सीएम साहब, देखो महेंद्रगढ़ स्वास्थ्य सेवाओं का हाल

Rohtak Bureau Updated Sat, 11 Nov 2017 12:19 AM IST
सीएम साहब, देखिये स्वास्थ्य सेवाओं का हाल
500000 लाख जनता के बीच एक मात्र उप नागरिक अस्पताल
15 से 20 हजार प्रतिमाह होती है ओपीडी
120 से 160 मरीज रेफर, दूसरे दिन होती है एक मौत
- नहीं है अल्ट्रासाउंड, ब्लड बैंक, सीटी स्कैन तथा एमआरआई की सुविधा
- नहीं है एक भी सर्जन, आर्थोपेडिक्स तथा मेडिसियन
फोटो संख्या : 31 से 39
प्रदीप शर्मा
महेंद्रगढ़।
पिछले दस दिनों से अमर उजाला टीम ने ‘महेंद्रगढ़ मांगे मेडिकल कॉलेज’ की मुहिम चला रखी है। उसी के तहत वीरवार को टीम ने सुबह 10.30 बजे महेंद्रगढ़ के उप नागरिक अस्पताल में जाकर जायजा लिया। इस दौरान अस्पताल में भारी भीड़ थी। अस्पताल की रजिस्ट्रेशन डेस्क, डिस्पेंसरी, लैब और चिकित्सकों के पास चेक करवाने वाले मरीजों की लंबी लाइन लगी हुई थी। हालात यह थे कि मरीजों को काफी देर बाद नंबर आ रहा था जबकि जांच 2 या 3 घंटे बाद दी जा रही थी। इसके अतिरिक्त हड्डी टूटे हुए मरीज या फिर अल्ट्रासाउंड के लिए रेफर किया जा रहा था। मरीजों ने बताया कि उप नागरिक अस्पताल मात्र नाम का ही अस्पताल हैं। यहां पर स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं हैं। मरीजों ने बताया कि अब मेडिकल कॉलेज की जरूरत महेंद्रगढ़ को है सीएम कोरियावास बनाने को लगे हुए हैं। कम से कम सीएम खट्टर को महेंद्रगढ़ के स्वास्थ्य सेवाओं का हाल तो जानना चाहिए। महेंद्रगढ़ उप नागरिक अस्पताल का उद्घाटन 20 अप्रैल 1973 तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल ने किया था। तब से लेकर अब तक स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई सुधार नहीं हुआ है।
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हर दूसरे दिन होती है एक मौत
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार महेंद्रगढ़ में हर दूसरे दिन एक व्यक्ति की मौत हो जाती है। प्रतिमाह 20 पोस्टमार्टम होते हैं। इनमें से 15 सड़क हादसों में मरने वाले होते हैं जिनको समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण या रेफर कर देने पर रास्ते में दम तोड़ जाते हैं। क्योंकि महेंद्रगढ़ स्वास्थ्य सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों को रोहतक, जयपुर, गुरुगाम या दिल्ली ले जाया जाता है। इसकी महेंद्रगढ़ से 110 से 200 किलोमीटर पड़ती है। इन अस्पतालों में पहुंचने पर लगभग 3 से 4 घंटे का समय लग जाता है। महेंद्रगढ़ अस्पताल में लगभग 40 किलोमीटर दूरी के मरीज भी आते हैं। किंतु सुविधाओं के अभाव में उनको रेफर कर दिये जाते हैं। प्रति माह हादसे, बीमारी, प्रीगनेंसी के 120 से 160 मरीज रेफर किए जाते हैं। अस्पताल में अगस्त माह में 120, सितंबर में 161 और अक्तूबर में 134 मरीज रेफर किए जा चुके हैं।
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नहीं है स्पेशलिस्ट चिकित्सक
इस अस्पताल में 13 चिकित्सकों की पोस्ट हैं। इनमें से 12 भरी हुई और 2 चिकित्सक लंबी छुट्टी पर गई हैं। अगर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की बात करें तो 2 चाइल्ट स्पेशिलिस्ट, एक पैथोलॉजिस्ट और एक एनेस्थीसिया के पद भरें हैं। अस्पताल को सबसे ज्यादा जरूरत सर्जन, आर्थोपेडिक्स और मेडिसिन की हैं। अस्पताल में पिछले चार वर्षों से एक भी सर्जन नहीं है जबकि आर्थोपेडिक्स चिकित्सक तो कई वर्षों से नहीं हैं। अस्पताल में सोनोग्राफी, वेंटिलेटर, सीटी स्केन, एमआरआई की सुविधा नहीं है। सोनोग्राफी के लिए नारनौल रेफर किया जाता है जबकि सीटी स्कैन और एमआरआई के रोहतक के लिए रेफर किया जाता है। इसके अलावा ब्लड बैंक की भी कमी है।
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यह कहना है लोगों का
मेरे पैर में चोट लगी हुई थी। एक्सरे करवाने के लिए सतनाली से यहां आया हूं। अस्पताल में कोई भी आर्थोपेडिक्स चिकित्सक नहीं है, इसलिए अब निजी अस्पताल से इलाज करवाना पड़ेगा। अगर मेडिकल कॉलेज महेंद्रगढ़ खुल जाए तो सुविधाएं तो हो जाएंगी मरीजों को बाहर इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा।
- प्रवीण, गांव ढाणा, सतनाली।
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अस्पताल में न चिकित्सक और न ही अल्ट्रासाउंड मशीन आदि की सुविधाएं। इलाज के लिए 30 किलोमीटर दूर आता हूं। जब यहां भी सुविधा नहीं मिलती तो फिर दिक्कत हो जाती है। इसलिए मेडिकल कॉलेज महेंद्रगढ़ में बनना चाहिए क्योंकि यहां की स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई है।
-पूर्ण सिंह, श्यामपुरा।
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महेंद्रगढ़ अस्पताल तो रेफरल अस्पताल है। अस्पताल में सुविधा नाम की चीज नहीं है। मुख्यमंत्री नारनौल के कोरियावास में अस्पताल बनाने की सोच रहे हैं। जबकि जरूरत तो महेंद्रगढ़ को है। हर छोटी से छोटी बीमारी या चोट लगने पर रेफर कर दिया जाता है।
-मनोज सेहलंग।
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मैं गांव मांडोला से हूं और मेरा गांव 15 किलोमीटर दूर पड़ता है। इस अस्पताल में डेंगू जैसी बीमारियों का इलाज नहीं हो पाता। मरीज को डेंगू की जांच के लिए भी नारनौल जाना पड़ता है। इसलिए मेडिकल कॉलेज हो तो यहां की स्वास्थ्य सेवाओं के हालात को देखकर महेंद्रगढ़ में ही बनना चाहिए।
-कौशल, मांडोला।
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मरीजों को अधिक से अधिक सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है। जो सुविधा नहीं बन पा रही है, उनके लिए हमने सरकार को लिखा हुआ है।
-डीएन बागड़ी, सीएमओ, नारनौल

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