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जिले के कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी परिवहन की व्यवस्था नहीं होने से लोग परेशान

Mon, 01 Aug 2016 12:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 01 Aug 2016 12:09 AM IST
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haryana roadways - फोटो : अमर उजाला
 परिवहन की चरमराई व्यवस्था के कारण जिले के लोगों को कस्बों तक पहुंचने में संघर्ष का सामना करना पड़ता है। एनसीआर में शामिल होने के बावजूद जिले की परिवहन व्यवस्था बेहाल है। वर्तमान में जिले के कई रूटों पर सरकारी परिवहन की व्यवस्था नहीं होने से निजी वाहन चालक चांदी कूट रहे हैं। इस कारण महिलाओं, छात्राओं और बुजुर्गों को सर्वाधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। एक कस्बे से दूसरे कस्बे तक जाने के लिए भी लोगों को लंबे रूट से होकर जाना पड़ता है। अधिकारी इस बारे में घाटे का सौदा बताकर रोडवेज की बसें नहीं चलाने की बात कहते हैं। इस कारण लोगों को कई बार मिलों का सफर पैदल की तय करना पड़ता है।   
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लोगाें का कहना है कि महेंद्रगढ़ के साथ सौतेला व्यवहार किया गया है। यही कारण है कि आज भी जिले के लोग परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।  जिले के अनेक ऐसे रूट हैं, जहां पर वर्षों से परिवहन सेवा नहीं है। ऐसे में यहां के लोग या तो प्राइवेट वाहनों का सहारा लेते हैं या फिर कोई भी वाहन न मिलने पर पैदल ही मिलों की यात्रा तय कर लेते हैं। हालात यह है कि इन रूटों पर बसें चलाने के लिए न तो आज तक किसी नेता ने आवाज उठाई है और न ही अधिकारियों ने इस तरफ ध्यान दिया है। हालांकि कई बार इन रूटों पर रहने वाले लोग, विद्यार्थी रोडवेज अधिकारियों से मिल चुके हैं, मगर उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
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- कब-कब मिली डिपो को बस
रिकार्ड के अनुसार फिलहाल नारनौल डिपो में 138 बसें ऑन रोड हैं, मगर इन 138 बसों में से भी हकीकत में करीब 125 से भी कम बसें ही चल रही हैं। नारनौल डिपो को मिलने वाली बसों के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो सिर्फ 2011 को छोड़कर अन्य वर्षों में डिपो को नाम मात्र ही बसे मिली हैं। आंकड़ों के अनुसार 2012 में 10 बसें मिली, 2011 में 45 बसें मिली, 2010 में आठ बसें मिली, 2009 में 24 बसें मिली, 2008 में नौ बसें मिली, 2007 और 2006 में मात्र 2-2 बसें ही डिपो को मिल पाई थी।
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- 150 बसों का नहीं हुआ परिचालन
नारनौल रोडवेज डिपो की स्थापना से लेकर अब तक कभी भी 150 बसों का परिचालन एक साथ नहीं हुआ। इनमें से भी अनेक बसें ब्रेक डाउन होने के कारण कार्यशाला में खड़ी रहती हैं। जहां क्षेत्र की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है, वहीं बसों का बेड़ लगातार सिमटता जा रहा है। क्षेत्र की आबादी को देखकर वर्तमान बसें क्षेत्र की आबादी के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। आबादी के अनुरूप वर्तमान में करीब 200 बसों की आवश्यकता है।

स्थापना के बाद से नहीं बढ़ी बसों की संख्या
नारनौल डिपो की स्थापना 1997 में हुई थी। उस समय डिपो के पास 125 बसे थीं, अब बसों की संख्या 138 है। इसमें से करीब 100 से 125 बसें ही रूट पर चल रही  हैं। रोजाना 10-12 बसे रिपेयरिंग के लिए कार्यशाला में खड़ी रहती हैं। क्षेत्र की बढ़ती आबादी मद्देनजर नारनौल डिपो को करीब 200 सौ बसों की आवश्यकता है।

इन रूटों पर है सबसे ज्यादा समस्या
नारनौल : -
नारनौल से भूषण शोभापुर
नारनौल- रामबास
नारनौल-डोहर मोहनपुर
नारनौल-चिंडालिया
नारनौल से नांगल काठा
नारनौल से कुलताजपुर

अटेली:-
अटेली-महेंद्रगढ़
अटेली-सिहमा
अटेली-नावदी रामपुरा
अटेली से नांगल राजपुरा
अटेली-गोकलपुर, हसनपुर व बोचडिय़ा

नांगल चौधरी:-
नांगल चौधरी-निजामपुर
नांगल चौधरी-बहरोड़
नांगल चौधरी-भेडंटी
नांगल चौधरी-धोलेड़ा
नांगल चौधरी-कारोता कमानियां

कस्बा से कस्बा नहीं रहा जुड़
ग्रामीण रूट ही नहीं बसों के अभाव में कस्बे से कस्बा जैसे अटेली से महेंद्रगढ़, नांगल चौधरी से बहरोड़ और नांगल चौधरी से निजामपुर कस्बे के लोगों के लिए भी रोडवेज की सुविधाएं नहीं हैं।

यह कहते हैं लोग
रोडवेज बसों की सेवाएं नहीं होने के कारण उनको प्राइवेट वाहनों में सफर करना पड़ता है। इससे उनको काफी परेशानी होती है। - आरती


बसों के अभाव में उनको अपनी जान जोखिम में डालकर प्राइवेट वाहनों में यात्रा  करनी पड़ती है। प्रशासन उनकी मांग की तरफ ध्यान ही नहीं दे रहा। - विक्रम  पांचनौता

ग्रामीण रूटों पर बसों के अभाव में भारी परेशानी होती है। कई बार प्राइवेट वाहन भी नहीं मिलते। इस कारण उन्हें पैदल ही अपना रास्ता तय करना होता है। - सुरेंद्र कुमार


ग्रामीण रूटों पर रोडवेज की बसें नहीं चलने के कारण उनको भारी परेशानी हो रही है। बसों के अभाव में प्राइवेट वाहन चालक मनमाने पैसे ले रहे हैं। इससे उनको आर्थिक नुकसान हो  रहा है। - शिव कुमार


जिन ग्रामीण रूटों पर रोडवेज की बस घाटे में जा रही थी, उन पर बसें बंद की गई हैं। अनेक रूटों पर रोडवेज को काफी घाटा हो रहा है। जहां जरूरत होगी वहां बस चला दी जाएगी। -सुरेंद्र यादव, जीएम, हरियाणा रोडवेज नारनौल डिपो
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