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पर्यावरण क

Fri, 23 Jun 2017 01:08 AM IST
Updated Fri, 23 Jun 2017 01:08 AM IST
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पर्यावरण क
फोटो संख्या:38 से 40
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नजर नहीं आ रही साढ़े दस करोड़ की हरियाली
- पांच वर्ष में लगाए 20 लाख पौधे, फिर भी 3 प्रतिशत वन क्षेत्र
प्रदीप शर्मा
महेंद्रगढ़।
वन विभाग प्रति वर्ष लाखों रुपये खर्च कर पौधारोपण करता है। इसके बावजूद जिले का वन क्षेत्र बढ़ने की बजाय कम होता जा रहा है। वन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में विभाग साढ़े दस करोड़ रुपये खर्च कर लगभग 20 लाख पौधे लगे हैं किंतु परिणाम कहीं नजर नहीं आ रहा।
वर्तमान में जिले में तीन प्रतिशत वन हैं जिस पर साढ़े छह लाख पेड़ लगे हुए हैं। दस वर्षों के दौरान विभाग द्वारा लगाए गए सभी पौधे जीवित होते तो जिले में लगभग 9 प्रतिशत भूमि पर वन होते। विभाग प्रति वर्ष छायादार, फलदार, फूलदार आदि लाखों पौधे लगाती हैं और अधिकतर पौधों को नि:शुल्क वितरित भी करती है उसके बाद भी अधिकतर पौधे सुरक्षा एवं देखरेख के अभाव में खत्म हो जाते हैं। इस वर्ष के लिए विभाग ने 2 लाख पौधो के रोपण का लक्ष्य रखा है जिनका वितरण बृहस्पतिवार से शुरू किया जा चुका है।
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पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो विभाग ने 2012-13 में 464451 पौधे लगाए थे, 2013-14 में 458243, 2014-15 में 423175, 2015-16 में 346700 तथा 2016-17 में 231870 पौधे लगाए थे। विभाग की माने तो एक पौधे पर 55 रुपये का खर्च आता है। ये सभी पौधे निजी एवं सरकारी क्षेत्र में लगाए गए हैं। पिछले वर्ष विभाग द्वारा की गई गणना के अनुसार सरकारी क्षेत्र पर लगभग 6 लाख 30 हजार पेड़ खड़े हैं। विभाग का यह भी मानना है कि एक पौधे को गणना की स्थिति में आने पर पांच वर्ष का समय लगता है। उसके बाद ही उसकी गणना की जाती है।
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6000 पेड़ कटते हैं हर साल
एक तरफ गाड़ियों की संख्या बढ़ रही है तो दूसरी तरफ पेड़ खत्म होते जा रहे हैं। विभाग के मापदंड के अनुसार 33 प्रतिशत भूमि पर वन होना चाहिए जबकि महेंद्रगढ़ में मात्र 3 प्रतिशत भूमि पर वन हैं। पेड़ों की कटाई, देखरेख का अभाव तथा अन्य कारणों के चलते वन क्षेत्र बढ़ने की जगह कम हो रहे हैं। प्रति वर्ष छह हजार पेड़ कट जाते हैं। इनमें से लगभग एक हजार पेड़ सरकारी अनुमति पर काटे जाते हैं जबकि लगभग पांच पेड़ प्राकृतिक आपदा की भेंट चढ़ जाते हैं। इन पेड़ों के कारण वन विभाग को काफी नुकसान होता है।

देखरेख के लिए नाममात्र का बजट
सूत्रों के मुताबिक सरकार पर्यावरण सरंक्षण पर ज्यादा बजट जारी नहीं करती। अगर सरकार को पर्यावरण संरक्षित करना है तो उसे अपने बजट पर ध्यान देना ही होगा। वर्तमान में पौधों की देखरेख के लिए पांच वर्ष तक खर्च देना चाहिए, जबकि तीन वर्ष का खर्च की मिल रहा है। सरकार की ओर पहले वर्ष 100 प्रतिशत, दूसरे वर्ष 20 प्रतिशत तथा तीसरे वर्ष मात्र 10 प्रतिशत ही पौधों की देखरेख का खर्चा मिलता है। यही कारण है कि पौधे देखरेख के अभाव में सूख जाते हैं।

लोगों को होना जागरूक
पर्यावरण को संतुलित रखना क्षेत्र के लिए चुनौती बन गई है। जिले में मात्र 3 प्रतिशत वन रह जाना एक गंभीर स्थिति को दर्शाता है। इसके लिए सामाजिक संगठनों, आमजन एवं वन विभाग को एक साथ मिलकर काम करना होगा। इसके अलावा आमजन को जागरुक करना होगा। हर पौधा विशेष को लेकर काम करना होगा ताकि क्षेत्र में वन की प्रतिशतता बढ़ाई जा सके।

इस वर्ष लगाए जाएंगे लगभग 2 लाख पौधे
महेंद्रगढ़ वन विभाग इस वर्ष लगभग 2 लाख पौधे लगाएगा। इस बार विभाग पौधों की संख्या कम कर लोगों को प्रकृति से जोड़ने का प्रयास करेगा। पौधों का वितरण बृहस्पतिवार से शुरू किया जा चुका है। विभाग पौधा रोपण जुलाई के प्रथम सप्ताह से शुरू करेगा।


पौधे हर वर्ष लगाए जाते हैं और इनका वर्ष में दो बार इंसपेक्शन भी होता है। एक पौधे को बड़े बनने में सात से आठ वर्ष का समय लग जाता है और दूसरा महेंद्रगढ़ जिला सूखा क्षेत्र है पानी का अभाव है इस कारण पौधे मर जाते हैं। जिला राजस्थान सीमा से जुड़े होने के कारण राजस्थानी चरागाह यहां आते हैं जो पौधे को खा जाती हैं।
- राजेश कुमार, डीएफओ महेंद्रगढ़
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