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जेल वार्डन रिश्वत मामलाः शिकायतकर्ता ने कहा, छोटी दिवाली पर जेल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट को दिए थे पांच लाख रुपये
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जेल वार्डन रिश्वत मामले में शनिवार को न्यायाधीश के समक्ष शिकायतकर्ता हंसराज के बयान दर्ज किए गए। इस मामले में जेल वार्डन अनिल कुमार का नाम आने के बाद मामला और गरमा गया है। वहीं जेल के डिप्टी सुपरिंटेंडेेंट अभी पुलिस गिरफ्त से बाहर है। जबकि मुख्य आरोपी राजन एवं गजे सिंह को रविवार को दो दिन के रिमांड के बाद कोर्ट में पेश किया जाएगा।
शिकायतकर्ता हंसराज ने बताया कि वह अधिकारियों को दो महीने में छह लाख रुपये दे चुका है। उसने बताया कि दिवाली से एक सप्ताह पहले उसके भाई का जेल एसटीडी से उसके पास फोन आया था। उसने फोन पर बताया था कि डिप्टी सुपरिंटेंडेंट पांच लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। उसके फोन के तीन-चार दिन बाद 3 नवंबर यानी छोटी दिवाली को वह पांच लाख रुपये और एक मिठाई का डिब्बा लेकर गया था। उसने पैसे जेल डिप्टी सुपरिंटेंडेंट कुलदीप हुड्डा को दिए थे। अब कुछ दिन पहले फिर एक लाख रुपये के लिए फोन आया था। बार-बार रुपये मांगने से वह परेशान हो गया था। जेल के अधिकारियों को रिश्वत देने के चक्कर में उसने डेढ़ किल्ला जमीन भी बेच दी। परेशान होकर उसने पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी थी।
गेट पर ही मिल जाता था आदमी
हंसराज ने बताया कि एसटीडी से उसका भाई फोन करता या फिर उनके नजदीकी गांव के युवक भी जेल में हैं, उनके परिजन मिलने जाते तो उनके हाथ संदेश भेज देता था। उसे समय बता दिया जाता था और उसे उसी समय पैसे लेकर पहुंचना पड़ता था। बाहर गेट पर एक कर्मचारी आकर ले जाता था।
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शिकायतकर्ता हंसराज ने बताया कि वह अधिकारियों को दो महीने में छह लाख रुपये दे चुका है। उसने बताया कि दिवाली से एक सप्ताह पहले उसके भाई का जेल एसटीडी से उसके पास फोन आया था। उसने फोन पर बताया था कि डिप्टी सुपरिंटेंडेंट पांच लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। उसके फोन के तीन-चार दिन बाद 3 नवंबर यानी छोटी दिवाली को वह पांच लाख रुपये और एक मिठाई का डिब्बा लेकर गया था। उसने पैसे जेल डिप्टी सुपरिंटेंडेंट कुलदीप हुड्डा को दिए थे। अब कुछ दिन पहले फिर एक लाख रुपये के लिए फोन आया था। बार-बार रुपये मांगने से वह परेशान हो गया था। जेल के अधिकारियों को रिश्वत देने के चक्कर में उसने डेढ़ किल्ला जमीन भी बेच दी। परेशान होकर उसने पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी थी।
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गेट पर ही मिल जाता था आदमी
हंसराज ने बताया कि एसटीडी से उसका भाई फोन करता या फिर उनके नजदीकी गांव के युवक भी जेल में हैं, उनके परिजन मिलने जाते तो उनके हाथ संदेश भेज देता था। उसे समय बता दिया जाता था और उसे उसी समय पैसे लेकर पहुंचना पड़ता था। बाहर गेट पर एक कर्मचारी आकर ले जाता था।
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