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Kurukshetra News: राशन रहा न आशियाना, है आंखों में बेबसी के आंसू...

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 16 May 2024 06:04 AM IST
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There is no ration or shelter, there are tears of helplessness in the eyes...
कुरुक्षेत्र। काजल।
कुरुक्षेत्र। खाने को राशन न रहने को आशियाना। जो था वह भी जलकर खाक हो गया। अब भूखे पेट 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचे तापमान के बीच कड़ाके की गर्मी और लू के थपेड़े से बचने को एक पेड़ का ही आसरा है। आंखों से बेबसी के आंसू हैं। अब तो प्रशासन व सरकार से कुछ राहत मिल सके यही आस है।
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यह व्यथा है थीम पार्क के पास झुग्गियों में रहने वाले 10 परिवारों की, जिनकी झुग्गियां गत दिवस अचानक लगी आग की भेंट चढ़ गई थीं। इस आग में 10 झुग्गियां जलकर राख हो गई, थीं जिसमें जमा किया राशन व कपड़े तक नहीं बच पाए। गनीमत रही कि जानी नुकसान नहीं हुआ, लेकिन अब इन सभी लोगों के लिए अपना जीवन फिर से पटरी पर लाना बड़ी चुनौती बन गया है। पिछले करीब छह साल से झुग्गियों में रह रहे लोगों का यही ठिकाना था और दिहाड़ी मजदूरी कर बच्चों का पालन-पोषण कर रहे थे लेकिन आग ने सब कुछ खत्म कर उन्हें मुश्किल में डाल दिया। अब नई झुग्गियां खड़ी करना आसान नहीं है तो वहीं खुले आसमान के नीचे बच्चों को छोड़ मजदूरी के लिए भी नहीं जा पा रहे। बता दें कि गत मंगलवार को गुरुद्वारा छठी पातशाही के साथ सटी थीम पार्क में स्थित झुग्गियों में सुबह आग लग गई, जिससे करीब 10 झुग्गियां जलकर राख हो गई थीं। आग लगने का कारण तारों में शाॅर्ट सर्किट माना जा रहा है।
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कबाड़ बीनकर पाल रहे थे बच्चों का पेट, सब हुआ बर्बाद : शंकर
शंकर ने बताया कि वह कबाड़ बीनकर बच्चों का पालन-पोषण करते हैं और इतना ही कमा पाते हैं कि एक दिन का गुजारा हो सके। आग लगने से सब बर्बाद हो गया है। अब इतनी भी हिम्मत नहीं है कि तंबू और बांस ही खरीद कर ले आएं। ऐसे में चूल्हा जलाना भी मुश्किल हो रहा है। यहीं चिंता सता रही है कि अस्थायी ही सही, लेकिन अपने बच्चों के सिर पर छत कैसे लाई जा सके।
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गर्मी और मच्छरों की भरमार से बीमार होने का भय : काजल
महिला काजल का कहना है कि उसके पति की कुछ समय पहले मौत हो चुकी है और उसके तीन बच्चे हैं, जिनका पालन पोषण वह मजदूरी से करती है। घटना के दौरान वह मजदूरी पर गई हुई थी। सूचना मिलने पर घर आकर देखा तो सारा सामान जलकर राख हो गया। यहां तक कि कुछ पैसे थे वो भी जल गए। कड़ी धूप और मच्छर कीट के मौसम में छोटे बच्चों को कहां लेकर जाए, कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में बच्चे बीमार होने का भी भय बना हुआ है। प्रशासन व सरकार कुछ राहत दे तो उन्हें सहारा मिल सकता है।

कुरुक्षेत्र। काजल।

कुरुक्षेत्र। काजल।

कुरुक्षेत्र। काजल।

कुरुक्षेत्र। काजल।

कुरुक्षेत्र। काजल।

कुरुक्षेत्र। काजल।

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