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परमात्मा की प्राप्ति सच्चे प्रेम से संभव : आयुष
Tue, 11 Nov 2025 11:37 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 11 Nov 2025 11:37 PM IST
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फोटो 22श्रीमद् भागवत कथा सुनाते बाल व्यास आयुष महाराज।स्रोत आयोजक
नारनौल। नारनौल पुरानी मंडी में वृंदावन से आए बाल व्यास आयुष महाराज ने कथा सुनाई। महाराज ने कहा कि धनवान व्यक्ति वही है जो अपने तन, मन, धन से सेवा भक्ति करें।
परमात्मा की प्राप्ति सच्चे प्रेम से संभव है। बताया कि पूतना राक्षसी ने बालकृष्ण को उठा लिया और स्तनपान कराने लगी। श्रीकृष्ण ने स्तनपान करते-करते ही पूतना का वध कर उसका कल्याण किया। माता यशोदा जब भगवान श्री कृष्ण को पूतना के वक्षस्थल से उठाकर लाती है उसके बाद पंचगव्य गाय के गोबर, गोमूत्र से भगवान को स्नान कराती है।
सभी को गोमाता की सेवा, गायत्री का जाप और गीता का पाठ अवश्य करना चाहिए। गाय की सेवा से 33 करोड़ देवी देवताओं की सेवा हो जाती है। भपृथ्वी ने गाय का रूप धारण करके श्रीकृष्ण को पुकारा तब श्रीकृष्ण पृथ्वी पर आये हैं। इसलिए वह मिट्टी में नहाते, खेलते और खाते हैं ताकि पृथ्वी का उद्धार कर सकें।
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ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा छोड़कर गिर्राज की पूजा की ओर छप्पन भोग लगाया। इसके बाद इंद्र ने कुपित होकर ब्रजवासियों पर मूसलाधार बारिश की, तब कृष्ण भगवान ने गिर्राज को अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाकर रक्षा की। कथा में ऋषि सिंघल, रतनलाल सिंघल, श्याम सुंदर सिंघल, गोपी राम सिंघल, संजय कुमार पूर्व एसडीओ, प्रमोद कुमार, विपिन सिंघल आदि उपस्थित रहे।
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परमात्मा की प्राप्ति सच्चे प्रेम से संभव है। बताया कि पूतना राक्षसी ने बालकृष्ण को उठा लिया और स्तनपान कराने लगी। श्रीकृष्ण ने स्तनपान करते-करते ही पूतना का वध कर उसका कल्याण किया। माता यशोदा जब भगवान श्री कृष्ण को पूतना के वक्षस्थल से उठाकर लाती है उसके बाद पंचगव्य गाय के गोबर, गोमूत्र से भगवान को स्नान कराती है।
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सभी को गोमाता की सेवा, गायत्री का जाप और गीता का पाठ अवश्य करना चाहिए। गाय की सेवा से 33 करोड़ देवी देवताओं की सेवा हो जाती है। भपृथ्वी ने गाय का रूप धारण करके श्रीकृष्ण को पुकारा तब श्रीकृष्ण पृथ्वी पर आये हैं। इसलिए वह मिट्टी में नहाते, खेलते और खाते हैं ताकि पृथ्वी का उद्धार कर सकें।
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ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा छोड़कर गिर्राज की पूजा की ओर छप्पन भोग लगाया। इसके बाद इंद्र ने कुपित होकर ब्रजवासियों पर मूसलाधार बारिश की, तब कृष्ण भगवान ने गिर्राज को अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाकर रक्षा की। कथा में ऋषि सिंघल, रतनलाल सिंघल, श्याम सुंदर सिंघल, गोपी राम सिंघल, संजय कुमार पूर्व एसडीओ, प्रमोद कुमार, विपिन सिंघल आदि उपस्थित रहे।