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महेंद्रगढ़ में भारत बंद का कहीं कोई असर नहीं
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कनीना में खुला बाजार
- फोटो : Narnol
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कनीना/महेंद्रगढ़। कृषि विधेयकों को लेकर बुलाए गए भारत बंद का महेंद्रगढ़ जिले में कहीं असर नहीं दिखा। यहां महेंद्रगढ़, कनीना, सतनाली सहित अन्य शहरों के बाजार सामान्य तौर पर खुले रहे। कोई किसान संगठन विरोध दर्ज कराने के लिए नहीं आया। पुलिस बल को सुबह से ही सतर्क किया गया था।
कनीना और आसपास क्षेत्र में कृषि बिलों के खिलाफ भारत बंद के ऐलान का कनीना क्षेत्र में कोई असर नजर नहीं आया। न कोई किसान और न कोई दल या ट्रेड यूनियन इस मामले को लेकर आगे आया। आम दिनों की तरह काम चलता रहा, सभी कार्यालय खुले रहे। कार्यालय में उपस्थिति भी सामान्य रही। न कोई ट्रेड यूनियन सामने आई। महेंद्रगढ़, सतनाली, कनीना बस स्टैंड से रोडवेज की बसें प्रतिदिन की तरह चलती रही । नगर पालिका कर्मचारी कचरा उठाते देखे गए। विभिन्न स्कूलों में और बैंकों में भी काम या आम दिनों की तरह चलता रहा। काफी लोगों को यही नहीं पता कि कोई बंद का आह्वान भी किया गया है। बंद को लेकर यद्यपि प्रशासन सतर्क रहा। किसी ट्रेड यूनियन किसान नेता ने आकर बयानबाजी तक भी नहीं की। दुकानें आम दिनों की तरह खुली रहीं, कार्य भी पहले की भांति चलता रहा।
दरअसल महेंद्रगढ़ जिला हरियाणा का आखिरी जिला है। यहां के अधिकतर लोग हरियाणा की बजाए राजस्थान से अधिक प्रभावित होते हैं। यहां कोई मजबूत किसान संगठन नहीं है। भारतीय किसान यूनियन की विंग भी यहां पर नहीं है। सूखे वाले इस क्षेत्र में किसान संगठनों के नाम पर भी पूरी तरह से सूखा है। इससे पहले हुए किसान आंदोलनों में भी इस जिले की भूमिका नगण्य रही है। किसान आंदोलनों के नाम पर यहां मंडियाली आंदोलन हुआ था। जिसमें किसानों ने बिजली बिल का विरोध किया था। यह आंदोलन भी पूरे जिले की बजाए सतनाली क्षेत्र के कुछ गांवों तक ही सीमित था।
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कनीना और आसपास क्षेत्र में कृषि बिलों के खिलाफ भारत बंद के ऐलान का कनीना क्षेत्र में कोई असर नजर नहीं आया। न कोई किसान और न कोई दल या ट्रेड यूनियन इस मामले को लेकर आगे आया। आम दिनों की तरह काम चलता रहा, सभी कार्यालय खुले रहे। कार्यालय में उपस्थिति भी सामान्य रही। न कोई ट्रेड यूनियन सामने आई। महेंद्रगढ़, सतनाली, कनीना बस स्टैंड से रोडवेज की बसें प्रतिदिन की तरह चलती रही । नगर पालिका कर्मचारी कचरा उठाते देखे गए। विभिन्न स्कूलों में और बैंकों में भी काम या आम दिनों की तरह चलता रहा। काफी लोगों को यही नहीं पता कि कोई बंद का आह्वान भी किया गया है। बंद को लेकर यद्यपि प्रशासन सतर्क रहा। किसी ट्रेड यूनियन किसान नेता ने आकर बयानबाजी तक भी नहीं की। दुकानें आम दिनों की तरह खुली रहीं, कार्य भी पहले की भांति चलता रहा।
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दरअसल महेंद्रगढ़ जिला हरियाणा का आखिरी जिला है। यहां के अधिकतर लोग हरियाणा की बजाए राजस्थान से अधिक प्रभावित होते हैं। यहां कोई मजबूत किसान संगठन नहीं है। भारतीय किसान यूनियन की विंग भी यहां पर नहीं है। सूखे वाले इस क्षेत्र में किसान संगठनों के नाम पर भी पूरी तरह से सूखा है। इससे पहले हुए किसान आंदोलनों में भी इस जिले की भूमिका नगण्य रही है। किसान आंदोलनों के नाम पर यहां मंडियाली आंदोलन हुआ था। जिसमें किसानों ने बिजली बिल का विरोध किया था। यह आंदोलन भी पूरे जिले की बजाए सतनाली क्षेत्र के कुछ गांवों तक ही सीमित था।
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