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हरियाणावासी चैन से नहीं बैठेंगे, अपने हिस्से का पानी लेकर रहेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Nov 2016 12:03 AM IST
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एसवाईएल का पानी हरियाणा के लिए जीवन-मरण का सवाल है। सतलुज-यमुना लिंक नहर से प्रदेश के हिस्से का पानी लेकर रहेंगे। अब हरियाणावासी चैन से नहीं बैठेंगे। उक्त बात पूर्व विधायक रघु यादव ने यादव सभा महेंद्रगढ़ में कही। रघु यादव ने 1987 में चौ. देवीलाल सरकार के शासनकाल के दौरान नहरी पानी के मुद्दे को लेकर अपने विधायक पद से त्यागपत्र देकर जनता के बीच कूद कर जल नायक के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। इसी मुद्दे को लेकर यादव एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। और रविवार को एसवाईएल के पानी के मामले को लेकर अपने समर्थकों को जागरूक करने महेंद्रगढ़ पहुंचे।
966 में हुआ था पानी का बंटवारा
यादव ने कहा कि 1966 में जब पंजाब और हरियाणा अलग-अलग राज्य के रूप में स्थापित हुण् तो उसी समय सतलुज-यमुना के पानी का भी बंटवारा कर दिया गया था मगर आज तक हरियाणा को पंजाब से उसके हिस्से का पानी नहीं मिला। इस लंबी अवधि के दौरान हरियाणा में कई सरकारें बनी और विभिन्न पार्टियों का राज रहा मगर एक साजिश के तहत हरियाणा में उपलब्ध नहरी पानी का हिस्सा दक्षिणी हरियाणा के किसानों को नहीं दिया गया। उन्होंने कहा 1976-77 में सतलुज-यमुना से 1.8 मिलियन एकड़ पानी हरियाणा को दिया गया मगर इस पानी में से दक्षिणी हरियाणा को एक बूंद भी नहीं दी गई। उसका नतीजा यह निकला कि हरियाणा के जींद, हिसार और सिरसा में नहरी पानी अधिक होने के कारण सेम की समस्या बनी हुई है जबकि दक्षिणी हरियाणा की भूमि पानी की एक-एक बूंद को तरस रही है।
बाक्स:
पानी के अभाव में किसान ले रहे हैं नलकूपों का सहारा
उन्होंने कहा कि एसवाईएल का पानी न मिलने के कारण दक्षिणी हरियाणा के युवक आज बेरोजगार सड़कों पर घूम रहे हैं। किसान परेशान हैं मगर राजनैतिक दल अपनी रोटियां सेक रहे हैं। उन्होंने कहा कि नहरी पानी के अभाव में दक्षिणी हरियाणा राज्य के अन्य हिस्सों से काफी पिछड़ गया । यहां के किसानों ने लंबे समय से नलकूपों का सहरा लेकर अपने को जीवित रखा मगर अब भूमिगत जल स्तरय् काफी गहराई में चले जाने के कारण किसानों का यह सहारा भी जवाब दे गया। उन्होंने कहा कि यदि अब भी एसवाईएल का पानी नहीं मिला तो यहां के किसान बर्बाद हो जीायेंगे और बेरोजगारों की संख्या बढ़ जायेगी। इस मुद्दे को लेकर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से यादव फिर से सक्रिय हो गये हैं। इसी के तहत उन्होंने आज अपने कार्यकर्ताओं से विचार विर्मश किया।
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केंद्र सरकार दिलाए हरियाणा को उसके हिस्से का पानी
उन्होंने कहा कि अब हरियाणा को अपने हिस्से का पानी प्राप्त करने के लिए सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ है। अब चूंकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस मामले को लेकर हरियाणा के हक में आ चुका है और इसे लागू करवाना केन्द्र सरकार का दायित्व है। उन्होंने कहा कि हरियाणा और केन्द्र में भाजपा की सरकारें हैं और पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन की सरकार है। ऐसी स्थिति में भी अब हरियाणा को उसके हिस्से का पानी नहीं मिलता है तो अकालियों की नीयत में खोट समझा जायेगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में सतलुज-यमुना के पानी के कारण लाखों एकड़ भूमि दल-दल का रूप ले चुकी है जबकि हरियाणा की भूमि पानी को तरस रही है।
यादव ने केंद्र और प्रदेश सरकार से मांग की कि हरियाणा में उपलब्ध नहरी पानी का समान बंटवारा किया जाये और एसवाईएल का निर्माण इसी वर्ष 31 दिसंबर से पूर्व कराया जाए। इनसे पूर्व के वक्ताओं ने आशंका जाहिर की कि बिना कुर्बानी के पंजाब हरियाणा को उसके हिस्से का पानी नहीं देगा। इसके लिए प्रदेश के लोगों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस मौके पर श्रीचंद यादव, राजेन्द्र सिंह, बलबीर शर्मा, सज्जन यादव आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।
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966 में हुआ था पानी का बंटवारा
यादव ने कहा कि 1966 में जब पंजाब और हरियाणा अलग-अलग राज्य के रूप में स्थापित हुण् तो उसी समय सतलुज-यमुना के पानी का भी बंटवारा कर दिया गया था मगर आज तक हरियाणा को पंजाब से उसके हिस्से का पानी नहीं मिला। इस लंबी अवधि के दौरान हरियाणा में कई सरकारें बनी और विभिन्न पार्टियों का राज रहा मगर एक साजिश के तहत हरियाणा में उपलब्ध नहरी पानी का हिस्सा दक्षिणी हरियाणा के किसानों को नहीं दिया गया। उन्होंने कहा 1976-77 में सतलुज-यमुना से 1.8 मिलियन एकड़ पानी हरियाणा को दिया गया मगर इस पानी में से दक्षिणी हरियाणा को एक बूंद भी नहीं दी गई। उसका नतीजा यह निकला कि हरियाणा के जींद, हिसार और सिरसा में नहरी पानी अधिक होने के कारण सेम की समस्या बनी हुई है जबकि दक्षिणी हरियाणा की भूमि पानी की एक-एक बूंद को तरस रही है।
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पानी के अभाव में किसान ले रहे हैं नलकूपों का सहारा
उन्होंने कहा कि एसवाईएल का पानी न मिलने के कारण दक्षिणी हरियाणा के युवक आज बेरोजगार सड़कों पर घूम रहे हैं। किसान परेशान हैं मगर राजनैतिक दल अपनी रोटियां सेक रहे हैं। उन्होंने कहा कि नहरी पानी के अभाव में दक्षिणी हरियाणा राज्य के अन्य हिस्सों से काफी पिछड़ गया । यहां के किसानों ने लंबे समय से नलकूपों का सहरा लेकर अपने को जीवित रखा मगर अब भूमिगत जल स्तरय् काफी गहराई में चले जाने के कारण किसानों का यह सहारा भी जवाब दे गया। उन्होंने कहा कि यदि अब भी एसवाईएल का पानी नहीं मिला तो यहां के किसान बर्बाद हो जीायेंगे और बेरोजगारों की संख्या बढ़ जायेगी। इस मुद्दे को लेकर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से यादव फिर से सक्रिय हो गये हैं। इसी के तहत उन्होंने आज अपने कार्यकर्ताओं से विचार विर्मश किया।
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केंद्र सरकार दिलाए हरियाणा को उसके हिस्से का पानी
उन्होंने कहा कि अब हरियाणा को अपने हिस्से का पानी प्राप्त करने के लिए सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ है। अब चूंकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस मामले को लेकर हरियाणा के हक में आ चुका है और इसे लागू करवाना केन्द्र सरकार का दायित्व है। उन्होंने कहा कि हरियाणा और केन्द्र में भाजपा की सरकारें हैं और पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन की सरकार है। ऐसी स्थिति में भी अब हरियाणा को उसके हिस्से का पानी नहीं मिलता है तो अकालियों की नीयत में खोट समझा जायेगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में सतलुज-यमुना के पानी के कारण लाखों एकड़ भूमि दल-दल का रूप ले चुकी है जबकि हरियाणा की भूमि पानी को तरस रही है।
यादव ने केंद्र और प्रदेश सरकार से मांग की कि हरियाणा में उपलब्ध नहरी पानी का समान बंटवारा किया जाये और एसवाईएल का निर्माण इसी वर्ष 31 दिसंबर से पूर्व कराया जाए। इनसे पूर्व के वक्ताओं ने आशंका जाहिर की कि बिना कुर्बानी के पंजाब हरियाणा को उसके हिस्से का पानी नहीं देगा। इसके लिए प्रदेश के लोगों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस मौके पर श्रीचंद यादव, राजेन्द्र सिंह, बलबीर शर्मा, सज्जन यादव आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।