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‘समय और समाज से जुड़ा साहित्य ही रहता है जीवित’

Sat, 21 May 2022 11:21 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 21 May 2022 11:21 PM IST
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'Only literature related to time and society remains alive'
नारनौल। समय और समाज से जुड़ा साहित्य ही जीवित रहता है। समाज और साहित्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अत: साहित्य में सामाजिक सरोकारों की अभिव्यक्ति आवश्यक है। यह बातें वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामनिवास मानव ने कही।
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डॉ. सत्या होप टॉक, काशी (उत्तर प्रदेश) संस्था द्वारा आयोजित साहित्य-सम्मान कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आत्मबल और आत्म संघर्ष द्वारा विपरीत परिस्थितियों पर विजय पाकर प्रतिमान स्थापित करने वाला साहित्यकार ही समाज के लिए आदर्श बन सकता है। कुंठित और देश, काल तथा समाज से कटे हुए साहित्यकार से प्रेरणादायी साहित्य-सृजन की उम्मीद नहीं की जा सकती। एक घंटे के इस वर्चुअल कार्यक्रम में डॉ. मानव का साक्षात्कार और काव्य-पाठ प्रसारित किया गया।
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संस्था की उपाध्यक्ष डॉ. मधु प्रसाद द्वारा प्रस्तुत सरस्वती-वंदना के उपरांत संस्था के अध्यक्ष डॉ. सत्यप्रकाश पांडे के कुशल संचालन में संपन्न हुए इस कार्यक्रम में डॉ. मानव ने अपने जीवन, साहित्य, साहित्य की प्रेरणा और रचना-प्रक्रिया पर काव्य-पाठ भी किया। उनके द्वारा प्रस्तुत दोहों द्विपदियों, त्रिपदियों तथा हाइकु और तांका कविताओं को भरपूर सराहना मिली। डॉ. मधु प्रसाद ने कहा कि उनका जीवन और साहित्य दोनों हम सबके लिए प्रेरणादायक हैं। इस अवसर पर संस्था द्वारा डॉ. मानव को सृजन-शिरोमणि उपाधि तथा महामना मानस-संतति सम्मान-2022 भी प्रदान किया गया।
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