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Mahendragarh-Narnaul News: तालाबों से जलपात्र तक, प्रकृति बचाने की अनूठी मुहिम
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फोटो नंबर-06पशु-पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए संस्था द्वारा बनाए गए पात्र। स्रोत: संस्था
नारनौल। गर्मी में पानी की तलाश में भटकते पक्षियों और बेसहारा पशुओं के लिए चलाया जा रहा जलधारा अभियान मानव संवेदनशीलता का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा है। प्रगतिशील शिक्षक ट्रस्ट के सहयोग से डॉ. संजय शर्मा, नरोत्तम सोनी, दिनेश शर्मा और सुभाष सिंगला की टीम ने इस अभियान की शुरुआत कर जीव-जंतुओं और पक्षियों के संरक्षण की दिशा में सराहनीय प्रयास किए हैं।
शहर और आसपास के क्षेत्रों में मिट्टी, लोहे और सीमेंट के जलपात्र लगाए गए हैं ताकि गर्मी में पक्षियों और बेसहारा पशुओं को आसानी से पानी मिल सके। इसके साथ ही दाना पात्रों की व्यवस्था भी की गई है जिससे पक्षियों के भोजन की चिंता दूर हो सके।
ट्रस्ट सदस्य डॉ. जितेंद्र, भीमसेन, ओशीन, प्रेमलता और राकेश समय-समय पर जलपात्रों में पानी और दाना भरते हैं व लोगों को भी इस नेक कार्य से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। अभियान का सकारात्मक प्रभाव अब दिखाई देने लगा है।
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कई स्थानों पर गौरैया, कबूतर और अन्य पक्षियों की आवाजाही फिर से बढ़ी है, वहीं गाय, सांड, कुत्ते और अन्य पशु भी इन जलपात्रों से अपनी प्यास बुझाते नजर आ रहे हैं।
डॉ. संजय शर्मा ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण केवल बड़े सरकारी प्रोजेक्टों से संभव नहीं है, बल्कि छोटी-छोटी मानवीय संवेदनाएं भी बड़ा बदलाव ला सकती हैं। उन्होंने लोगों से अपने घरों के बाहर पानी और दाने की व्यवस्था करने की अपील की। विश्व जैव विविधता दिवस के अवसर पर यह अभियान समाज को यह संदेश दे रहा है कि प्रकृति की रक्षा केवल भाषणों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे कार्यों से होती है।
वहीं दूसरी ओर शहर के ऐतिहासिक छोटा-बड़ा तालाब जो लंबे समय से गंदगी और उपेक्षा का शिकार थे, उन्हें स्वच्छ बनाने का बीड़ा स्लम एरिया टेलेंट टीम की बेटियों रीना, सोनाली, सीनू, जानवी, खु्शबू और सानिया ने उठाया। टीम ने श्रमदान कर तालाबों की सफाई की और समाज को जल स्रोतों के संरक्षण का संदेश दिया।
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शहर और आसपास के क्षेत्रों में मिट्टी, लोहे और सीमेंट के जलपात्र लगाए गए हैं ताकि गर्मी में पक्षियों और बेसहारा पशुओं को आसानी से पानी मिल सके। इसके साथ ही दाना पात्रों की व्यवस्था भी की गई है जिससे पक्षियों के भोजन की चिंता दूर हो सके।
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ट्रस्ट सदस्य डॉ. जितेंद्र, भीमसेन, ओशीन, प्रेमलता और राकेश समय-समय पर जलपात्रों में पानी और दाना भरते हैं व लोगों को भी इस नेक कार्य से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। अभियान का सकारात्मक प्रभाव अब दिखाई देने लगा है।
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कई स्थानों पर गौरैया, कबूतर और अन्य पक्षियों की आवाजाही फिर से बढ़ी है, वहीं गाय, सांड, कुत्ते और अन्य पशु भी इन जलपात्रों से अपनी प्यास बुझाते नजर आ रहे हैं।
डॉ. संजय शर्मा ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण केवल बड़े सरकारी प्रोजेक्टों से संभव नहीं है, बल्कि छोटी-छोटी मानवीय संवेदनाएं भी बड़ा बदलाव ला सकती हैं। उन्होंने लोगों से अपने घरों के बाहर पानी और दाने की व्यवस्था करने की अपील की। विश्व जैव विविधता दिवस के अवसर पर यह अभियान समाज को यह संदेश दे रहा है कि प्रकृति की रक्षा केवल भाषणों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे कार्यों से होती है।
वहीं दूसरी ओर शहर के ऐतिहासिक छोटा-बड़ा तालाब जो लंबे समय से गंदगी और उपेक्षा का शिकार थे, उन्हें स्वच्छ बनाने का बीड़ा स्लम एरिया टेलेंट टीम की बेटियों रीना, सोनाली, सीनू, जानवी, खु्शबू और सानिया ने उठाया। टीम ने श्रमदान कर तालाबों की सफाई की और समाज को जल स्रोतों के संरक्षण का संदेश दिया।