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हजारों यात्रियों के साथ तीर्थों की व्यवस्था से बेखबर है केडीबी

Thu, 27 Apr 2017 12:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र Updated Thu, 27 Apr 2017 12:23 AM IST
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Thousands of travelers are unaware of the arrangement of pilgrims with KDB, Kurukshetra
हजारों यात्रियों के साथ तीर्थों की व्यवस्था से बेखबर है केडीबी - फोटो : Amar Ujala

 महाभारतकालीन तीर्थों की व्यवस्था का जिम्मा भले कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के कंधों पर हो, मगर खास अवसरों पर ये तीर्थ किस हालात में हैं, इसकी केडीबी को खबर तक नहीं है। अंदाजा पिहोवा सरस्वती तीर्थ के सूखे घाटों से लगाया जा सकता है। यहां हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ी, क्योंकि अमावस्या के मौके पर सरस्वती तीर्थ के घाट सूखे पड़े थे। लोगों को ड्यूबवेल और बाल्टियों से पानी खींच खींच कर स्नान करने पर विवश होना पड़ा। ठीक ऐसे ही हालात पिछले माह चैत्र चौदस और अमावस्या के दौरान सन्निहित सरोवर और ब्रह्मसरोवर पर दिखे थे।

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पिहोवा सरस्वती तीर्थ पर श्रद्धालु स्नान करके लिए जान को जोखिम में डालते दिखे। कई श्रद्धालु सरस्वती तीर्थ के घाट की रेलिंग पर कर गहरे हिस्से में लटककर पवित्र जल की बाल्टियां भरते दिखे। गौरतलब है कि पिछले माह 26 से 28 मार्च तक पिहोवा का प्रसिद्ध चैत्र चौदस मेला था। इस मेले में देशभर से पहुंचने वाले लाखों यात्रियों के लिए जहां सरस्वती तीर्थ के घाट लबालब जल से भरे हुए थे, वहीं इस केडीबी की लापरवाही के चलते सन्निहित और ब्रह्मसरोवर के घाट सूखे पड़े थे। यह मामला अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था और इसके बाद पर्यटन मंत्री रामबिलास शर्मा मौके पर पहुंचे थे और इन हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए केडीबी अधिकारियों जमकर सुनाई थी।
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हालांकि इस घटना के बाद सबक लेते हुए केडीबी ने सन्निहित सरोवर के सभी घाटों के अलावा ब्रह्मसरोवर के एक घाट पर डुबकी लगाने के लिए पानी की व्यवस्था की थी। इसके अलावा ब्रह्मसरोवर के दो घाटों पर ट्यूबवेल तथा अन्य कई घाटों पर बाल्टियों से स्नान का प्रबंध किया, मगर इस बार ब्रह्मसरोवर के घाटों पर इतनी बड़ी संख्या में पशु और आवारा कुत्ते कैसे घुसे? और इन्हें बाहर निकालने की कोई व्यवस्था यहां नहीं दिखी।             
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अव्यवस्था का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि ब्रह्मसरोवर की परिक्रमा में बेसहारा गोवंश और आवारा कुत्ते घूमते रहे। जाहिर है कि ब्रह्मसरोवर में पिछले चार माह से चलाए मान जल के लिए वाटर प्रोजेक्ट चल रहा है, इसकी वजह से घाटों पर पानी नहीं है, लिहाजा सिर्फ एक घाट को भरने की व्यवस्था केडीबी ने की थी, यही कारण रहा है कि आज सबसे ज्यादा भीड़ इस घाट पर रही। हालांकि पुलिस का एक जवान डंडे से पशुओं को हांकता नजर आया, लेकिन केडीबी के चौकीदार नदारद दिखे। यहां साफ तौर पर केडीबी की लापरवाही नजर आई।

शिमला, दिल्ली और दूसरे राज्यों के श्रद्धालुओं का दर्द
शिमला से अपने परिवार के साथ महिला सरिता ने बताया कि वह पहली बार इस तीर्थ पर आई है और उनकी आस्था थी कि वे सरस्वती तीर्थ में स्नान करें, लेकिन सरोवर के जल को देखकर उन्हें बिना स्नान के ही संतोष करना पड़ा। वहीं दिल्ली से अपने पित्तरों के तपण के लिए आए मदन भुटानिया ने बताया कि आस्था तो डुबकी लगाने में है। भले ही सरोवर में जल किसी ट्यूबवेल से आ रहा हो, लेकिन आस्था सिर्फ डुबकी लगाने में है। उन्हें ताउम्र सरस्वती तीर्थ में स्नान नहीं करने का मलाल रहेगा।

नहीं रखा धार्मिक भावना का ख्याल: चक्रपाणी
विश्व हिंदू परिषद के नेता एवं तीर्थ पुरोहित आशीष चक्रपाणी के मुताबिक तीर्थ में अपर्याप्त जल देखकर आश्चर्य ही श्रद्धालुओं की भावना आहत हुई है। प्रशासन को अमावस से पहले ही सरोवर में जल में जल भरना चाहिए थास लेकिन दुर्भाग्य से प्रशासन ऐसा करने में असफल रहा। भविष्य में इस प्रकार की विकट स्थिती ना उत्पन्न हो उसके लिए प्रशासन को उचित कदम उठाने होंगे।

अमावस से पहले करने चाहिए थे इंतजाम पूरे
पार्षद सुखविंद्र सिंह ने बताया कि प्रशासन को अमावस से पहले से सरोवर में पानी का इंतजाम करना चाहिए था। भले ही चैत्र चौदस मेले के बाद सरोवर को खाली करके सफाई की जा रही थी। लेकिन प्रशासन को ज्ञात था कि अमावस पर दूर-दराज से श्रद्धालु तीर्थ पर पहुंचते है। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए पहले ही इंतजाम करने चाहिए थे। प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने का प्रयास कर रहा है। सरोवर में पानी के हालात देखकर श्रद्धालुओं ने बेशक बिना स्नान किए ही संतोष कर लिया हो। लेकिन श्रद्धालुओं की असली परीक्षा पीने के पानी के कारण हुई। अमावस पर पीने के पानी के लिए श्रद्धालुओं को इधर-उधर भटकना पड़ा।


ये है एसडीएम की प्रतिक्रिया
एसडीएम पूजा चांवरिया ने बताया कि उन्होंने सुबह तीर्थ की मॉनिटरिंग की थी। उस समय सरोवर में डेढ़ फीट पानी कम था। उन्हें ऐसी कोई सूचना नहीं मिली कि सरोवर में पानी की कमी के चलते थे किसी कोई परेशानी का सामना करना पड़ा हो। प्रशासन की ओर सरोवर पर लगे ट्यूबवेल लगातार चलते रहे। वहीं जब उनसे सवाल किया गया कि सरोवर में रेलिंग तक भी पानी नहीं था तो उन्होंने बताया सरोवर में शायद दो दिन लेट पानी छोड़ा गया। अगली बार वे सुनिश्चित करेंगे कि ऐसी समस्या ना हो।

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