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नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के चलते मरीज परेशान

Sat, 02 Mar 2019 11:19 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 02 Mar 2019 11:19 PM IST
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नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के चलते मरीज परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
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नारनौल। नांगल चौधरी निवासी राम स्वरुप शुक्रवार को जिला नागरिक अस्पताल में फैक्चर हाथ दिखाने के लिए आया था। लेकिन, हड्डी रोग विशेषज्ञ न होने से उन्हें निराशा हाथ लगी। ऐसे में कई मरीजों को रोजाना बिना उपचार के लौटना पड़ रहा है। अस्पताल में हड्डी रोग, ईएनटी, स्कीन और महिला रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। इसके अलावा डॉक्टरों के भी 20 पद खाली है। जिससे मरीजों को उपचार के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।
नारनौल जिला मुख्यालय 100 बिस्तरों का सरकारी नागरिक अस्पताल है। लेकिन, संसाधनों और डॉक्टरों के अभाव में मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। जिला अस्पताल में स्थानीय के साथ राजस्थान से भी मरीज उपचार के लिए आते हैं। ऐसे में डॉक्टरों की कमी से उन्हें भी परेशानी उठानी पड़ती है। अस्पताल प्रबंधन अन्य बीमारी के मरीजों को किसी प्रकार सेवाएं उपलब्ध करा रहा है लेकिन स्पेशलिस्ट डॉक्टर न होने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। हड्डी, ईएनटी और स्कीन के मरीजों को स्पेशलिस्ट डॉक्टर ही देख सकते हैं। ऐसे में इन मरीजों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ती है। कई बार पर्ची कटवाने के बाद रेफर करना होता है। विभागीय जानकारी के अनुसार हड्डी के डॉक्टर का पद करीब एक साल से खाली है। ईएनटी व स्कीन का बीच में आए थे, लेकिन एक-दो माह में तबादला हो गया। हाल में एक महिला रोग विशेषज्ञ ने त्यागपत्र दे दिया। इसमें गर्भवती महिलाओं को परेशानी होने लगी। जिस पर फिल्ड से महिला डॉक्टरों को डेपुटेशन पर जिला अस्पताल में लगाया गया है।
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सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र चेतीवाल ने बताया कि नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों व अन्य सुविधाओं के अभाव में रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय में खाली पड़े रोग विशेषज्ञों की कमी के चलते लोगों को निजी अस्पतालों में महंगे दामों में इलाज करवाने को मजबूर है। इनेलो नेता छोटेलाल गहली ने कहा कि जिला अस्पताल होने के बावजूद भी नागरिक अस्पताल सरकार की उपेक्षा बना हुआ है। यहां के जनप्रतिनिधि विकास का झूठा ठिठोरा पीट रहे है।
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20 मेडिकल अफसर के पद खाली है
जिला अस्पताल में मेडिकल आफिसर के 42 स्वीकृत पदों में 20 पद खाली है। एसएमओ में तीन में दो खाली, डिप्टी मेडिकल सुपरीडेंट के स्वीकृत दोनों पद खाली है। इसी प्रकार क्लीनिकल फिजियोलॉजिस्ट स्वीकृत एक पद है, जो खाली, फिजियोथैरेपी के दोनों पद खाली, स्टाफ नर्स के 38 में से 13 पद खाली है। फार्मासिस्ट के आठ से छह, लैब टेक्नीशियन में 10 में छह, रेडियोथैरेपी में पांच में तीन, ईसीजी के तीनों पद खाली है। इसके अलावा एटीए, प्लॉस्टर जैसे अन्य पद थी खाली है।

अस्पताल में हड्डी, ईएनटी और स्कीन के स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं है। इसके लिए सीएमओ को कई बार पत्र लिखा जा चुका है। फिल्ड से तीन महिला डॉक्टरों को डेपुटेशन पर गायनी वार्ड में लगाया गया है। इसके आलावा अन्य खाली पड़े मेडिकल अफसर के पदों को भरने की मांग की गई है।
- आशा शर्मा, एमएस, जिला अस्पताल, नारनौल

जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी का मामला उठाया गया था। पिछड़ा क्षेत्र होने के कारण लोग निजी अस्पतालों में इलाज नहीं करवा सकते। इस पर मुख्यमंत्री ने जल्द ही अस्पताल में रिक्त डॉक्टरों के पद भरने का आश्वासन दिया हुआ है।

- विधायक ओमप्रकाश यादव।

जिला अस्पताल होने के बावजूद भी सरकार की उपेक्षा का शिकार है। यहां के जनप्रतिनिधि विकास का झूठा डिंडोरा पीट रहे है। डाक्टरों की कमी के कारण लोग रोजाना परेशान हो रहे है।
- छोटेलाल गहली जिला इनेलो महासचिव।
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