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Mahendragarh-Narnaul News: मारपीट व धमकी मामले में आरोपी को दी जमानत
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नारनौल। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नितिन राज की अदालत ने मारपीट व आपराधिक धमकी के मामले में आरोपी योगेश को नियमित जमानत दे दी है। अदालत ने 50 हजार के निजी मुचलके और समान राशि के जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर यह राहत प्रदान की है।
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार 11 सितंबर 2025 की शाम शिकायतकर्ता दिलबाग अपने साथियों के साथ दुकान पर बैठा था। आरोप है कि राहुल गुप्ता, धर्मेद्र, योगेश उर्फ देवा, परमजीत और अन्य आरोपी स्कॉर्पियो व बाइक से पहुंचे और दुकान में जबरन घुस गए।
इसके बाद आरोपियों ने शिकायतकर्ता के साथ मारपीट की। परमजीत और राहुल पर सुआ (आइस पोकर) से गर्दन व पीठ पर वार करने का आरोप लगा। जाते समय आरोपी 2,600 रुपये छीनकर ले गए, जिस पर थाना सिटी में मामला दर्ज किया गया।
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आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि योगेश 12 जून 2026 से जेल में बंद है और उसे पुरानी रंजिश के चलते झूठा फंसाया गया है। सह आरोपी परमजीत को पहले ही जमानत मिल चुकी है जिसकी भूमिका योगेश से अधिक गंभीर थी।
मामले में चालान भी पेश किया जा चुका है। दूसरी ओर सरकारी वकील ने कहा कि आरोपी के खिलाफ 7 आपराधिक मामले लंबित हैं और उसके भागने की संभावना है।
अदालत ने पाया कि मुख्य आरोपी को पहले ही जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर याचिकाकर्ता का पक्ष मजबूत है और याचिका स्वीकार कर ली।
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पुलिस रिपोर्ट के अनुसार 11 सितंबर 2025 की शाम शिकायतकर्ता दिलबाग अपने साथियों के साथ दुकान पर बैठा था। आरोप है कि राहुल गुप्ता, धर्मेद्र, योगेश उर्फ देवा, परमजीत और अन्य आरोपी स्कॉर्पियो व बाइक से पहुंचे और दुकान में जबरन घुस गए।
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इसके बाद आरोपियों ने शिकायतकर्ता के साथ मारपीट की। परमजीत और राहुल पर सुआ (आइस पोकर) से गर्दन व पीठ पर वार करने का आरोप लगा। जाते समय आरोपी 2,600 रुपये छीनकर ले गए, जिस पर थाना सिटी में मामला दर्ज किया गया।
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आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि योगेश 12 जून 2026 से जेल में बंद है और उसे पुरानी रंजिश के चलते झूठा फंसाया गया है। सह आरोपी परमजीत को पहले ही जमानत मिल चुकी है जिसकी भूमिका योगेश से अधिक गंभीर थी।
मामले में चालान भी पेश किया जा चुका है। दूसरी ओर सरकारी वकील ने कहा कि आरोपी के खिलाफ 7 आपराधिक मामले लंबित हैं और उसके भागने की संभावना है।
अदालत ने पाया कि मुख्य आरोपी को पहले ही जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर याचिकाकर्ता का पक्ष मजबूत है और याचिका स्वीकार कर ली।