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Mahendragarh-Narnaul News: शिक्षा केवल ज्ञान ही नहीं बल्कि जागरूकता एवं महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम

Tue, 27 Dec 2022 11:51 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 27 Dec 2022 11:51 PM IST
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Education is not only knowledge but the biggest medium of awareness and women empowerment
महेंद्रगढ़। अमर उजाला फाउंडेशन के तत्वावधान में महेंद्रगढ़ कार्यालय में अपराजित के तहत महिला शिक्षा कितनी जरूरी विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी हुई 15 महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रवक्ता राजबाला कौशिक प्रवक्ता रावमावि पाथेड़ा, वरिष्ठ महिला अधिवक्ता रेखा यादव व डॉ. पिंकी जांगड़ा एमओ नागरिक अस्पताल महेंद्रगढ़ व शशी यादव उपस्थित हुई। विभिन्न वर्गों से जुड़ी महिलाओं ने कहा कि शिक्षा वह माध्यम है जिसके सहारे महिला उत्थान, महिला सशक्तीरण सहित हर दृष्टि से महिलाओं को अव्वल बनाया जा सकता है। महिलाओं ने कहा कि वर्तमान में शिक्षा के माध्यम से धीरे-धीरे समाज में जागरूकता आ रही है। शिक्षा केवल ज्ञान नहीं बल्कि जागरूकता का सशक्त माध्यम है। वहीं सभ्य एवं सशक्त नारी समाज के लिए शिक्षा सबसे जरूरी है। महिलाएं जागरूक होकर ठोस निर्णय लेकर ही आगे बढ़ सकती हैं। विभिन्न वर्गों की महिलाओं ने विचार गोष्ठी के दौरान खुलकर अपने विचार रखे।
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एक शिक्षित महिला ही अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर ठोस निर्णय ले सकती है। अगर महिलाओं को आगे बढ़ना है तो शिक्षा सबसे सक्षम माध्यम है। शिक्षा के माध्यम से ही हर उद्देश्य की पूर्ति की जा सकती है।
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-रिचा गर्ग, हस्तशिल्पकार।
महिला उत्थान के लिए शिक्षा सबसे जरूरी है। जब तक महिलाएं शिक्षित नहीं होंगी तब तक उत्थान भी संभव नहीं है। शिक्षित महिला ही अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकती है। अभिभावक अपनी बेटियों को शिक्षित बनाने के साथ-साथ संस्कारों एवं अधिकारों के प्रति जागरूक भी करें।
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-पूनम यादव, अधिवक्ता।
अब समाज में धीरे-धीरे जागरूकता आ रही है जिससे बेटियों को भी उनके अधिकार मिल रहे हैं। बेटियों ने भी समय-समय पर अपनी प्रतिभा के दम पर जिले से लेकर प्रदेश व देश का गौरव बढ़ाया है। शिक्षा के माध्यम से आजादी की राहें आसान होंगी।
-डॉ. पारूल, बीएएमएस।
शिक्षित महिलाएं ही एक सभ्य समाज का निर्माण कर सकती हैं। महिला शिक्षा को जितना अधिक बढ़ावा मिलेगा उतना ही समाज मजबूत होगा। शिक्षा के दम पर ही आजादी, आर्थिक संपन्नता, सशक्तीकरण संभव है। हर महिला शिक्षित होगी तो समाज भी सभ्य होगा।
-पिंकी यादव, निदेशक, बीएमडी ग्रुप।
समाज के हर वर्ग को आगे बढ़ाने में महिलाओं की भूमिका सबसे अह्म होती है। इसलिए महिलाओं का शिक्षित होना सबसे जरूरी है। इसी के सहारे हर बाधा को दूर किया जा सकता है। महिला जितनी शिक्षित होगी उतना ही समाज का विकास होगा।
-डॉ. पिंकी जांगड़ा, एमओ, नागरिक अस्पताल, महेंद्रगढ़।
शिक्षा से ही आत्मनिर्भरता, सशक्तीकरण, समाज निर्माण, भावी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य की मंजिल संभव है। एक शिक्षित महिला ही राष्ट्र की भावी पीढ़ी के निर्माण में सराहनीय योगदान दे सकती है। इसलिए शिक्षित होना सबसे बड़ी जरूरत है।
-राजबाला कौशिक, प्रवक्ता, रावमावि, पाथेड़ा।
भावी पीढ़ी को सही राह दिखाने के लिए महिलाओं को ठोस निर्णय लेने होंगे। महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं को ही मुख्य भूमिका निभानी होगी। साथ ही पुरूष समाज को भी महिला सशक्तीकरण के लिए आगे आना होगा।
-शशी यादव, सेवानिवृत्त, मुख्य अध्यापिका।
एक सभ्य समाज के निर्माण के लिए महिलाओं का शिक्षित होना जरूरी है। नारी जितनी शिक्षित होगी देश उतना ही तरक्की करेगा। एक शिक्षित नारी ही समाज के हर वर्ग को ऊपर उठा सकती है। महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक होना पड़ेगा।
-एकता सैनी, उद्यमी।
समाज की प्रत्येक महिला को जागरूक होना पड़ेगा। कोई भी अभिभावक अपनी बेटियों को शिक्षा के अधिकार से वंचित न रखे। बल्कि बेटियों को शिक्षा के साथ-साथ आजादी भी दें ताकि वह अपने निर्णय ले सकें।
-मिनाक्षी, अध्यापिका।
प्रत्येक अभिभावक को जागरूक होना पड़ेगा। अपनी बेटियों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार देने होंगे। बेटियां को बचपन से ही आत्मरक्षा के गुर देकर हर परिस्थिति के लिए तैयार करें। जागरूक अभिभावक ही भावी पीढ़ी को सशक्त एवं सक्षम बना सकते हैं।
-बबली यादव, अधिवक्ता।
महिला शिक्षा एक ऐसा शब्द है जो व्यक्तिगत विकास, समाज व देश के विकास, भावी पीढ़ी के विकास की हर कसौटी पर खरा उतरता है। अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी ताकत को पहचानकर ठोस निर्णय लेने होंगे।
-अनिता कुमारी, सुपरवाइजर, महिला एवं बाल विकास विभाग।
एक शिक्षित, जागरूक एवं स्वस्थ महिला की देश की असली पूंजी है। यह महिला हर वर्ग के राष्ट्र के विकास एवं उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। महिलाओं को स्वयं ही अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए।
-सुमन, मुख्य अध्यापिका, रामावि, सीगड़ा।
पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को निर्णय लेने की आजादी कम ही मिलती है। लेकिन महिलाएं जो भी निर्णय लेती हैं वह उसे हर हाल में सही साबित करती हैं। आज के आधुनिक युग में महिलाएं भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं।

-शशीबाला, अधिवक्ता।
एक सभ्य समाज के लिए महिलाओं को निर्णय लेने की आजादी देनी होगी। वहीं महिलाओं को भी अपनी जिम्मेदारी एवं अधिकारों के प्रति जागरूक रहकर हर वर्ग के उत्थान में भूमिका निभाकर अपनी निर्णय क्षमता को सही साबित करना होगा।
-रेखा यादव, वरिष्ठ महिला अधिकवक्ता।
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