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नियम 134ए के तहत दाखिला नहीं मिलने पर डीसी से मिलने पहुंचे अभिभावक और बच्चे
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नियम 134 ए के तहत दाखिला नहीं मिलनेपर उपायुक्त से मिलते पहुंचे बच्चें और उनके परिजन। संवाद
- फोटो : Narnol
शिक्षा अधिनियम 134ए के तहत पात्र अनेक विद्यार्थियों को दाखिले के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। कुछ निजी स्कूल संचालकों की मनमानी के कारण विद्यार्थियों को आज तक दाखिला नहीं मिल पाया है। जबकि अभिभावक अपने बच्चों के दाखिले को लेकर कभी शिक्षा विभाग के पास तो कभी प्रशासनिक अधिकारियों के यहां अपनी फरियाद लगा रहे हैं।
सोमवार को भी अभिभावक अपने बच्चों को लेकर उपायुक्त अजय कुमार से मिले। लेकिन उनसे भी सिर्फ आश्वासन मिला है। जिससे अभिभावकों में अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है, क्योंकि वे पुराने स्कूलों से अपने बच्चों की स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट लेकर आ चुके हैं। कुछ निजी स्कूल अपने यहां इन बच्चों को दाखिल देने से स्पष्ट मना कर रहे हैं। वहीं सरकार ने कोरोना महामारी के चलते सभी शिक्षण संस्थानों को 12 जनवरी तक बंद करने का आदेश जारी किया है। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो गई है।
बता दें कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को निजी स्कूलों को निशुल्क पढ़ाई के लिए सरकार ने शिक्षा अधिनियम 134ए बनाया है। जिसके तहत हर वर्ष ऐसे बच्चों को परीक्षा के आधार पर निजी स्कूलों में निशुल्क दाखिला दिया जाता है। इस वर्ष जिले में 1113 के करीब विद्यार्थियों ने परीक्षा उत्तीर्ण की है। जिन्हें मेरिट के आधार पर विभाग द्वारा उनके पसंद के स्कूल अलाट किए गए हैं। कुछ निजी स्कूलों ने बिना कोई तर्क के अनेक विद्यार्थियों को अपने स्कूलों में दाखिला दे दिया है, मगर 3-4 प्रमुख निजी स्कूलों ने सैकड़ों के करीब विद्यार्थियों को अपने यहां दाखिला देने से मना कर दिया है। उक्त स्कूल संचालकों को तर्क है उन्हें सरकार की तरफ पिछले वर्ष के बच्चों की पढ़ाई के बकाया पैसे अभी तक नहीं दिया है।
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कुछ निजी स्कूूल संचालकों द्वारा दाखिला नहीं देने के चलते अभिभावक बच्चों के साथ कभी शिक्षा विभाग तो कभी उपायुक्त कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन उनको सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, जिससे अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है।
इस मामले को लेकर कार्रवाई कर रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी ने आज जिन स्कूल संचालकों के नाम सामने आ रहे हैं, उनको बुलाया है। नियम 134 ए के तहत जिले में 1200 बच्चे थे, जिनमें 1050 के दाखिले हो चुके हैं। बचे हुए बच्चों का भी दाखिला करवा देंगे। अजय कुमार, उपायुक्त
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सोमवार को भी अभिभावक अपने बच्चों को लेकर उपायुक्त अजय कुमार से मिले। लेकिन उनसे भी सिर्फ आश्वासन मिला है। जिससे अभिभावकों में अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है, क्योंकि वे पुराने स्कूलों से अपने बच्चों की स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट लेकर आ चुके हैं। कुछ निजी स्कूल अपने यहां इन बच्चों को दाखिल देने से स्पष्ट मना कर रहे हैं। वहीं सरकार ने कोरोना महामारी के चलते सभी शिक्षण संस्थानों को 12 जनवरी तक बंद करने का आदेश जारी किया है। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो गई है।
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बता दें कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को निजी स्कूलों को निशुल्क पढ़ाई के लिए सरकार ने शिक्षा अधिनियम 134ए बनाया है। जिसके तहत हर वर्ष ऐसे बच्चों को परीक्षा के आधार पर निजी स्कूलों में निशुल्क दाखिला दिया जाता है। इस वर्ष जिले में 1113 के करीब विद्यार्थियों ने परीक्षा उत्तीर्ण की है। जिन्हें मेरिट के आधार पर विभाग द्वारा उनके पसंद के स्कूल अलाट किए गए हैं। कुछ निजी स्कूलों ने बिना कोई तर्क के अनेक विद्यार्थियों को अपने स्कूलों में दाखिला दे दिया है, मगर 3-4 प्रमुख निजी स्कूलों ने सैकड़ों के करीब विद्यार्थियों को अपने यहां दाखिला देने से मना कर दिया है। उक्त स्कूल संचालकों को तर्क है उन्हें सरकार की तरफ पिछले वर्ष के बच्चों की पढ़ाई के बकाया पैसे अभी तक नहीं दिया है।
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कुछ निजी स्कूूल संचालकों द्वारा दाखिला नहीं देने के चलते अभिभावक बच्चों के साथ कभी शिक्षा विभाग तो कभी उपायुक्त कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन उनको सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, जिससे अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है।
इस मामले को लेकर कार्रवाई कर रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी ने आज जिन स्कूल संचालकों के नाम सामने आ रहे हैं, उनको बुलाया है। नियम 134 ए के तहत जिले में 1200 बच्चे थे, जिनमें 1050 के दाखिले हो चुके हैं। बचे हुए बच्चों का भी दाखिला करवा देंगे। अजय कुमार, उपायुक्त