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बिना शुल्क छात्राओं को शिक्षा दे रहे प्रो. विनोद
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महेंद्रगढ़। शिक्षा की लौ को जलाए रखने के लिए सेवानिवृत्ति के दो साल बाद भी एसोसिएट प्रो. विनोद यादव छात्राओं को बिना किसी शुल्क के शिक्षा दे रहे हैं। रेेवाड़ी जिला के गांव मूसेपुर निवासी प्रो. विनोद यादव जो एक माह पूर्व जब पता चला की राजकीय महिला महाविद्यालय की रसायन शास्त्र की छात्राओं के प्राध्यापकों के अभाव में पढ़ाई में बाधा आ रही है। छात्राओं की पढ़ाई बाधित न हो इसके लिए रेवाड़ी से प्रतिदिन 110 किलोमीटर की यात्रा कर छात्राओं की पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रखी। रसायन विज्ञान के सह आचार्य विनोद यादव सितंबर 2020 में विभिन्न महाविद्यालयों में अपनी सेवाएं देने के उपरांत दो वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हुए थे। रसायन शास्त्र की छात्राओं को कोई भी स्थाई और अस्थाई फैकल्टी नहीं मिलने के कारण उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है। तब प्रो. विनोद यादव अपने आप को नहीं रोक सके तथा बिना किसी प्रलोभन, मानदेय या विभागीय आदेशों की परवाह किए रेवाड़ी से प्रतिदिन 110 किलोमीटर की यात्रा करके महेंद्रगढ़ में छात्राओं पढ़ने के लिए आते हैं।
महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. संजय ने बताया कि महाविद्यालय की छात्राओं के बार-बार आग्रह करने पर भी कोई स्थाई या अस्थाई समाधान नहीं हो पा रहा था। एक माह पूर्व प्रो. विनोद यादव से अनुरोध किया था। प्रो. विनोद यादव ने बताया कि जब तक छात्राओं का पाठ्यक्रम पूरा नहीं होगा तब वो छात्राओं को पढ़ाते रहेंगे। प्रो. विनोद यादव ने बताया कि महेंद्रगढ़ से उनका पुराना लगाव रहा है। 1989 से 2015 तक राजकीय महाविद्यालय महेंद्रगढ़ में अपनी सेवाएं दी हैं। एक गुरु होने के नाते उनका कर्तव्य है कि जहां पर भी जरूरत हो वो अपने ज्ञान को अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं में बांटते रहें। गुरु के अभाव में किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा अधूरी न रहे यही उनका लक्ष्य है।
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महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. संजय ने बताया कि महाविद्यालय की छात्राओं के बार-बार आग्रह करने पर भी कोई स्थाई या अस्थाई समाधान नहीं हो पा रहा था। एक माह पूर्व प्रो. विनोद यादव से अनुरोध किया था। प्रो. विनोद यादव ने बताया कि जब तक छात्राओं का पाठ्यक्रम पूरा नहीं होगा तब वो छात्राओं को पढ़ाते रहेंगे। प्रो. विनोद यादव ने बताया कि महेंद्रगढ़ से उनका पुराना लगाव रहा है। 1989 से 2015 तक राजकीय महाविद्यालय महेंद्रगढ़ में अपनी सेवाएं दी हैं। एक गुरु होने के नाते उनका कर्तव्य है कि जहां पर भी जरूरत हो वो अपने ज्ञान को अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं में बांटते रहें। गुरु के अभाव में किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा अधूरी न रहे यही उनका लक्ष्य है।
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