{"_id":"586e8eb94f1c1b1c7e15ae81","slug":"cashless-system-efected-market-card-swap","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैश पर कैशलेस सिस्टम होने लगा प्रभावी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैश पर कैशलेस सिस्टम होने लगा प्रभावी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 05 Jan 2017 11:51 PM IST
विज्ञापन
कैशलेस हुआ बाजार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोटबंदी के बाद शहर में अब कैशलेस ट्रांजेक्शन बढ़ता जा रहा है। रेहड़ी और छोटे दुकानों को छोड़कर नगर की 25 प्रतिशत दुकानें कैशलेस हो चुकी हैं। बाजार में 50 प्रतिशत लोग कैशलेस ट्रांजेक्शन कर रहे हैं। बैंकों में भी नेट बैंकिंग की हर रोज 60 से 70 अप्लीकेशन आ रही हैं जबकि बहुत से जागरूक लोग स्वयं ही नेट बैंकिंग एप डाउन लोड कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त बैंकों में स्वैप मशीनें, एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड की मांग भी बढ़ रही है। दुकानों द्वारा अप्लाई की गई स्वैप मशीनें नहीं लगने पर परेशानी हो रही है। इस कारण लोग पे-टीएम का सहारा ले रहे हैं या फिर दूसरे दुकानदार से कार्ड स्वैप करवा रहे हैं। कैशलेस ट्रांजेक्शन और 500 के नोट बाजार में आने से स्थिति सुधरी है। अब 90 प्रतिशत बाजार सामान्य हो गया है। अब छोटे दुकानदारों का काम भी पटरी पर लौट आया है।
बैंक में नेट बैंकिंग की बढ़ी डिमांड
शहर में करीब सरकारी और निजी बैंकों की मिलाकर 17 शाखाएं हैं। हर रोज एक शाखा में औसत 3 से 5 उपभोक्ता नेट बैंकिंग के लिए आवेदन कर रहे हैं। यानी सभी बैंकों में हर रोज 60 से 70 उपभोक्ताओं की नेट बैंकिंग की अप्लीकेशन आ रही है। इसके अलावा क्रेडिट कार्ड, एटीएम कार्ड और चेक बुक की डिमांड उपभोक्ता कर रहे हैं।
45 प्रतिशत उपभोक्ता कर रहे हैं कैशलेस ट्रांजेक्शन
नोटबंदी के बाद क्षेत्र के लोगों में जागरूकता आई है। अब यहां के 45 प्रतिशत उपभोक्ता कैशलेस ट्रांजेक्शन कर रहे हैं। नोट बंदी से पूर्व शहर में एक भी दुकान पर पे-टीएम से लेनदेन नहीं होता था जबकि मुश्किल से 10 दुकानों पर स्वैप मशीनें लगी थीं। स्वैप मशीन और पे-टीएम से लेनदेन की लोगों को जानकारी ही नहीं थी। स्वैप मशीन से महीने में कोई एक या दो ग्राहक की लेनदेन करता था। नोट बंदी के बाद स्वैप मशीनों की मांग बढ़ती जा रही है। इसके अलावा दुकानों ने पे-टीएम और क्रेडिट कार्ड से भी लेनदेन शुरू किया है। कुल मिलाकर नोट बंदी के बाद महेंद्रगढ़ क्षेत्र कैशलेस में जागरूक हुआ है।
विज्ञापन
स्वैप मशीनें लेने में आ रही हैं दिक्कतें
उपभोक्ताओं को स्वैप मशीनें लगवाने में बड़ी परेशानी हो रही है। उन्हें कई प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ रहा है। 20 वर्षों से इनकम टैक्स पे करने वालों और आईटीआर रिटर्न करने वालों को भी स्वैप मशीनें नहीं मिल रही हैं। उपभोक्ताओं से सैल टैक्स नंबर, टीन नंबर और पैन नंबर भी मांगे जा रहे हैं। सब कुछ देने के बाद भी स्वैप मशीनें दुकानों पर नहीं लग रही हैं।
---------------------------
बैंक में स्वैप मशीन की अप्लाई किया है। अप्लाई करने के समय भी बहुत सी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। अब एक महीना बीतने के बाद भी स्वैप मशीन नहीं लग पाई है। हमें दूसरे व्यापारियों की स्वैप मशीनों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहां पांच प्रतिशत कर के रूप में भी दे रहे हैं। -- प्रदीप मैहता- कपड़ा व्यापारी।
स्वैप मशीन अप्लाई करने में काफी परेशानी हुई। अभी एक महीना बीत गया स्वैप मशीन नहीं लग पाई। दुकानदारी में पड़ी परेशानी हो रही है। अभी तो पे-टीएम का प्रयोग कर रहा हूं। उसमें 25 हजार रुपये प्रतिमाह ट्रांसफर हो सकते हैं। लिमिट अभी 50 हजार हो गई लेकिन बाजार में शुरू नहीं हो पाई है। - अनुराग गोयल - रेडिमेड कपड़ा व्यापारी
बाजार 90 प्रतिशत ट्रैक पर आ गया है। 500 रुपये की नई करेंसी आने से बाजार में खुल्ले की दिक्कत भी खत्म हो गई है। बीच में सावे बंद होने के कारण भी बाजार मंदा था। 14 जनवरी के बाद के सावों की खरीदारी शुरू हो चुकी है। - भूषण जोशी- जूता व्यापारी।
नोटबंदी के बाद बाजार में आर्थिक मंदी का दौर शुरू हुआ था। उस समय बाजार 10 प्रतिशत ही रह गया था। खुल्ले की दिक्कत थी। बैंकों में कैश का अभाव भी था। लोगों को कैशलेस ट्रांजेक्शन के बारे में भी जानकारी नहीं थी। अब स्थिति सुधर गई है। 95 प्रतिशत बाजार सुचारु रूप से चलने लगा है। -- सुंदर सैनी- फल विक्रेता।
नोटबंदी के बाद उपभोक्ता कैशलेस ट्रांजेक्शन के प्रति काफी जागरूक हुए हैं। पहले पांच प्रतिशत लोग लेनदेन के लिए डेबिट कार्ड का प्रयोग नहीं करते थे। बाजार में केवल कैश ही चलता था। अब प्रतिदिन 45 प्रतिशत लोग कैशलेस खरीदारी कर रहे हैं। कैशलेस ट्रांजेक्शन में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। वे भी कैशलेस ट्रांजेक्शन कर रही हैं। अब बाजार में किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हो रही। - तरुण कपूर-जरनल स्टोर व्यापारी
-----------------------------------------
हमने नोटबंदी से पहले ही स्वैप मशीन लगवाई हुई थी। उस समय कोई भी ग्राहक कैशलेस ट्रांजेक्शन नहीं करता था। पूरा लेनदेन कैशलेस से ही होता था। कैशलेस होने के बाद उनकी दुकानदारी भी बढ़ी है। बाजार में कैश मशीनें कम होने के कारण उनके पास ग्राहक ज्यादा आ रहे हैं। करीब सभी ग्राहक कैशलेस लेनदेन कर रहे हैं। - सूरत सिंह, मालिक- अपना बाजार
विज्ञापन
बैंक में नेट बैंकिंग की बढ़ी डिमांड
शहर में करीब सरकारी और निजी बैंकों की मिलाकर 17 शाखाएं हैं। हर रोज एक शाखा में औसत 3 से 5 उपभोक्ता नेट बैंकिंग के लिए आवेदन कर रहे हैं। यानी सभी बैंकों में हर रोज 60 से 70 उपभोक्ताओं की नेट बैंकिंग की अप्लीकेशन आ रही है। इसके अलावा क्रेडिट कार्ड, एटीएम कार्ड और चेक बुक की डिमांड उपभोक्ता कर रहे हैं।
विज्ञापन
45 प्रतिशत उपभोक्ता कर रहे हैं कैशलेस ट्रांजेक्शन
नोटबंदी के बाद क्षेत्र के लोगों में जागरूकता आई है। अब यहां के 45 प्रतिशत उपभोक्ता कैशलेस ट्रांजेक्शन कर रहे हैं। नोट बंदी से पूर्व शहर में एक भी दुकान पर पे-टीएम से लेनदेन नहीं होता था जबकि मुश्किल से 10 दुकानों पर स्वैप मशीनें लगी थीं। स्वैप मशीन और पे-टीएम से लेनदेन की लोगों को जानकारी ही नहीं थी। स्वैप मशीन से महीने में कोई एक या दो ग्राहक की लेनदेन करता था। नोट बंदी के बाद स्वैप मशीनों की मांग बढ़ती जा रही है। इसके अलावा दुकानों ने पे-टीएम और क्रेडिट कार्ड से भी लेनदेन शुरू किया है। कुल मिलाकर नोट बंदी के बाद महेंद्रगढ़ क्षेत्र कैशलेस में जागरूक हुआ है।
विज्ञापन
स्वैप मशीनें लेने में आ रही हैं दिक्कतें
उपभोक्ताओं को स्वैप मशीनें लगवाने में बड़ी परेशानी हो रही है। उन्हें कई प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ रहा है। 20 वर्षों से इनकम टैक्स पे करने वालों और आईटीआर रिटर्न करने वालों को भी स्वैप मशीनें नहीं मिल रही हैं। उपभोक्ताओं से सैल टैक्स नंबर, टीन नंबर और पैन नंबर भी मांगे जा रहे हैं। सब कुछ देने के बाद भी स्वैप मशीनें दुकानों पर नहीं लग रही हैं।
---------------------------
बैंक में स्वैप मशीन की अप्लाई किया है। अप्लाई करने के समय भी बहुत सी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। अब एक महीना बीतने के बाद भी स्वैप मशीन नहीं लग पाई है। हमें दूसरे व्यापारियों की स्वैप मशीनों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहां पांच प्रतिशत कर के रूप में भी दे रहे हैं। -- प्रदीप मैहता- कपड़ा व्यापारी।
स्वैप मशीन अप्लाई करने में काफी परेशानी हुई। अभी एक महीना बीत गया स्वैप मशीन नहीं लग पाई। दुकानदारी में पड़ी परेशानी हो रही है। अभी तो पे-टीएम का प्रयोग कर रहा हूं। उसमें 25 हजार रुपये प्रतिमाह ट्रांसफर हो सकते हैं। लिमिट अभी 50 हजार हो गई लेकिन बाजार में शुरू नहीं हो पाई है। - अनुराग गोयल - रेडिमेड कपड़ा व्यापारी
बाजार 90 प्रतिशत ट्रैक पर आ गया है। 500 रुपये की नई करेंसी आने से बाजार में खुल्ले की दिक्कत भी खत्म हो गई है। बीच में सावे बंद होने के कारण भी बाजार मंदा था। 14 जनवरी के बाद के सावों की खरीदारी शुरू हो चुकी है। - भूषण जोशी- जूता व्यापारी।
नोटबंदी के बाद बाजार में आर्थिक मंदी का दौर शुरू हुआ था। उस समय बाजार 10 प्रतिशत ही रह गया था। खुल्ले की दिक्कत थी। बैंकों में कैश का अभाव भी था। लोगों को कैशलेस ट्रांजेक्शन के बारे में भी जानकारी नहीं थी। अब स्थिति सुधर गई है। 95 प्रतिशत बाजार सुचारु रूप से चलने लगा है। -- सुंदर सैनी- फल विक्रेता।
नोटबंदी के बाद उपभोक्ता कैशलेस ट्रांजेक्शन के प्रति काफी जागरूक हुए हैं। पहले पांच प्रतिशत लोग लेनदेन के लिए डेबिट कार्ड का प्रयोग नहीं करते थे। बाजार में केवल कैश ही चलता था। अब प्रतिदिन 45 प्रतिशत लोग कैशलेस खरीदारी कर रहे हैं। कैशलेस ट्रांजेक्शन में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। वे भी कैशलेस ट्रांजेक्शन कर रही हैं। अब बाजार में किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हो रही। - तरुण कपूर-जरनल स्टोर व्यापारी
-----------------------------------------
हमने नोटबंदी से पहले ही स्वैप मशीन लगवाई हुई थी। उस समय कोई भी ग्राहक कैशलेस ट्रांजेक्शन नहीं करता था। पूरा लेनदेन कैशलेस से ही होता था। कैशलेस होने के बाद उनकी दुकानदारी भी बढ़ी है। बाजार में कैश मशीनें कम होने के कारण उनके पास ग्राहक ज्यादा आ रहे हैं। करीब सभी ग्राहक कैशलेस लेनदेन कर रहे हैं। - सूरत सिंह, मालिक- अपना बाजार