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सप्ताह में तीसरी बार टूटी माइनर, फसल जलमग्र
Updated Sat, 28 Jul 2018 12:47 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
मंडी अटेली।
पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र में हो रही बारिश के कारण किसानों को अब परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि एक सप्ताह के दौरान नावदी-रामपुरा माइनर तीन बार टूट चुकी है, जिससे आस-पास के खेतों में जलभराव हो गया है। इससे उन्हें फसल खराब होने का भय सताने लगा है।
किसान बाबूलाल, लख्मीचंद, बहादुरमल, महेंद्र, कृष्ण, भल्लू, जसवंत, धनपत व ओमप्रकाश आदि ने बताया कि रामपुरा सब माइनर 22, 24 व 26 जुलाई को क्रमश: तीन बार टूट चुकी है, लेकिन विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है। जब पानी कि जरूरत होती है तब तो माइनर में पानी नहीं छोड़ा जाता है, लेकिन जब बारिश का मौसम आ जाता है तो इसमें पानी छोड़ दिया जाता है। 26 जुलाई की रात माइनर में पानी के अधिक बहाव के कारण ढाणी पृथ्वीपुरा के पास से फिर तीसरी बार माइनर टूट गई। इसके कारण 15 एकड़ में खड़ी बाजरे व कपास की फसल जलमग्न हो गई।
किसानों ने बताया कि फसल में अधिक पानी खड़ा होने के कारण फसल में नुकसान होने की आशंका बनी हुई है। किसानों ने बताया कि हर वर्ष इस माइनर का यही हाल है बारिश के मौसम में माइनर टूट जाती है और खेत जलमग्न हो जाते है। उन्होंने बताया कि विभाग के कर्मचारी इसको पूर्ण रूप से ठीक करने की बजाय खेतों से ही मिट्टी उठाकर लिपा-पोती कर देते हैं। यही कारण है कि बार-बार नहर टूट रही है। इतना ही नहीं कई वर्षों से नहर की सफाई नहीं की गई।
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वहीं, इस संबंध में नहर विभाग के जेई प्रवीण यादव ने बताया कि रामपुरा नावदी माइनर का निर्माण तीन दशक पूर्व किया गया था। इस माइनर में बरसात के मौसम मेें ही पानी छोड़ा जाता है, बाकि समय में पानी न आने की वजह से चूहे बिल बना देते हैं और दूसरा कारण यह है कि माइनर के किनारों पर पेड़ खड़े हुए हैं, तेज आंधी आने के कारण पेड़ों की जड़ों से मिट्टी हट जाती है। जब माइनर में पानी आता है तो मिट्टी का कटाव शुरू हो जाता है। इसी वजह से माइनर बार-बार टूट जाती है। उन्होंने कहा कि अटेली क्षेत्र की सभी माइनरों पर 70 एमएम की पीसीसी करने के लिए विभाग द्वारा टेंडर छोड़े जा चुके है, बारिश रुकते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
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मंडी अटेली।
पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र में हो रही बारिश के कारण किसानों को अब परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि एक सप्ताह के दौरान नावदी-रामपुरा माइनर तीन बार टूट चुकी है, जिससे आस-पास के खेतों में जलभराव हो गया है। इससे उन्हें फसल खराब होने का भय सताने लगा है।
किसान बाबूलाल, लख्मीचंद, बहादुरमल, महेंद्र, कृष्ण, भल्लू, जसवंत, धनपत व ओमप्रकाश आदि ने बताया कि रामपुरा सब माइनर 22, 24 व 26 जुलाई को क्रमश: तीन बार टूट चुकी है, लेकिन विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है। जब पानी कि जरूरत होती है तब तो माइनर में पानी नहीं छोड़ा जाता है, लेकिन जब बारिश का मौसम आ जाता है तो इसमें पानी छोड़ दिया जाता है। 26 जुलाई की रात माइनर में पानी के अधिक बहाव के कारण ढाणी पृथ्वीपुरा के पास से फिर तीसरी बार माइनर टूट गई। इसके कारण 15 एकड़ में खड़ी बाजरे व कपास की फसल जलमग्न हो गई।
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किसानों ने बताया कि फसल में अधिक पानी खड़ा होने के कारण फसल में नुकसान होने की आशंका बनी हुई है। किसानों ने बताया कि हर वर्ष इस माइनर का यही हाल है बारिश के मौसम में माइनर टूट जाती है और खेत जलमग्न हो जाते है। उन्होंने बताया कि विभाग के कर्मचारी इसको पूर्ण रूप से ठीक करने की बजाय खेतों से ही मिट्टी उठाकर लिपा-पोती कर देते हैं। यही कारण है कि बार-बार नहर टूट रही है। इतना ही नहीं कई वर्षों से नहर की सफाई नहीं की गई।
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वहीं, इस संबंध में नहर विभाग के जेई प्रवीण यादव ने बताया कि रामपुरा नावदी माइनर का निर्माण तीन दशक पूर्व किया गया था। इस माइनर में बरसात के मौसम मेें ही पानी छोड़ा जाता है, बाकि समय में पानी न आने की वजह से चूहे बिल बना देते हैं और दूसरा कारण यह है कि माइनर के किनारों पर पेड़ खड़े हुए हैं, तेज आंधी आने के कारण पेड़ों की जड़ों से मिट्टी हट जाती है। जब माइनर में पानी आता है तो मिट्टी का कटाव शुरू हो जाता है। इसी वजह से माइनर बार-बार टूट जाती है। उन्होंने कहा कि अटेली क्षेत्र की सभी माइनरों पर 70 एमएम की पीसीसी करने के लिए विभाग द्वारा टेंडर छोड़े जा चुके है, बारिश रुकते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।