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टीबी मरीजों के उपचार को लेकर डॉक्टरों की हुई बैठक
Updated Sat, 03 Nov 2018 12:38 AM IST
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बैठक में टीबी के मरीजों के उपचार के लिए डॉक्टरों ने की चर्चा
फोटो 18
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। सिविल सर्जन डॉ. इंद्रजीत धनखड़ की अध्यक्षता में रेवाड़ी रोड स्थित विलेज रिर्सोट में जिले के प्राईवेट डॉक्टर और आईएमए की टीबी के इलाज पर जारी नोटिफिकेशन के लिए मीटिंग की। इसमें जिले के सभी आईएमए सदस्यों ने भाग लिया।
जिला क्षयरोग अधिकारी टीबी डॉ. अशोक कुमार ने बताया की विश्व के कुल टीबी मरीजों में से एक तिहाई भारत में हैं। भारत में लगभग 28 लाख के करीब टीबी के मरीज हैं। हर तीन मिनट में दो टीबी के मरीजों की मौत हो जाती है। इसी प्रकार जो मरीज पहली बार टीबी से संक्रमित होते हैं, उनमें से तीन प्रतिशत व दूसरी बार या बार-बार संक्रमित मरीजों में बिगड़ी हुई टीबी की संभावना 12 प्रतिशत तक होती है। टीबी के मरीज द्वारा अधूरा इलाज लेने या नियमानुसार इलाज न लेने के कारण टीबी को नियंत्रण करने में कठिनाई आ रही है। प्रधानमंत्री ने 13 मार्च 2018 को दिल्ली में हुई टीबी उन्मूलन सम्मेलन में 2025 में ही भारत से टीबी खत्म करने का लक्ष्य रखा है। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी सरकारी व प्राईवेट डाक्टर व प्रयोगशाला को टीबी के मरीज की जानकारी देना आवश्यक है। डॉ. अशोक ने बताया कि सभी दवा विक्रेताओं को भी एच एक शेड्यूल के तहत टीबी की दवाईयों को लेखा-जोखा रखना आवश्यक है और सूचना जिला क्षयरोग अधिकारी को देना आवश्यक है। कोई डाक्टर प्रयोगशाला या दवा विक्रेता टीबी के मरीजों की सूचना नहीं देता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। सिविल सर्जन डॉ. इंद्रजीत धनखड़ की अध्यक्षता में रेवाड़ी रोड स्थित विलेज रिर्सोट में जिले के प्राईवेट डॉक्टर और आईएमए की टीबी के इलाज पर जारी नोटिफिकेशन के लिए मीटिंग की। इसमें जिले के सभी आईएमए सदस्यों ने भाग लिया।
जिला क्षयरोग अधिकारी टीबी डॉ. अशोक कुमार ने बताया की विश्व के कुल टीबी मरीजों में से एक तिहाई भारत में हैं। भारत में लगभग 28 लाख के करीब टीबी के मरीज हैं। हर तीन मिनट में दो टीबी के मरीजों की मौत हो जाती है। इसी प्रकार जो मरीज पहली बार टीबी से संक्रमित होते हैं, उनमें से तीन प्रतिशत व दूसरी बार या बार-बार संक्रमित मरीजों में बिगड़ी हुई टीबी की संभावना 12 प्रतिशत तक होती है। टीबी के मरीज द्वारा अधूरा इलाज लेने या नियमानुसार इलाज न लेने के कारण टीबी को नियंत्रण करने में कठिनाई आ रही है। प्रधानमंत्री ने 13 मार्च 2018 को दिल्ली में हुई टीबी उन्मूलन सम्मेलन में 2025 में ही भारत से टीबी खत्म करने का लक्ष्य रखा है। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी सरकारी व प्राईवेट डाक्टर व प्रयोगशाला को टीबी के मरीज की जानकारी देना आवश्यक है। डॉ. अशोक ने बताया कि सभी दवा विक्रेताओं को भी एच एक शेड्यूल के तहत टीबी की दवाईयों को लेखा-जोखा रखना आवश्यक है और सूचना जिला क्षयरोग अधिकारी को देना आवश्यक है। कोई डाक्टर प्रयोगशाला या दवा विक्रेता टीबी के मरीजों की सूचना नहीं देता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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