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डिप्थीरिया बीमारी को लेकर जिला स्वास्थ्य विभाग अलर्ट,सर्वे जारी
Updated Sat, 13 Oct 2018 01:19 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। जिला स्वास्थ्य विभाग डिप्थीरिया (गलघोंटू) के संभावित खतरे को देखते हुए अलर्ट हो गया है। आशा वर्कर्स और एएनएम घर-घर जाकर बच्चों की जांच कर रही हैं। हालांकि अभी तक जिले में डिप्थीरिया का कोई भी संभावित केस नहीं आया है।
डिप्टी सीएमओ और नोडल अधिकारी डॉ. राम निवास ने बताया कि महेंद्रगढ़ जिले में अभी तक डिप्थीरिया बीमारी का कोई केस सामने नहीं आया है। पूरे जिले में सर्वे हो रहा है। आशा वर्कर और एएनएम घर-घर जाकर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कर रही हैं। सर्वे के दौरान आशा वर्कर यूआरसी की जांच करती है। यदि उन्हें कोई संदिग्ध मामला लगता है तो अस्पताल रेफर कर देती हैं। डॉक्टर की जांच में संदिग्ध मरीज है तो आगे की कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि डिप्थीरिया के बारे में डॉक्टर समेत अन्य को जानकारी दी गई है। हेल्थ विभाग की टीम पूरी तरह से तैयार है। इसके लिए दवाइयां मंगवा ली गई हैं। गौरतलब है कि मेवात और गुरुग्राम में डिप्थीरिया के संभावित मरीजों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है।
डिप्थीरिया के बचाव व लक्षण
डिप्थीरिया को गलघोंटू नाम से भी जाना जाता है। कॉरीनेबैक्टेरियम डिप्थीरिया बैक्टीरिया के इंफेक्शन से होता है। बीमारी के लक्षण संक्रमण फैलने के दो से पांच दिनों में दिखाई देते हैं। बीमारी होने पर सांस लेने में कठिनाई होती है। गर्दन में सूजन हो सकती है। संक्रमण फैलने के बाद खांसी, बुखार रहता है। त्वचा का रंग नीला पड़ जाता है। ऐसे में आसपास मच्छर ही न पनपने दें। पूरी बाजू के कपड़े पहनें ताकि मच्छर न काट सके।
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जीका को लेकर भी अलर्ट
जयपुर से आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या को देखते हुए प्रदेश में जीका वायरस का खतरा बढ़ गया है। जिला स्वास्थ्य विभाग भी इस बारे में अलर्ट है। नारनौल राजस्थान से सटा हुआ है और शहर से जयपुर 150 किमी दूर है। यहां बस, ट्रेनों के माध्यम से रोजाना हजारों लोगों का आवागमन रहता है। इसी को देखते हुए विभाग अलर्ट है। डॉक्टरों के अनुसार वायरस पीड़ित व्यक्ति के ट्रेवल करने से अधिक फैलता है।
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नारनौल। जिला स्वास्थ्य विभाग डिप्थीरिया (गलघोंटू) के संभावित खतरे को देखते हुए अलर्ट हो गया है। आशा वर्कर्स और एएनएम घर-घर जाकर बच्चों की जांच कर रही हैं। हालांकि अभी तक जिले में डिप्थीरिया का कोई भी संभावित केस नहीं आया है।
डिप्टी सीएमओ और नोडल अधिकारी डॉ. राम निवास ने बताया कि महेंद्रगढ़ जिले में अभी तक डिप्थीरिया बीमारी का कोई केस सामने नहीं आया है। पूरे जिले में सर्वे हो रहा है। आशा वर्कर और एएनएम घर-घर जाकर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कर रही हैं। सर्वे के दौरान आशा वर्कर यूआरसी की जांच करती है। यदि उन्हें कोई संदिग्ध मामला लगता है तो अस्पताल रेफर कर देती हैं। डॉक्टर की जांच में संदिग्ध मरीज है तो आगे की कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि डिप्थीरिया के बारे में डॉक्टर समेत अन्य को जानकारी दी गई है। हेल्थ विभाग की टीम पूरी तरह से तैयार है। इसके लिए दवाइयां मंगवा ली गई हैं। गौरतलब है कि मेवात और गुरुग्राम में डिप्थीरिया के संभावित मरीजों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है।
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डिप्थीरिया के बचाव व लक्षण
डिप्थीरिया को गलघोंटू नाम से भी जाना जाता है। कॉरीनेबैक्टेरियम डिप्थीरिया बैक्टीरिया के इंफेक्शन से होता है। बीमारी के लक्षण संक्रमण फैलने के दो से पांच दिनों में दिखाई देते हैं। बीमारी होने पर सांस लेने में कठिनाई होती है। गर्दन में सूजन हो सकती है। संक्रमण फैलने के बाद खांसी, बुखार रहता है। त्वचा का रंग नीला पड़ जाता है। ऐसे में आसपास मच्छर ही न पनपने दें। पूरी बाजू के कपड़े पहनें ताकि मच्छर न काट सके।
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जीका को लेकर भी अलर्ट
जयपुर से आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या को देखते हुए प्रदेश में जीका वायरस का खतरा बढ़ गया है। जिला स्वास्थ्य विभाग भी इस बारे में अलर्ट है। नारनौल राजस्थान से सटा हुआ है और शहर से जयपुर 150 किमी दूर है। यहां बस, ट्रेनों के माध्यम से रोजाना हजारों लोगों का आवागमन रहता है। इसी को देखते हुए विभाग अलर्ट है। डॉक्टरों के अनुसार वायरस पीड़ित व्यक्ति के ट्रेवल करने से अधिक फैलता है।