फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   protest,soldiar

दवा न मिलने पर पूर्व सैनिकों ने ईसीएच गेट पर की नारेबाजी

Fri, 02 Aug 2019 12:03 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 02 Aug 2019 12:03 AM IST
विज्ञापन
protest,soldiar
फोटो संख्या:46- भूतपूर्व सैनिक अस्पताल में दवाई न मिलने से रोष प्रकट करते हुए भूतपूर्व सैनिक - फोटो : Narnol
दवाइयां न मिलने पर पूर्व सैनिकों ने ईसीएच परिसर में प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उन्होंने अपना गुस्सा जाहिर किया। पूर्व सैनिकों ने कहा कि पिछले तीन महीने से उन्हें दवाइयां नहीं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द व्यवस्था को नहीं सुधारा गया तो ईसीएच पर ताला लगा देंगे।
विज्ञापन

ईसीएच (एक्स सर्विसमैन हेल्थ सेंटर) में दवाइयां नहीं मिलने पर पूर्व सैनिकों ने विरोध जताया। पूर्व सैनिकों ने कहा कि पिछले तीन महीने से दवाइयों के लिए वे लगातार चक्कर लगा रहे हैं। पूर्व सैनिकों को दस प्रतिशत दवाइयां भी नहीं मिल रही। चिकित्सक दवाइयां लिख देते हैं और भूतपूर्व सैनिकों को बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं। जिसके पैसे उनको अपनी जेब से देने पड़ते हैं। दवा के बिल पास करने के नाम पर दर्जनों शर्तें लगा दी जाती हैं। यहां दवाइयां उपलब्ध न होने पर वे रेवाड़ी जाते हैं तो वहां के चिकित्सक उनको महेंद्रगढ़ भेज देते हैं। बुजुर्ग हो चुके पूर्व सैनिकों को यहां-वहां चक्कर लगवाए जा रहे हैं। उन्हें दवाइयों के लिए धक्के खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। दवाइयां कब आएंगी यह भी कोई नहीं बता रहा। पूर्व सैनिकों ने कहा कि हमने देश की सीमाओं पर अपनी जवानी गुजारी और देश की रक्षा के लिए गोलियां खाई हैं। राजस्थान की भंयकर गर्मी, लद्दाख की हाड़ कंपा देने वाली सर्दी में ड्यूूटी पर अपने शरीर के अंगों को खराब कर लिया। अब हमें दवाइयों के लिए अपनी ही पेंशन खर्च करनी पड़ रही है।
विज्ञापन

चार महीने से चक्कर लगा रहा हूं। किसी पूर्व सैनिक को पूरी दवाइयां नहीं मिल रही। सैनिकों को धक्के खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। अधिकारी कह रहे हैं कि हमारे पास बजट नहीं आया।
विज्ञापन
विज्ञापन

- पूर्व कैप्टन जयप्रकाश, महेंद्रगढ़।
डॉक्टर दस तरह की दवाई लिखता है तो यहां केवल एक या दो मिलती है। 90 प्रतिशत दवा बाहर से खरीदनी पड़ रही है। बाहर से दवाइयां खरीदने पर उनके बिल पास नहीं किए जा रहे। दवाइयों पर हर महीने हजारों का खर्च हो रहा है।
-घनश्याम, धनौंदा।
कई बार आ चुका हूं। हर बार यही कहते कि दवा नहीं आई है। कभी कहते हैं कि बजट नहीं आया है। देश के लिए अपनी जान दांव पर लगाने वाले सैनिकों को इस तरह से उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है।
-सुंदर सिंह, महेंद्रगढ़।
मैं हाट का पेशेंट हूं। बड़ी मुुश्किल से यहां पहुंच पाता हूं। जब दवाई लेने जाएं तो मना कर देते हैं। हमें बुढ़ापे में परेेेशान किया जा रहा है। इस तरह से पूर्व सैनिकों की बेकद्री की जा रही है। पूर्व सैनिकों का सम्मान होना चाहिए।
-भगवान सिंह, महेंद्रगढ़।
अपने सुसर को दवा दिलाने के लिए आई थी। यहां दवाइयों तो मिली नहीं। अब दवाइयों के लिए मेडिकल स्टोर पर जा रहे हैं। दवाइयों के लिए चक्कर लगाते रहते हैं। इतनी गर्मी में लाइन में लगाने के बाद दवा खत्म बता रहे हैं।
-निशा, महेंद्रगढ़।
ईसीएच में रोजाना सैकडों की संख्या में पूर्व सैनिक आते हैं। यहां एक एंबुलेंस तक की सुविधा नहीं है। किसी बुजुर्ग पूर्व सैनिक की तबीयत बिगड़ने पर उसे बड़े अस्पताल में भेजने के लिए एंबुलेंस होना बेहद जरूरी है।
राजपाल सिंह, महेंद्रगढ़।
दो महीने से दवा के लिए चक्कर लगा रहा हूं। दवा देने के नाम पर कुुछ नहीं है। हर बार किराया के 100 रुपये खर्च होते हैं। छह दवाई लिखी थी, एक भी दवा नहीं मिल पा रही। बिल भुगतान के नाम पर दर्जनों शर्त थोप दी जाती है।

ओमप्रकाश, डिगरोता।
हमें हर महीने एक लाख रुपये का बजट आता है। यह पैसा खत्म होने पर दोबारा से बजट मांगते हैं। अभी बजट नहीं मिल पा रहा। दवाइयों की कमी के बारे में अधिकारियों को कई बार लिख चुके हैं। यह मामला लोकसभा तक उठ चुका है। एक महीने में दवा की समस्या का समाधान होने की उम्मीद है।
-आरके यादव, प्रभारी, ईसीएच महेंद्रगढ़।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed