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दादी के प्यार ने बचाया पुष्पेंद का जीवन
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कई बार आपस का प्यार एक दूसरे के जीवन का सहारा बना जाता है। ऐसा ही गांव दुबलाना में सोमवार को देखने को मिला। दादी के प्यार ने पांच वर्षीय पोते पुष्पेंद का जीवन बचा लिया। पुष्पेंद अपनी बूढ़ी मां (दादी) से बहुत प्यार करता है और वह उसके बिना एक पल भी नहीं रह सकता। सोमवार को उसकी दादी जहां पर बेटा रामसेवक चिनाई का काम कर रहा था, वहीं पर समय व्यतीत करने जा रही थी। उसको जाते देखकर पुष्पेंद बोला दादी, मैं भी तेरे साथ चलूंगा। दादी ने मना भी किया लेकिन उसको रोता देखकर वह उसे छोड़ नहीं पाई और अपने साथ ले गई। पीछे पुष्पेंद की मां सावित्री देवी, बहन उर्मिला, भाई मयंक व नीरज की टैंक में डूबने मौत हो गई। अगर उस समय वह घर पर रह जाता तो उनको बचाने के चक्कर में उसकी भी पानी में डूबने से मौत हो सकती थी। राम सेवक ने बताया कि उसका बड़ा बेटा पुष्पेंद अपनी दादी से बहुत प्यार करता है और उसके बिना वह एक मिनट भी नहीं रह सकता।
रामसेवक पांच भाइयों में सबसे बड़ा
रामसेवक पांच भाइयों में सबसे बड़ा है। लगभग 13 से 14 वर्ष की उम्र में माता-पिता ने उसकी शादी कर दी थी। शादी के कुछ महीनों बाद उसके पिता का बीमारी से देहांत हो गया। घर में बड़ा होने की वजह सारी जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई थी। बाद में उसने मेहनत कर अपने भाइयों की शादी की। अब सभी भाई अलग रह रहे थे।
ढाई महीने पहले आए थे गांव से
रामसेवक ने बताया कि ढाई महीने पहले वह, उसका परिवार एवं छोटे भाई का परिवार दुबलाना गांव में आए थे। इस दौरान वह अपनी मां को भी साथ लेकर आया था क्योंकि दोनों पति पत्नी काम पर जाते हैं। पीछे से मां बच्चों को घर पर रख सके। दोनों परिवारों ने गांव में एक ही मकान ले लिया। एक कमरे में उसका भाई का परिवार तथा दूसरे में उसका परिवार रहता था। भाई और उसकी पत्नी भी काम पर जाते है। उनके अभी कोई संतान नहीं है।
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रामसेवक पांच भाइयों में सबसे बड़ा
रामसेवक पांच भाइयों में सबसे बड़ा है। लगभग 13 से 14 वर्ष की उम्र में माता-पिता ने उसकी शादी कर दी थी। शादी के कुछ महीनों बाद उसके पिता का बीमारी से देहांत हो गया। घर में बड़ा होने की वजह सारी जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई थी। बाद में उसने मेहनत कर अपने भाइयों की शादी की। अब सभी भाई अलग रह रहे थे।
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ढाई महीने पहले आए थे गांव से
रामसेवक ने बताया कि ढाई महीने पहले वह, उसका परिवार एवं छोटे भाई का परिवार दुबलाना गांव में आए थे। इस दौरान वह अपनी मां को भी साथ लेकर आया था क्योंकि दोनों पति पत्नी काम पर जाते हैं। पीछे से मां बच्चों को घर पर रख सके। दोनों परिवारों ने गांव में एक ही मकान ले लिया। एक कमरे में उसका भाई का परिवार तथा दूसरे में उसका परिवार रहता था। भाई और उसकी पत्नी भी काम पर जाते है। उनके अभी कोई संतान नहीं है।
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