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गेहूं के ट्रक गायब करने का मामला, पार्षद पति को तीन साल की सजा
Updated Tue, 13 Feb 2018 12:45 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। वर्ष 2006 में सरकारी गेहूं के ट्रक गायब करने के चर्चित मामले में वार्ड नंबर पांच की नगर पार्षद सुशीला देवी के पति ठेकेदार अशोक कुमार सैनी की तीन साल की सजा बरकरार रखते हुए अतिरिक्त जिला सेशन की अदालत ने ठेकेदार को नसीबपुर जेल भेज दिया है।
इस मामले में नारनौल के तत्कालीन मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी निशांत शर्मा की अदालत ने ठेकेदार अशोक कुमार सैनी को तीन साल की सजा व एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। सजा के तुरंत बाद आरोपी को सेशन कोर्ट से जमानत मिल गई थी। जमानत मिलने के बाद ठेकेदार अशोक सैनी ने निचली अदालत के इस फैसले को सेशन कोर्ट में चैलेंज किया था। जिस पर सुनवाई करते हुए नारनौल के एडीजे माननीय अजय कुमार वर्मा की अदालत ने गत 6 फरवरी 2018 को अशोक कुमार सैनी की अपील को खारिज कर दिया।
आपको बता दें कि 4 मार्च 2006 को कांफेड के तत्कालीन जिला मैनेजर ने नारनौल थाना पुलिस में एफआईआर के लिए एक पत्र लिखा था। जिसमें आरोप लगाए गए थे कि अशोक कुमार सैनी को अंतोदय अन्न योजना, एपीएल और बीपीएल कोटे का सरकारी गेहूं और चावल पहुंचाने के लिए ट्रांसपोर्ट ठेकेदार नियुक्त किया गया था। इस ठेकेदार को नारनौल के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के माध्यम से घुगेड़ा व पलवल में 9700 क्विंटल गेहूं पहुंचाने का आर्डर जारी किया गया था। ठेकेदार अशोक कुमार सैनी को उपरोक्त गेहूं कांफेड के स्टोर कीपर व सेलर ने 20 फरवरी से 28 फरवरी के बीच उठवा दिया था। जिसके लिए अलग-अलग बिलटी वाउचर भी दिए गए थे। ठेकेदार को यह गेहूं घुगेडा व पलवल के एफसीआई के माध्यम से वहां के डिपो होल्डरों को हैंडओवर करना था। 20 से 28 फरवरी के बीच उठाये गए कुल 9700 क्विंटल गेहूं में से 4 मार्च 2016 तक 8686 क्विंटल गेहूं ही डिपो होल्डरों को डिलीवरी करवाया गया। बाकी 1014 क्विंटल गेहूं की डिलीवरी के लिए ठेकेदार से बार-बार संपर्क किया गया लेकिन ना तो गेहूं डिपो होल्डरों को दिया गया और ना ही गेहूं ठेकेदार से उपलब्ध हुआ। सरकारी गेहूं अपने गंतव्य तक ना पहुंचाने पर ठेकेदार के खिलाफ अमानत में खयानत का मुकदमा दर्ज किया गया तथा जांच के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।
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करीब दस साल के लंब समय तक चली सुनवाई में कांफेड, खाद्य आपूर्ति विभाग व डिपो होल्डरों सहित कुल 16 गवाहों ने अपने बयान अदालत में दर्ज करवाये। इन गवाहों के बयान के आधार पर तत्कालीन मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी माननीय निशांत शर्मा की अदालत ने 11 दिसंबर 2015 को ठेकेदार अशोक सैनी को तीन साल की सजा तथा एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। सीजेएम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ ठेकेदार ने सेशन कोर्ट में अपील की थी। जिस पर अब एडीजे अजय कुमार वर्मा की अदालत ने सुनवाई करते हुए ठेकेदार की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है।
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नारनौल। वर्ष 2006 में सरकारी गेहूं के ट्रक गायब करने के चर्चित मामले में वार्ड नंबर पांच की नगर पार्षद सुशीला देवी के पति ठेकेदार अशोक कुमार सैनी की तीन साल की सजा बरकरार रखते हुए अतिरिक्त जिला सेशन की अदालत ने ठेकेदार को नसीबपुर जेल भेज दिया है।
इस मामले में नारनौल के तत्कालीन मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी निशांत शर्मा की अदालत ने ठेकेदार अशोक कुमार सैनी को तीन साल की सजा व एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। सजा के तुरंत बाद आरोपी को सेशन कोर्ट से जमानत मिल गई थी। जमानत मिलने के बाद ठेकेदार अशोक सैनी ने निचली अदालत के इस फैसले को सेशन कोर्ट में चैलेंज किया था। जिस पर सुनवाई करते हुए नारनौल के एडीजे माननीय अजय कुमार वर्मा की अदालत ने गत 6 फरवरी 2018 को अशोक कुमार सैनी की अपील को खारिज कर दिया।
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आपको बता दें कि 4 मार्च 2006 को कांफेड के तत्कालीन जिला मैनेजर ने नारनौल थाना पुलिस में एफआईआर के लिए एक पत्र लिखा था। जिसमें आरोप लगाए गए थे कि अशोक कुमार सैनी को अंतोदय अन्न योजना, एपीएल और बीपीएल कोटे का सरकारी गेहूं और चावल पहुंचाने के लिए ट्रांसपोर्ट ठेकेदार नियुक्त किया गया था। इस ठेकेदार को नारनौल के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के माध्यम से घुगेड़ा व पलवल में 9700 क्विंटल गेहूं पहुंचाने का आर्डर जारी किया गया था। ठेकेदार अशोक कुमार सैनी को उपरोक्त गेहूं कांफेड के स्टोर कीपर व सेलर ने 20 फरवरी से 28 फरवरी के बीच उठवा दिया था। जिसके लिए अलग-अलग बिलटी वाउचर भी दिए गए थे। ठेकेदार को यह गेहूं घुगेडा व पलवल के एफसीआई के माध्यम से वहां के डिपो होल्डरों को हैंडओवर करना था। 20 से 28 फरवरी के बीच उठाये गए कुल 9700 क्विंटल गेहूं में से 4 मार्च 2016 तक 8686 क्विंटल गेहूं ही डिपो होल्डरों को डिलीवरी करवाया गया। बाकी 1014 क्विंटल गेहूं की डिलीवरी के लिए ठेकेदार से बार-बार संपर्क किया गया लेकिन ना तो गेहूं डिपो होल्डरों को दिया गया और ना ही गेहूं ठेकेदार से उपलब्ध हुआ। सरकारी गेहूं अपने गंतव्य तक ना पहुंचाने पर ठेकेदार के खिलाफ अमानत में खयानत का मुकदमा दर्ज किया गया तथा जांच के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।
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करीब दस साल के लंब समय तक चली सुनवाई में कांफेड, खाद्य आपूर्ति विभाग व डिपो होल्डरों सहित कुल 16 गवाहों ने अपने बयान अदालत में दर्ज करवाये। इन गवाहों के बयान के आधार पर तत्कालीन मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी माननीय निशांत शर्मा की अदालत ने 11 दिसंबर 2015 को ठेकेदार अशोक सैनी को तीन साल की सजा तथा एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। सीजेएम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ ठेकेदार ने सेशन कोर्ट में अपील की थी। जिस पर अब एडीजे अजय कुमार वर्मा की अदालत ने सुनवाई करते हुए ठेकेदार की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है।