक जाती है। बाजार में चुनरी भी कई वैरायटी में है। नवरात्रों के दौरान हर घर, मंदिर में मां दुर्गा की पूजा की जाती है, इसके पूजन के लिए लाल चुनरिया, नारियल, धूप, दीप, पंच मेवा-मिश्री के साथ-साथ अन्य सामग्री का प्रयोग किया जाता है।
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जीव-जंतुओं की रक्षक भी हैं मां शैलपुत्री
नवरात्र के इन दिनों में माता के अलग-अलग स्वरूप की पूजा अर्चना की जाएंगी। मां दुर्गा पहला रूप मां शैलपुत्री का है, इसलिए आज प्रथम नवरात्र को कलश स्थापना कर के माता शैलपुत्री की विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है। ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज गढ़ी ने बताया कि मां शैलपुत्री का जन्म पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में हुआ, इसलिए इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। शैल का अर्थ होता है हिमालय। इनका वाहन वृषभ (बैल) है, इसलिए इनका एक नाम वृषभारूढ़ा भी है। इनका स्वभा बेहद शांत और सरल है। मां ने अपने दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण किया है। कठिन तपस्या करने वाली मां शैलपुत्री वन में रहने वाले जीव-जंतुओं की रक्षक भी हैं।
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