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नारनौल-महेंद्रगढ़- आकोदा स्टेट हाईवे पर सरकार की अप्रूवल के बाद टेंडर नहीं हो रहे अलॉट
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नारनौल-महेंद्रगढ़-आकोदा ओल्ड स्टेट हाईवे 148 बी की सरकार से स्वीकृति के बाद भी अलॉट नहीं हो पाए। अब चुनाव को लेकर पेंच फंस गया है। आचार संहिता लगने की वजह से टेंडर अलॉट नहीं किए गए हैं। चुनाव के बाद ही टेंडर अलॉट होने की संभावना है।
वर्षों से जर्जर पड़े रोड की वजह से वाहन चालक बहुत परेशान हो रहे हैं। इस रोड बनाने के लिए दो साल का समय दिया जाएगा। रिवासा के पास बने रेलवे ओवर ब्रिज के बगल में दूसरा ओवर ब्रिज बनाया जाएगा तथा नारनौल बाइपास के पास दो अंडर पास भी बनाए जाएंगे। सरकार की ओर से 298 करोड़ रुपये से हाईवे बनाया जाएगा।
बता दें कि नारनौल-महेंद्रगढ़-चरखी दादरी रोड को अंतिम बार 2002-03 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी ओमप्रकाश चौटाला ने ही बनवाया था। इसके बाद दस वर्ष कांग्रेस तथा साढ़े सात वर्षों से सूबे में भाजपा का राज है। अभी तक यह रोड बन नहीं पाई है। हरियाणा स्टेट रोड एंड ब्रिज डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एचएसआरडीसी) ने 6 जून को तकनीकी रूप से टेंडर खोले थे जिसमें दो एजेंसियां आई थीं। इसके बाद विभाग ने मंजूरी के लिए प्रदेश सरकार को भेज दिया था। दो तीन महीने से उपरोक्त विभाग के एमडी नहीं थे। एमडी की स्वीकृत मिले हुए भी डेढ़ महीने का समय हो गया। ऊपर से स्वीकृति भी आ गई लेकिन अब आचार संहिता की वजह से टेंडर अलॉट नहीं हो पा रहे हैं। हालांकि लगभग पेड़ों की कटाई पूरी हो चुकी है। वर्तमान में नारनौल-महेंद्रगढ़ स्टेट हाईवे जर्जर हो गई है। कई स्थानों पर गड्ढे बनने से वाहन चालकों में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। नांगल सिरोही के पास तो सड़क की हालत काफी दयनीय है।
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दो वर्ष पहले हुआ था रोड डिनोटिफाई
बता दें कि एनएएचआई ने जून 2020 में नारनौल से चरखी दादरी रोड को डिनोटिफाई कर दिया था। डिनोटिफाई होने के बाद प्रदेश सरकार द्वारा रोड बनाया जाना था। इस रोड का नाम ओल्ड स्टेट हाईवे 148बी दिया गया। सरकार ने इस रोड को बनाने के लिए एजेंसी तलाश करने में एक वर्ष से अधिक समय लगा दिया। एक वर्ष बाद 2021 में एचएसआरडीसी को रोड बनाने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश जारी किए। सरकार की ओर से 298 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली थी।
लगभग एक वर्ष बीता, टेंडर प्रक्रिया नहीं निकल पाए बाहर
रोड के निर्माण के लिए एचएसआरडीसी ने 16 नवंबर 2021 को पहली बार टेंडर लगाया था जो 4 जनवरी को खोला गया था। मात्र एक कंपनी ने टेंडर लगाया था जिससे उसी दिन टेंडर रिकॉल कर दिया गया। 28 जनवरी 2022 को दूसरी बार टेंडर खोला गया। इसके बाद फरवरी अंत तक तकनीकी मंजूरी भी आ गई थी और वित्तीय बीड भी खुल चुकी थी। टेंडर अलॉट होना बाकी था। सरकार पहले इसे हैम योजना के तहत बनवा रही थी। इसका रेट ज्यादा होने की वजह से टेंडर रद्द कर दिया गया था। बाद में एक बार फिर टेंडर लगाया गया जो 6 जून को तकनीकी रूप से खोला गया था और सरकार को मंजूरी के लिए पत्र भेजा गया था।
स्टेट हाईवे से जुड़ते हैं 16 जिले
स्टेट हाईवे से प्रदेश के 16 जिले जुड़ते हैं। इससे जुड़े जिलों में दादरी, भिवानी, रोहतक, झज्जर, हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, जींद, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, पानीपत, सोनीपत व कैथल शामिल है। इसके अलावा राजस्थान के कोठपुतली से पंजाब, चंडीगढ़ व हिमाचल को भी यही हाईवे जोड़ता है।
हमने अपना काम पूरा किया हुआ है। आचार संहिता की वजह से टेंडर अलॉट नहीं हो पाए हैं। चुनाव आयोग को भी हमने रोड बनाने की स्वीकृति के लिए लिखा हुआ है। संभवत: अब टेंडर चुनाव के बाद ही अलॉट किए जाएंगे। टेंडर अलॉट होने के बाद एक सप्ताह के अंदर ही काम शुरू करवा दिया जाएगा।
- सोमबीर दहिया, एक्सईएन, एचएसआरडीसी।
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वर्षों से जर्जर पड़े रोड की वजह से वाहन चालक बहुत परेशान हो रहे हैं। इस रोड बनाने के लिए दो साल का समय दिया जाएगा। रिवासा के पास बने रेलवे ओवर ब्रिज के बगल में दूसरा ओवर ब्रिज बनाया जाएगा तथा नारनौल बाइपास के पास दो अंडर पास भी बनाए जाएंगे। सरकार की ओर से 298 करोड़ रुपये से हाईवे बनाया जाएगा।
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बता दें कि नारनौल-महेंद्रगढ़-चरखी दादरी रोड को अंतिम बार 2002-03 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी ओमप्रकाश चौटाला ने ही बनवाया था। इसके बाद दस वर्ष कांग्रेस तथा साढ़े सात वर्षों से सूबे में भाजपा का राज है। अभी तक यह रोड बन नहीं पाई है। हरियाणा स्टेट रोड एंड ब्रिज डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एचएसआरडीसी) ने 6 जून को तकनीकी रूप से टेंडर खोले थे जिसमें दो एजेंसियां आई थीं। इसके बाद विभाग ने मंजूरी के लिए प्रदेश सरकार को भेज दिया था। दो तीन महीने से उपरोक्त विभाग के एमडी नहीं थे। एमडी की स्वीकृत मिले हुए भी डेढ़ महीने का समय हो गया। ऊपर से स्वीकृति भी आ गई लेकिन अब आचार संहिता की वजह से टेंडर अलॉट नहीं हो पा रहे हैं। हालांकि लगभग पेड़ों की कटाई पूरी हो चुकी है। वर्तमान में नारनौल-महेंद्रगढ़ स्टेट हाईवे जर्जर हो गई है। कई स्थानों पर गड्ढे बनने से वाहन चालकों में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। नांगल सिरोही के पास तो सड़क की हालत काफी दयनीय है।
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दो वर्ष पहले हुआ था रोड डिनोटिफाई
बता दें कि एनएएचआई ने जून 2020 में नारनौल से चरखी दादरी रोड को डिनोटिफाई कर दिया था। डिनोटिफाई होने के बाद प्रदेश सरकार द्वारा रोड बनाया जाना था। इस रोड का नाम ओल्ड स्टेट हाईवे 148बी दिया गया। सरकार ने इस रोड को बनाने के लिए एजेंसी तलाश करने में एक वर्ष से अधिक समय लगा दिया। एक वर्ष बाद 2021 में एचएसआरडीसी को रोड बनाने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश जारी किए। सरकार की ओर से 298 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली थी।
लगभग एक वर्ष बीता, टेंडर प्रक्रिया नहीं निकल पाए बाहर
रोड के निर्माण के लिए एचएसआरडीसी ने 16 नवंबर 2021 को पहली बार टेंडर लगाया था जो 4 जनवरी को खोला गया था। मात्र एक कंपनी ने टेंडर लगाया था जिससे उसी दिन टेंडर रिकॉल कर दिया गया। 28 जनवरी 2022 को दूसरी बार टेंडर खोला गया। इसके बाद फरवरी अंत तक तकनीकी मंजूरी भी आ गई थी और वित्तीय बीड भी खुल चुकी थी। टेंडर अलॉट होना बाकी था। सरकार पहले इसे हैम योजना के तहत बनवा रही थी। इसका रेट ज्यादा होने की वजह से टेंडर रद्द कर दिया गया था। बाद में एक बार फिर टेंडर लगाया गया जो 6 जून को तकनीकी रूप से खोला गया था और सरकार को मंजूरी के लिए पत्र भेजा गया था।
स्टेट हाईवे से जुड़ते हैं 16 जिले
स्टेट हाईवे से प्रदेश के 16 जिले जुड़ते हैं। इससे जुड़े जिलों में दादरी, भिवानी, रोहतक, झज्जर, हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, जींद, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, पानीपत, सोनीपत व कैथल शामिल है। इसके अलावा राजस्थान के कोठपुतली से पंजाब, चंडीगढ़ व हिमाचल को भी यही हाईवे जोड़ता है।
हमने अपना काम पूरा किया हुआ है। आचार संहिता की वजह से टेंडर अलॉट नहीं हो पाए हैं। चुनाव आयोग को भी हमने रोड बनाने की स्वीकृति के लिए लिखा हुआ है। संभवत: अब टेंडर चुनाव के बाद ही अलॉट किए जाएंगे। टेंडर अलॉट होने के बाद एक सप्ताह के अंदर ही काम शुरू करवा दिया जाएगा।
- सोमबीर दहिया, एक्सईएन, एचएसआरडीसी।