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चिटफंड कंपनी के निवेशकों और एजेंटों ने जमा पैसा वापस दिलवाने की मांग को लेकर उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन
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लघु सचिवालय में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपते पीएसीएल चिटफंड के निवेशक व एजेंट।
- फोटो : Narnol
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पीएसीएल चिटफंड के निवेशकों व एजेंटों ने कंपनी के रवैये से आहत होकर अपना जमा पैसा वापस दिलाने की मांग को लेकर लघु सचिवालय में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर गुहार लगाई है।
जिला उपायुक्त को सौंपे ज्ञापन में मांग की है कि कंपनी के सर्वेसर्वा जमा पैसा देने में आनाकानी कर रहे हैं और उनके बांड को सेबी की लिस्ट में शामिल करने में भी अड़चन डाली जा रही है। निवेशकों ने आरोप लगाया है कि एक भाजपा नेता ने उन्हें प्रेरित कर कंपनी में पैसा जमा कराने को कहा था। निवेशकों कहना है कि अब वही नेता उनकी व्यथा तक सुनने को तैयार नहीं है। यदि उनकी समस्या का निदान नहीं किया गया तो तमाम निवेशक और एजेंट अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठने को विवश होंगे।
उन्होंने उपायुक्त से गुहार लगाई की कंपनी में जमा उनकी पूंजी को वापस दिलाने में मदद की जाए। कंपनी से संबंध रखने वाले भाजपा के सह-प्रवक्ता सत्यव्रत शास्त्री उन्हें निवेश के लिए प्रेरित करते हुए आश्वत किया था कि कंपनी उनकी जमा पूंजी पर अच्छा ब्याज देकर पैसों को वापस करेगी। अब कंपनी डूब गई और सुप्रीम कोर्ट में कंपनी का मामला विचाराधीन है। सेबी से कंपनी से सभी निवेशकों के बांड सेबी की साईट पर दर्ज कराने को कहा है। फिर भी कंपनी में जड़े जमाए बैठे लोग बांड को सेबी की लिस्ट में शामिल करने से आनाकानी कर रहें हैं। उक्त मामले में भाजपा नेता की भूमिका संदिग्ध है। निवेशकों व एजेंटों ने मांग की है कि सरकार निवेशकों के हालात पर तरस खाते हुए तमाम पहलुओं की जांच करे और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही के साथ ही निवेशकों को उनके जमा पैसे वापिस दिलाने की दिशा में आवश्यक पहल की जाए।
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भाजपा के सह-प्रवक्ता सत्यव्रत शास्त्री ने कहा कि उन पर आरोप लगाने वाले उनके राजनैतिक शत्रु हैं। राजनीति में साजिश होना आम बात हो गई है और इस मामले में भी यही स्थिति है। सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के मुताबिक ही रिटायर्ड जज आरएम लोढ़ा को जांच समिति का अध्यक्ष नियुक्त कर सेबी से जुड़े समूचे प्रकरण की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश अदालत ने जारी किए थे। गत 30 जुलाई को जस्टिस ने अपनी जांच रिपोर्ट पेश की है। आशा है कि जल्द ही लोगों की जमा पूंजी वापस मिल जाएगी।
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जिला उपायुक्त को सौंपे ज्ञापन में मांग की है कि कंपनी के सर्वेसर्वा जमा पैसा देने में आनाकानी कर रहे हैं और उनके बांड को सेबी की लिस्ट में शामिल करने में भी अड़चन डाली जा रही है। निवेशकों ने आरोप लगाया है कि एक भाजपा नेता ने उन्हें प्रेरित कर कंपनी में पैसा जमा कराने को कहा था। निवेशकों कहना है कि अब वही नेता उनकी व्यथा तक सुनने को तैयार नहीं है। यदि उनकी समस्या का निदान नहीं किया गया तो तमाम निवेशक और एजेंट अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठने को विवश होंगे।
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उन्होंने उपायुक्त से गुहार लगाई की कंपनी में जमा उनकी पूंजी को वापस दिलाने में मदद की जाए। कंपनी से संबंध रखने वाले भाजपा के सह-प्रवक्ता सत्यव्रत शास्त्री उन्हें निवेश के लिए प्रेरित करते हुए आश्वत किया था कि कंपनी उनकी जमा पूंजी पर अच्छा ब्याज देकर पैसों को वापस करेगी। अब कंपनी डूब गई और सुप्रीम कोर्ट में कंपनी का मामला विचाराधीन है। सेबी से कंपनी से सभी निवेशकों के बांड सेबी की साईट पर दर्ज कराने को कहा है। फिर भी कंपनी में जड़े जमाए बैठे लोग बांड को सेबी की लिस्ट में शामिल करने से आनाकानी कर रहें हैं। उक्त मामले में भाजपा नेता की भूमिका संदिग्ध है। निवेशकों व एजेंटों ने मांग की है कि सरकार निवेशकों के हालात पर तरस खाते हुए तमाम पहलुओं की जांच करे और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही के साथ ही निवेशकों को उनके जमा पैसे वापिस दिलाने की दिशा में आवश्यक पहल की जाए।
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भाजपा के सह-प्रवक्ता सत्यव्रत शास्त्री ने कहा कि उन पर आरोप लगाने वाले उनके राजनैतिक शत्रु हैं। राजनीति में साजिश होना आम बात हो गई है और इस मामले में भी यही स्थिति है। सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के मुताबिक ही रिटायर्ड जज आरएम लोढ़ा को जांच समिति का अध्यक्ष नियुक्त कर सेबी से जुड़े समूचे प्रकरण की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश अदालत ने जारी किए थे। गत 30 जुलाई को जस्टिस ने अपनी जांच रिपोर्ट पेश की है। आशा है कि जल्द ही लोगों की जमा पूंजी वापस मिल जाएगी।